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Category Archives: सोच की जमीन

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वाम दलों की पीठ

वाम दलों की पीठ

देश में प्रतिक्रियावादी ताकतों ने निर्णायक बढ़त बना ली है। केंद्र में मोदी की कॉरपोरेट सरकार है, और राज्यों में भी भाजपा की सरकारें बनती जा रही हैं। राजनीतिक रूप से भाजपा ऐसी स्थितियां बना रही है, कि आने वाले ...

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पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 3

पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 3

(इस आलेख के लिये हमने मई दिवस को आधार बनाया था, किंतु लगा इतिहास को दुहराने से अच्छा है, जहां उसे रोका गया है, वहां से धक्का दें। उन ताकतों की पहचान जरूरी है, जिन्होंने इतिहास को रोका है।) हम ...

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पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 2

पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा – 2

(इस आलेख के लिये हमने मई दिवस को आधार बनाया था, किंतु लगा इतिहास को दुहराने से अच्छा है, जहां उसे रोका गया है, वहां से धक्का दें। उन ताकतों की पहचान जरूरी है, जिन्होंने इतिहास को रोका है।) ‘‘हम ...

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पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा

पूंजीवाद – सदियों का हत्यारा

(इस आलेख के लिये हमने मई दिवस को आधार बनाया था, किंतु लगा इतिहास को दुहराने से अच्छा है, जहां उसे रोका गया है, वहां से धक्का दें। उन ताकतों की पहचान जरूरी है, जिन्होंने इतिहास को रोका है।) हम ...

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मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को एक ब्राण्ड समझना गलत नहीं है। वो देश को ब्राण्ड बना रहे हैं। देशभक्ति की ब्राण्डिंग कर रहे हैं, और देशद्रोह की भी। जिसे आने वाले कल में तब समझा जाएगा, जब हम देश की दुर्दशा की बात ...

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समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

पूंजीवाद का संकटग्रस्त होना समाजवादी सर्वहारा क्रांति की ऐतिहासिक अनिवार्यता है, किंतु समाजवाद के सामने भी गंभीर संकट है। यह सवाल है, कि सोवियत संघ का विघटन समाजवादी समाज व्यवस्था के विघटन का आखिरी पड़ाव नहीं। क्या राज्य की इजारेदारी ...

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चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनाव जनतंत्र का झूठा चेहरा बन कर रह गया है। आम जनता चाह कर भी अपना प्रतिनिधि नहीं चुन सकती। जिन जन प्रतिनिधियों से जनतंत्र में चुनी हुई सरकारें बनती हैं, वे जन प्रतिनिधि आम जनता का प्रतिनिधित्व ही नहीं ...

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सोवियत क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बहाने – 1

सोवियत क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बहाने – 1

सोवियत संघ की सर्वहारा क्रांति का यह शताब्दी वर्ष है। सोवियत क्रांति के साथ ही अब सोवियत संघ के विघटन का जिक्र जरूरी है, इसलिये नहीं कि सोच के स्तर पर मार्क्सवाद को असंदर्भित करार दिया जा सके, लेनिनवाद के ...

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सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 3

सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 3

गोर्बाचोव अपने काले कारनामों के गवाह हैं। उन्होंने सोवियत संघ के विघटन को ऐतिहासिक दुर्घटना ही नहीं बनाया, बल्कि समाजवादी विश्व, वैश्विक आर्थिक एवं सामरिक संतुलन और साम्राज्यवादी आतंक के विरूद्ध तीसरी दुनिया के देशों की सुरक्षा एवं उनके विकास ...

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सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 2

सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 2

‘‘मैं उनके (गोर्बाचोव) किसी भी बात पर विश्वास नहीं करता’’ रूस की कम्युनिस्ट पार्टी के वॉलेरी राश्किन ने कहा- ‘‘गोर्बाचोव लोकतंत्र के प्रवर्तक और ऐसे सिक्रेट एजेन्ट हैं जो संदेहास्पद लोगों को गलत काम करने के लिये उकसाते हैं। वे ...

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