प्रधानमंत्री जी रोना रो रहे हैं

प्रधानमंत्री जी रोना रो रहे हैं

प्रधानमंत्री जी की बात करें तो वो रोना रो रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है, कि क्या करें? सच तो बोल नहीं सकते, झूठ बोलें तो कितना बोलें? कहां-कहां बोलें और किससे बोलें? मुरादाबाद परिवर्तन महारैली में उन्होंने ...

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सोच और सम्बद्धता, अब बाजार में है

सोच और सम्बद्धता, अब बाजार में है

‘‘मगर यह तो दोगलापन है।‘‘ उन्होंने तल्खी से कहा। चेहरे पर भाव ऐसा था, जैसे इससे घिनौनी कोई चीज नहीं। ‘‘हां, है तो।‘‘ मैंने सीधे तौर पर अपनी स्वीकृति दी। मेरे जेहन में सवालों से घिरा तर्क था। ‘‘लेकिन, यह ...

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फिदेल कास्त्रो के लिये

फिदेल कास्त्रो के लिये

एक दबी ख्वाहिश थी, कॉमरेड फिदेल आपसे मिलने की मिल-बैठ कर बातें करने की यह पूछने की कि 21वीं सदी के समाजवाद को मार्क्सवाद की किन संभावनाओं से हम जोड़ें? क्रांति की किस सोच के साथ खड़े हों हम लेनिन के ...

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देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बढ़ती मांग

देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बढ़ती मांग

‘देशभक्ति’ और ‘राष्ट्रवाद’ की मांग अक्सर वे सरकारें करती हैं, जिनके पास अपनी पसंद का कपड़ा होता है, उन्हें पहनाने के लिये। जब से केन्द्र में मोदी की सरकार बनी है, तब से खास किस्म की देशभक्ति और खास किस्म ...

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जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

मार्क्सवाद के विरोधी सिर्फ दो ही किस्म के लोग होते हैं एक – वो जो उसे जानते नहीं दूसरा – वो जिनका हित उससे प्रभावित होता है। इसलिये, वो मार्क्सवाद की सूरत ही बिगाड़ देते हैं। उनके पास ऐसे लोगों ...

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विलेन ‘शेर खां‘ क्यों है?

विलेन ‘शेर खां‘ क्यों है?

रोज-ब-रोज की जिंदगी में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो फैलाती तो गंदगी हैं, मगर पता नहीं चलता। खिड़की खुली है, तो बाहर के नजारे को भी कमरे में जगह मिलेगी ही। शोर-शराबा होगा, आवाजें घुसेंगी। धूल-धुआं का आना भी ...

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फिदेल कास्त्रो – ‘बेहतर दुनिया संभव है‘

फिदेल कास्त्रो – ‘बेहतर दुनिया संभव है‘

हमारे जेहन में फिदेल कास्त्रो समाजवादी क्रांति के बदलते हुए स्वरूप की तरह हैं, जिसके मूल में मार्क्सवादी चिंतन धारा है। वे मार्क्स या लेनिन नहीं, उस सदी के नायक हैं, जिस सदी में समाजवादी क्रांति को समाज व्यवस्था में ...

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आग के कारोबारी

आग के कारोबारी

जिस आग को सहेज कर रखा कारोबारियों ने हम अश्वेतों को काबू में रखने के लिये, वह आग अब उनके अपने ही घरों में बेकाबू हो रही है। हम जले, जलते रहे, आज भी जल रहे हैं। अपनी बस्ती अपने ...

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युद्ध से घायल अमेरिकी अर्थव्यवस्था

युद्ध से घायल अमेरिकी अर्थव्यवस्था

जाने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने आंकवाद के विरूद्ध जारी युद्ध के लिये 11.6 बिलियन डॉलर का प्रस्ताव रखा है। जबकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर का ऐसा कर्ज है, जिसकी भरपायी करने की स्थिति में ...

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अवशेषों में बदलता अमेरिकी लोकतंत्र

अवशेषों में बदलता अमेरिकी लोकतंत्र

हम अभी-अभी चुने गये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बात नहीं करेंगे जिनके खिलाफ अमेरिका में प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्हें व्हाईट हाउस तक पहुंचने से रोकने की कोशिशें हो रही है। कुछ ऐसा हो रहा है, जो अमेरिकी लोकतंत्र ...

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