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विकल्पहीन 2019

विकल्पहीन 2019

लोकतंत्र की अपनी कोई मरज़ी होती है या नहीं? यह हम बाद में सोचेंगे। मगर वह चलती है सरकारों की मरज़ी से, यह हम जानते हैं और यह हमारा अपना अनुभव है। यदि सरकार पूंजीवादी है, तो लेकतंत्र पूंजीवादी है। ...

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पद्मावती : ‘केवल एक ही सत्य’ एक भयानक सोच है

पद्मावती : ‘केवल एक ही सत्य’ एक भयानक सोच है

फिल्म-जगत, राजनितिज्ञों इतिहासकारों और करणी सेना के जद्दोजहद के बीच अन्ततः रानी पद्मावती बडे पर्दे पर आ ही गई। अब कुछ दावेदारियों से मुक्ति पा कर रानी पद्मावती की कहानी सबकी हो जाएगी। चलचित्र के भव्य प्रदर्शन और उसके कभी ...

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अक्टूबर क्रांति के शताब्दि वर्ष में

अक्टूबर क्रांति के शताब्दि वर्ष में

आज की बात करने के लिये कल का जिक्र भी जरूरी है। शताब्दि भर पहले अल्बर्ट रीस विलियम ने लिखा था- ‘‘प्रतिक्रियावाद ने अपना मुंह खोल दिया था और वह उद्धत था।‘‘ यह 1917 के अक्टूबर क्रांति से ठीक पहले ...

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शैतान का दिमाग खाली नहीं

शैतान का दिमाग खाली नहीं

‘खाली घर शैतान का डेरा।‘ सुनते और पढ़ते हुए हम बड़े हुए हैं। क कहरा के अक्षर ज्ञान से लेकर विश्व विद्यालयों तक। कठपुतली बनने की सलाह हमें किसी ने नहीं दी। कृष्ण हों या कौटिल्य, कणांद हों या चार्वाक, ...

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बी.एच.यू. परिसर की सुरक्षा और निगरानियों का जाल

बी.एच.यू. परिसर की सुरक्षा और निगरानियों का जाल

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के उपकुलपति गिरीश चन्द्र त्रिपाठी लम्बी छुट्टि पर गये – व्यक्तिगत कारणों से। व्यक्तिगत कारण उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और जहां से वो अपनी सोच और समझ लाते हैं, वहीं से बताया गया। छात्राओं ...

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गांधी की औकात घट रही है

गांधी की औकात घट रही है

कभी आजादी की लडाई और आजादी के प्रतीक रहे गांधी जी की औकात मोदी सरकार के ‘स्वच्छता अभियान‘ में चश्में की हो गयी है। बड़े ही तरीके से उन्हें मारा जा रहा है। सोच और व्यक्तित्व के स्तर पर उन्हें ...

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बीएचयू – मुद्दे छोटे सवाल बड़े हैं

बीएचयू – मुद्दे छोटे सवाल बड़े हैं

काशी हिंदू विश्व विद्यालय -बीएचयू- का मुख्य द्वार खुलता है और बंद हो जाता है। लोग जानना चाहते हैं- यह हो क्या रहा है? स्थितियां सामान्य नहीं हैं। पुलिस, पीएसी की छावनियां स्थायी हो रही हैं। मुद्दे छोटे और सवाल ...

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हमारे पास न जेब होगी, न देश होगा

हमारे पास न जेब होगी, न देश होगा

2014 के आम चुनाव और उसके परिणाम को हमने कॉरपोरेट जगत के द्वारा सत्ता के अपहरण के नजरिये से ही देखा है। हम यह मानते रहे हैं, कि यह वैधानिक तख्तापलट है, जिसमें वॉलस्ट्रीट की निजी कम्पनियां, बैंक और देशी ...

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स्थगित लोकतंत्र

स्थगित लोकतंत्र

‘‘भारतीय राजनीति में क्या मोदी का कोई विकल्प है?‘‘ यह सवाल विपक्ष की ओर उछाला जाता है, और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के सामने खड़ा किया जाता है, यह प्रमाणित करने के लिये कि वे कमजोर ...

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क्या लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की देखभाल ऐसे की जाती है?

क्या लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की देखभाल ऐसे की जाती है?

हामिल अंसारी ने कोई गलत बात नहीं की कि ‘‘लोकतंत्र की पहचान अल्पसंख्यकों को मिली सुरक्षा से होती है। देश के मुसलमानों में डर, बेचैनी और असुरक्षा की भावना है।‘‘….. कि ‘‘विपक्ष को यदि सरकार की नीतियों की आलोचना का ...

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