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Category Archives: सोच की जमीन

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मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को एक ब्राण्ड समझना गलत नहीं है। वो देश को ब्राण्ड बना रहे हैं। देशभक्ति की ब्राण्डिंग कर रहे हैं, और देशद्रोह की भी। जिसे आने वाले कल में तब समझा जाएगा, जब हम देश की दुर्दशा की बात ...

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समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

पूंजीवाद का संकटग्रस्त होना समाजवादी सर्वहारा क्रांति की ऐतिहासिक अनिवार्यता है, किंतु समाजवाद के सामने भी गंभीर संकट है। यह सवाल है, कि सोवियत संघ का विघटन समाजवादी समाज व्यवस्था के विघटन का आखिरी पड़ाव नहीं। क्या राज्य की इजारेदारी ...

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चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनाव जनतंत्र का झूठा चेहरा बन कर रह गया है। आम जनता चाह कर भी अपना प्रतिनिधि नहीं चुन सकती। जिन जन प्रतिनिधियों से जनतंत्र में चुनी हुई सरकारें बनती हैं, वे जन प्रतिनिधि आम जनता का प्रतिनिधित्व ही नहीं ...

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सोवियत क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बहाने – 1

सोवियत क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बहाने – 1

सोवियत संघ की सर्वहारा क्रांति का यह शताब्दी वर्ष है। सोवियत क्रांति के साथ ही अब सोवियत संघ के विघटन का जिक्र जरूरी है, इसलिये नहीं कि सोच के स्तर पर मार्क्सवाद को असंदर्भित करार दिया जा सके, लेनिनवाद के ...

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सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 3

सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 3

गोर्बाचोव अपने काले कारनामों के गवाह हैं। उन्होंने सोवियत संघ के विघटन को ऐतिहासिक दुर्घटना ही नहीं बनाया, बल्कि समाजवादी विश्व, वैश्विक आर्थिक एवं सामरिक संतुलन और साम्राज्यवादी आतंक के विरूद्ध तीसरी दुनिया के देशों की सुरक्षा एवं उनके विकास ...

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सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 2

सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार – 2

‘‘मैं उनके (गोर्बाचोव) किसी भी बात पर विश्वास नहीं करता’’ रूस की कम्युनिस्ट पार्टी के वॉलेरी राश्किन ने कहा- ‘‘गोर्बाचोव लोकतंत्र के प्रवर्तक और ऐसे सिक्रेट एजेन्ट हैं जो संदेहास्पद लोगों को गलत काम करने के लिये उकसाते हैं। वे ...

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फिदेल के बिना, क्यूबा क्रांति की वर्षगांठ

फिदेल के बिना, क्यूबा क्रांति की वर्षगांठ

एक दबी हुई ख्वाहिश थी फिदेल कास्त्रो से मिलने, हाथ मिलाने और मिल बैठ कर यह पूछने की कि 21वीं सदी क समाजवाद को हम मार्क्सवाद की किन संभावनाओं से जोडे? मार्क्स और लेनिन के सामने हम कैसे खड़े हों? ...

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सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार

सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार

(सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार स्टॉलिन के बाद ख्रुश्चेव से लेकर ब्रेजनेव और गोर्बाचोव तक चार दशक लम्बी कतार में खड़े हैं, मगर हम गोर्बाचोव और येल्तसिन का जिक्र यहां करेंगे।) 25 दिसम्बर 1991 की रात सोवियत संघ का ...

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सोच और सम्बद्धता, अब बाजार में है

सोच और सम्बद्धता, अब बाजार में है

‘‘मगर यह तो दोगलापन है।‘‘ उन्होंने तल्खी से कहा। चेहरे पर भाव ऐसा था, जैसे इससे घिनौनी कोई चीज नहीं। ‘‘हां, है तो।‘‘ मैंने सीधे तौर पर अपनी स्वीकृति दी। मेरे जेहन में सवालों से घिरा तर्क था। ‘‘लेकिन, यह ...

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जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

मार्क्सवाद के विरोधी सिर्फ दो ही किस्म के लोग होते हैं एक – वो जो उसे जानते नहीं दूसरा – वो जिनका हित उससे प्रभावित होता है। इसलिये, वो मार्क्सवाद की सूरत ही बिगाड़ देते हैं। उनके पास ऐसे लोगों ...

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