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Category Archives: सोच की जमीन

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विकास के जरिये समाजवाद और एक कहानी

विकास के जरिये समाजवाद और एक कहानी

वेनेजुएला में ‘विकास के जरिये समाजवाद‘ की अवधारणा को, 6 दिसम्बर 2015 को, एक गहरा झटका लगा है। नेशनल असेम्बली का चुनाव वहां के समाजवादी हार गये हैं। वैसे, मुझे नहीं लगता कि जिन दक्षिण पंथी ताकतों को सफलता मिली ...

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शिक्षा को बाजार के हवाले करने की साजिश

शिक्षा को बाजार के हवाले करने की साजिश

बाजार के लिये भारत के प्राकृतिक संसाधन पर अधिकार जमाने के लिये- भूमि अधिग्रहण कानून भारत के मानव श्रमशक्ति को सस्ते में बेचने के लिये- श्रम कानूनों में संशोधन और अब भारत के बौद्धिक सम्पदा को विश्व व्यापार संगठन के ...

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संघ की तरह हो राज्य सरकारों के लिबास

संघ की तरह हो राज्य सरकारों के लिबास

लोकतंत्र में आम चुनाव क्यों? यह एक ऐसा सवाल है, जिससे टकराये बिना, न तो हम अपने देश की चुनी हुई सरकारों को समझ सकते हैं, ना ही हम यह जान सकते हैं, कि वो क्या कर रही हैं? सामान्य ...

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सरकार और बाजार की साझेदारी के बाद के करार

सरकार और बाजार की साझेदारी के बाद के करार

दुनिया के किसी भी देश की सरकार को इस बात की छूट नहीं दी जा सकती कि वो अपने देश की आम जनता की जिम्मेदारियों से हाथ खींच ले। लेकिन, दुनिया की ज्यादातर देशों की सरकारें आज यही कर रही ...

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समाजवादी क्रांति के लिये लोकतंत्र एक मोर्चा

समाजवादी क्रांति के लिये लोकतंत्र एक मोर्चा

सोच और कार्य नीति के स्तर पर, समाजवादी क्रांति के लिये इस बात को मंजूरी देने में कोई हर्ज नहीं है, कि लोकतंत्र एक मोर्चा है। जिसकी अपनी कोई सूरत नहीं है। यह दौर मिलावटी है, और हम विचारों के ...

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21वीं सदी के दावेदार – 3

21वीं सदी के दावेदार – 3

21वीं सदी के दावेदार साम्राज्यवादी ताकतें हैं- यूरो-अमेरिकी साम्राज्यवाद और मुक्त व्यापार के नये क्षेत्रों की रचना करने वाले देश। जिनके पास चीन की वित्तीय क्षमता और रूस की सामरिक एवं कूटनीतिक साझेदारी है। जिसके  बारे में हमारी बातचीत पहले ...

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दुनिया के फैले बाजार में बच्चा

दुनिया के फैले बाजार में बच्चा

 विद्यार्थी दिन-प्रतिदिन बच्चों को बचपन के अधिकार से दूर किया जा रहा है। इस अधिकार की हँसी उड़ाते सच अपनी सीखें हम तक रोज़ाना पहुँचाते हैं। हमारी दुनिया धनी बच्चों को यूँ देखती है मानो वे कोई चलती-फिरती तिजोरी हों! ...

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21वीं सदी के दावेदार – 2

21वीं सदी के दावेदार – 2

सोच की जमीन के अन्तर्गत पहली किश्त – 13 अप्रैल, 2015 के आगे- चीन की क्षमताओं का सही आंकलन करना मुश्किल है। रूस की क्षमताओं के बारे में भी अंदाजा लगाना आसान नहीं। और दोनों की संयुक्त आर्थिक, सामरिक एवं ...

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यह एक गाथा है… पर आप सबके लिए नहीं! – हावर्ड फास्ट

यह एक गाथा है… पर आप सबके लिए नहीं! – हावर्ड फास्ट

‘मजदूर बिगुल’ से आभार सहित। [वर्ष 1947 के मई दिवस के अवसर पर लिखा गया प्रसिद्ध अमेरिकी उपन्यासकार हावर्ड फास्ट का यह लेख मई दिवस की गौरवशाली परम्पराओं की याद एक ऐसे समय में करता है जब अमेरिका में लम्बे ...

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इक्कीसवीं सदी के दावेदार (अमेरिकी सदी की दावेदारी) – 1

इक्कीसवीं सदी के दावेदार (अमेरिकी सदी की दावेदारी) – 1

21वीं सदी का पहला दशक बीत चुका है, और आधा दशक भी बीतने को है। यह सदी मानव सभ्यता के लिये निर्णायक सिर्फ इसलिये है, कि हम घातक संघर्षों के बीच है। संक्रमण की विपरीत परिस्थितिया ही एक दूसरे के ...

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