Home / सोच की जमीन (page 3)

Category Archives: सोच की जमीन

Feed Subscription

फिदेल कास्त्रो – ‘बेहतर दुनिया संभव है‘

फिदेल कास्त्रो – ‘बेहतर दुनिया संभव है‘

हमारे जेहन में फिदेल कास्त्रो समाजवादी क्रांति के बदलते हुए स्वरूप की तरह हैं, जिसके मूल में मार्क्सवादी चिंतन धारा है। वे मार्क्स या लेनिन नहीं, उस सदी के नायक हैं, जिस सदी में समाजवादी क्रांति को समाज व्यवस्था में ...

Read More »

आतंकवाद के विरोध का अड्डा

आतंकवाद के विरोध का अड्डा

जैसे कभी कम्युनिस्ट विरोधी होना अमेरिकी फैशन था, वैसे ही आतंकवाद विरोधी होना आज कल नेशनल और इंटरनेशनल फैशन बन गया है। और यह फैशन भी अमरिका से ही आया है। फिर आप तो जानते ही हैं, अमेरिकी राजनीति, सभी ...

Read More »

जेएनयू एक खुली किताब है – 2

जेएनयू एक खुली किताब है – 2

‘जेएनयू एक खुली किताब‘ के तहत हमने देश के वामपंथी और कम्युनिस्ट पार्टियों से बातें की थी, बातें हम उन्हीं से करेंगे, क्योंकि मार्क्सवाद से हमारा अपना नाता है, मगर बीच में एक ऐसी सरकार घुस आयी है, जिसे प्रकाश ...

Read More »

जेएनयू एक खुली किताब है

जेएनयू एक खुली किताब है

जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय -जेएनयू- एक खुली किताब है, जिसे भाजपा और संघ जैसे फॉसिस्ट ताकतों से ज्यादा देश के वामपंथी उन राजनीतिक दलों को पढ़ना चाहिये जिन्होंने ‘सर्वहारा क्रांति‘ की सोच से किनारा कर लिया है, और ‘विकास के ...

Read More »

चे और वानी का खेमा

चे और वानी का खेमा

उमर खालिद पर बहस की जरूरत नहीं कई बार ऐसा होता है, कि पांव जमा कर चलने वाला आदमी भी फिसलन का शिकार हो जाता है। वैसे भी, फिसलन है। ढ़लान है। सोच के सामने सवाल है। इस देश में ...

Read More »

सरकारें सबसे बड़ा खतरा बन गयी हैं

सरकारें सबसे बड़ा खतरा बन गयी हैं

किसी भी देश के लिये सरकार उसकी सम्प्रभुसत्ता का प्रतीक होती हैं। जिसे बनाने का अधिकार उस देश की आम जनता को होता है, इसलिये सैद्धांतिक रूप से देश की सम्प्रभुसत्त उस दे के लोगों में नीहित होती है, जिसे ...

Read More »

जेएनयू छात्र आंदोलन पर लदी जिम्मेदारियां-3

जेएनयू छात्र आंदोलन पर लदी जिम्मेदारियां-3

(फासीवाद के खिलाफ लोकतंत्र की लड़ाई सिर्फ छात्र नहीं लड़ सकते, लड़ कर निर्णायक जीत हासिल नहीं कर सकते, इस बात को समझने और उनके पक्ष में राजनीतिक एवं सामाजिक मोर्चा बनाने की अनिवार्यता है। बाजारवाद के खिलाफ हर स्तर ...

Read More »

जेएनयू छात्र आंदोलन पर लदी जिम्मेदारियां-2

जेएनयू छात्र आंदोलन पर लदी जिम्मेदारियां-2

(सरकार का फॉसिस्ट एवं कॉरपोरेट समर्थक होना तो प्रमाणित होता जा रहा है, मगर फासीवाद और कॉरपोरेट के खिलाफ हम कितने हैं? यह गंभीर सवाल है। कह सकते हैं- वर्गगत सामाजिक एकजुटता नहीं है। कह सकते हैं- राजनीतिक मोर्चा नहीं ...

Read More »

जेएनयू छात्र आंदोलन पर लदी जिम्मेदारियां-1

जेएनयू छात्र आंदोलन पर लदी जिम्मेदारियां-1

जेएनयू छात्र आंदोलन पर जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारियां लद गयी हैं। किसी भी आंदोलन को तोड़ने, उसके प्रभावों को रोकने की कोशिशों के तहत यदि हम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र आंदोलन को देखें तो विवादहीन रूप से उसने देश ...

Read More »

एक कदम पीछे हटना, पराजय नहीं

एक कदम पीछे हटना, पराजय नहीं

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रों का जारी भूख हड़ताल यदि टूटता है, या उसका रूख बदलता है, तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि छात्रों का आंदोलन टूट गया, मुद्दे खत्म हो गये। स्थितियां सामान्य हुई। संघ की सख्ती को सरकार ...

Read More »
Scroll To Top