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Category Archives: साहित्य

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दीवारों को मैंने

दीवारों को मैंने

दीवारों को मैंने बाहों की तरह जुड़ते देखा है! कह नहीं सकते हैं उन्हें आप कि दीवारों को बोलना नहीं आता, वो सपाट और बेजुबान हैं! नहीं कह सकते हैं उन्हें आप कि छत के बोझ को उठाये रहने का ...

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जो बीता नहीं, वह दिन हमारे पास है

जो बीता नहीं, वह दिन हमारे पास है

नहीं बीता वह दिन जो अच्छा हो, वो रातें नहीं बीतीं जिसके बाद, दिन निकलता है! समय अंधेरे में बीता, यह सच है, मगर उजाले की गहरी चमक है हमारे पास यह भी तो सच है! माना, साजिशों की धार ...

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जंगल कहां है?

जंगल कहां है?

जंगल कहां है? यह सवाल नहीं, खोज है कि जंगल वहां है जहां कुल्हाडि़यां उठी हैं और कुल्हाडि़यों के खिलाफ पेड़ खेड़े हैं! जंगल वहां है जहां, हम और आप खड़े हैं, और हमारे बीच बिगड़ती, बनती दुनिया की संभावनायें ...

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