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Category Archives: सोच की जमीन

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राज्य को आम जनता के पक्ष में खड़ा करना आज की अनिवार्यता है

राज्य को आम जनता के पक्ष में खड़ा करना आज की अनिवार्यता है

कौन किस मुकाम पर है, और किसने अपने लिये कितना धन जोड़ा है? इसकी खबरें छपती हैं। कर्इ पत्रिकायें और सर्वे एजेंसियां ऐसी हैं, जो बिलगेट, अम्बानी, जिंदल और ऐसे ही लोगों को ऊपर नीचे करती रहती हैं। इन्हें उस ...

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वैश्विक व्यवस्था के टूटने का खतरा क्यों उठाया जा रहा है?

वैश्विक व्यवस्था के टूटने का खतरा क्यों उठाया जा रहा है?

दुनिया का जो नजारा हमारे सामने है, वह किसी दलदल में फंसे भारी-भरकम उस जानवर की तरह है, जिसकी छटपटाहट निकलने की, उसे और भी गहरे में उतार रही है। जो किनारे खड़े हैं, वह भी उस दलदल में फंसे ...

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राजनीति में कारोबार, तेल में घाटे से मुनाफे का व्यापार

राजनीति में कारोबार, तेल में घाटे से मुनाफे का व्यापार

देश और जनसमस्याओं के बारे में जब, सरकार और समाज की सोच अलग-अलग होने लगती है, तब मुददे उलझ जाते हैं। सामाजिक विकास, विकस की आर्थिक दिशा और राजनीति में कारोबार, कारोबारियों को मिली छूट सी लगती है, क्योंकि हमें ...

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संस्कृति का स्वरूप, महाद्वीपीय हो रहा है

संस्कृति का स्वरूप, महाद्वीपीय हो रहा है

संस्कृति की चर्चा हम चाहे जिस रूप में करें, वह विभाजित ही रहेगी, क्योंकि समाज विभाजित है, परिवेश विभाजित है, भौगोलिक परिसिथतियां विभाजित हैं और इन सबसे निर्मित सोच विभाजित है। संस्कृति के कैनवास को लोग हमेशा बड़ा कर देते ...

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क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 4

क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 4

सीरिया और र्इरान के मुददे ने दुनिया को तात्कालिक रूप से विभाजित ही नहीं कर दिया है, बलिक यह भी प्रमाणित कर दिया है कि ”अब अमेरिकी साम्राज्यवाद को दी जाने वाली छूट का अंत भी जरूरी है।” रूस के ...

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क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 3

क्या हम, तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़े हैं? – 3

विश्व परिदृश्य बदल गया है। एक ओर नवउदारवादी वैश्वीकरण है, जिनके पीछे एकाधिकारवादी शकितयां हैं। किंतु इन शकितयों के पीछे भी रूस और चीन जैसी एकाधिकारवादी शकितयां हैं। जो बहुध्र्रुवी विश्व की अवधारणा का साथ दे रहे हैं। दूसरी ओर ...

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आज की दुनिया, सोवियत संघ के विघटन के बाद की दुनिया है

आज की दुनिया, सोवियत संघ के विघटन के बाद की दुनिया है

बीसवीं सदी के अंतिम दशक में, 25 दिसम्बर 1991 को सोवियत संघ का विघटन हुआ। और 30 दिसम्बर 2006 को, इराक में सददाम हुसैन को फांसी दे दी गयी, इराक का पतन हुआ। आज की दुनिया अमेरिकी साम्राज्य के पतन ...

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