Home / साहित्य (page 10)

Category Archives: साहित्य

Feed Subscription

शैलेन्द्र कुमार शुक्ल की चार कविताएँ

शैलेन्द्र कुमार शुक्ल की चार कविताएँ

1. लखनऊ जब भी मिलता है अकेले में लखनऊ जी भर कर गरियाता हूँ एक बार सर तक नहीं उठाता पान-मसाला और ज़र्दे को गुटखे मे तब्दील कर कानून का मज़ाक उड़ता हुआ एक अदना सा आदमी गोबराए मुंह से ...

Read More »

निवेदिता भावसार की पांच कविताएँ

निवेदिता भावसार की पांच कविताएँ

1. नदी मैंने नहीं नापी, तुम्हारी गहराई नदी, मैंने कभी नहीं नापी तुम्हारी गहराई न मैंने डूबना चाहा, ना हीं तुम्हे पार करना मैं बस छपछपाती रही, किनारों पर ही अपने पैर सहलाती रही तुम्हारी लहरों को तकती रही तुम्हारी ...

Read More »

सुकांत भट्टाचार्य की चार कविताएं

सुकांत भट्टाचार्य की चार कविताएं

1. सिगरेट मै हूँ सिगरेट पर तुम लोग मुझे जीने क्यों नहीं देते ? हमें क्यूँ जलाकर नि:शेष करते हो ? क्यूँ इतनी अल्प आयु है हमारी ? मानवता की क्या दुहाई तुम दोगे ? हम लोगों की कीमत बहुत ...

Read More »

साहित्य में जो मरने से बच जाते हैं

साहित्य में जो मरने से बच जाते हैं

साहित्य में जो मरने से बच जाते हैं, बाजार उन्हें अपने कब्जे में ले लेता है। उन्हें बार-बार छापता है, और धडल्ले से बेचता है। बेचते-बेचते, कमाते-कमाते, वह उन्हें अपना बना लेता है, उन पर अपनी दावेदारी को पुख्ता करने ...

Read More »

समीक्षा – हमारी कहानी कहने वाला कवि : हरीश चन्द्र पाण्डे

समीक्षा – हमारी कहानी कहने वाला कवि : हरीश चन्द्र पाण्डे

‘लोगों की चेतना उनके अस्तित्व को निर्धारित नहीं करती, बल्कि समाज में उनका अस्तित्व ही उनकी चेतना को निर्धारित करता है.’ मार्क्स  के इस बहु’उद्धृत कथन को कवि निराला के उस कथन से मिला कर देखें जिसमें उन्होंने कहा है मनुष्य की तरह ...

Read More »

रपट – “युवा कवि शम्भु यादव का एकल कविता-पाठ”

रपट – “युवा कवि शम्भु यादव का एकल कविता-पाठ”

“मंडेला” यह तेरह फ़रवरी दो हज़ार बारह की ख़बर है दक्षिण अफ्रीका में बैंक नोटों पर अब मंडेला दिखेंगे आगे मैं कहता हूँ– जैसे हमारे यहाँ गाँधी दिखते हैं अब दक्षिण अफ्रीका में भी कुछ इस तरह से होगा पाँच ...

Read More »

मनीषा जैन की तीन कविताएं

मनीषा जैन की तीन कविताएं

1. सच्चाई को स्वीकार क्यों नहीं करते तुम तुम्हारे एक अद्द् चौबारे में जब जब होती हैं गंभीर राजनीतिक, सामाजिक गोष्ठियां उन बेदर्द, बेखौफ संगठनों की सिरिया या ईरान व ईराक के उन मानवता के विरोधी संगठनों की क्या तुम्हारी छाती ...

Read More »

रंजीत वर्मा की तीन कविताएँ

रंजीत वर्मा की तीन कविताएँ

रंजीत वर्मा हमारे समय के एक महत्वपूर्ण कवि हैं | आज जब साहित्य में चारों ओर अन्याय और शोषण के खिलाफ़ एक सन्नाटा सा पसरा हुआ है, ऐसे में कवि रंजीत वर्मा इस ख़ामोशी को लगातर तोड़ने के अथक प्रयास ...

Read More »

सोहम सिंह पूनियाँ की दो कविताएं

सोहम सिंह पूनियाँ की दो कविताएं

1. पाँखें और पंजे मैं आकाश में उड़ते हुए पक्षी को नहीं देख रहा था मैं देख रहा था आकाश में लहराते हुए पाँखो को धरती को अपने नीचे खोलकर और भारहीन होकर उड़ते हुए पक्षी की पाँखें… मैं धरती ...

Read More »

अपर्णा अनेकवर्णा की पांच कविताएं

अपर्णा अनेकवर्णा की पांच कविताएं

1. देश वाघा के इस पार खड़ी ढूंढती रही देश को ‘देश’ बताने वाली रेखा बस मिटटी मिली वहां और मिली उस पर उगी दूब जो दोनों तरफ की मिटटी-दूब का विस्तार मात्र थी.. एक सी हास्यास्पद कवायद और नाटकीय ...

Read More »
Scroll To Top