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स्थगित लोकतंत्र

स्थगित लोकतंत्र

‘‘भारतीय राजनीति में क्या मोदी का कोई विकल्प है?‘‘ यह सवाल विपक्ष की ओर उछाला जाता है, और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के सामने खड़ा किया जाता है, यह प्रमाणित करने के लिये कि वे कमजोर ...

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लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 2

लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 2

प्रतिक्रियावादी ताकतें इस बात को अच्छी तरह जानती हैं, कि अंततः उनका वास्ता जनअसंतोष से ही पड़ेगा। आम जनता से लड़ाई उसे लड़नी होगी। ऐसी सरकारें यह भी जानती हैं, कि आम जनता का भरोसा जब तक बना रहेगा, सरकारें ...

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लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 1

लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 1

स्तम्भों को हिलाने की नीति- अपने राजनीतिक प्रतिद्वन्दी और विपक्ष को कुचलने की जैसी राजनीति भाजपा कर रही है, वैसी राजनीति भारतीय लोकतंत्र में पहले कभी नहीं की गयी। राजनीतिक एकाधिकार की उसकी सोच उस ओर बढ़ चुकी है जो ...

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वाम दलों की पीठ

वाम दलों की पीठ

देश में प्रतिक्रियावादी ताकतों ने निर्णायक बढ़त बना ली है। केंद्र में मोदी की कॉरपोरेट सरकार है, और राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनती जा रही हैं। राजनीतिक रूप से भाजपा ऐसी स्थितियां बना रही है, कि आने वाले ...

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पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 3

पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 3

(इस आलेख के लिये हमने मई दिवस को आधार बनाया था, किंतु लगा इतिहास को दुहराने से अच्छा है, जहां उसे रोका गया है, वहां से धक्का दें। उन ताकतों की पहचान जरूरी है, जिन्होंने इतिहास को रोका है।) हम ...

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पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 2

पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 2

(इस आलेख के लिये हमने मई दिवस को आधार बनाया था, किंतु लगा इतिहास को दुहराने से अच्छा है, जहां उसे रोका गया है, वहां से धक्का दें। उन ताकतों की पहचान जरूरी है, जिन्होंने इतिहास को रोका है।) ‘‘हम ...

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पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा

पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा

(इस आलेख के लिये हमने मई दिवस को आधार बनाया था, किंतु लगा इतिहास को दुहराने से अच्छा है, जहां उसे रोका गया है, वहां से धक्का दें। उन ताकतों की पहचान जरूरी है, जिन्होंने इतिहास को रोका है।) हम ...

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मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को एक ब्राण्ड समझना गलत नहीं है। वो देश को ब्राण्ड बना रहे हैं। देशभक्ति की ब्राण्डिंग कर रहे हैं, और देशद्रोह की भी। जिसे आने वाले कल में तब समझा जाएगा, जब हम देश की दुर्दशा की बात ...

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समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

पूंजीवाद का संकटग्रस्त होना समाजवादी सर्वहारा क्रांति की ऐतिहासिक अनिवार्यता है, किंतु समाजवाद के सामने भी गंभीर संकट है। यह सवाल है, कि सोवियत संघ का विघटन समाजवादी समाज व्यवस्था के विघटन का आखिरी पड़ाव नहीं। क्या राज्य की इजारेदारी ...

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चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनाव जनतंत्र का झूठा चेहरा बन कर रह गया है। आम जनता चाह कर भी अपना प्रतिनिधि नहीं चुन सकती। जिन जन प्रतिनिधियों से जनतंत्र में चुनी हुई सरकारें बनती हैं, वे जन प्रतिनिधि आम जनता का प्रतिनिधित्व ही नहीं ...

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