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Category Archives: साहित्य

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निखिल ‘नादां’ की तीन कविताएं

निखिल ‘नादां’ की तीन कविताएं

1. बातें बातें बहुत जरुरी हैं, एक रोज़ कुछ हुआ तुम्हे, तुमने एक दो बातें कम कीं मुझसे, अगली रोज़ मैंने भी दो बातें कम की तुमसे | फिर एक रोज़, बातें बंद हो गयी | दीवारों से, तुम्हारी दी ...

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बाढ़ का चेहरा

बाढ़ का चेहरा

इस बीच हमें तबीयत की मार झेलनी पड़ी, बाढ़ का खतरा उठाना पड़ा। इरादे न होते तो शायद हम जीने के लायक ही न बचते, मगर ऐसा नहीं हुआ। अच्छी बात बस इतनी है, कि शहर की सड़कों पर घूमती ...

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स्मिता की पांच कविताएँ

स्मिता की पांच  कविताएँ

1. संवादहीनता की स्थिति में अब इसका निर्णय कौन लेगा कि तुम सही हो या गलत इस विभ्रम की स्थिति में जब तुम ही प्रेक्षक हो इस कालचक्र के जहाँ वक़्त जकड़ा हुआ है तुम्हारे ही तर्कों में उस एक ...

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सब कुछ सहने का सन्नाटा?

सब कुछ सहने का सन्नाटा?

आज की तारीख में किसी के लिये यह बताना मुश्किल है, कि ‘‘हम कहां हैं?‘‘ क्योंकि हमारे होने की पहचान मिट गयी है। यदि आप कहते हैं कि ‘‘हम इंसान हैं‘‘ तो घड़ी के कांटे और मशीनों के पुर्जे आपकी ...

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एक अच्छी खबर के लिये शुभकामनायें

एक अच्छी खबर के लिये शुभकामनायें

आईये, एक अच्छी खबर बांटें। आशीष मिश्र को अनुनाद सम्मान मिला। आशीष मेरे लिये बीएचयू के शोध छात्र हैं, एक छोटा सा कमरा है पहली मंजिल पर। उन सीढ़ियों से ऊपर चढ़ कर जिन पर सप्ताह में एक बार झाडू ...

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एक राजनीतिक कविता

एक राजनीतिक कविता

एक राजनीतिक कविता झूठ के गंभीर पेशे को समझने की नाकाम कोशिश है। आज कल, मैं यही कर रहा हूं। x    x    x देख रहा हूं- कबाड़ी को कबाड़ बेचता हुआ। उसके पास समय को थाम कर घूमता हुआ एक ...

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सीमा संगसार की पांच कविताएँ

सीमा संगसार की पांच कविताएँ

1.बाल दिवस ठिठूरते गुलाबी जाड़ा में नन्हे हथेलियों से धोते हुए झूठे चाय के गिलास में वह ढूंढता है, गर्म चाय की उष्मा काश—- थोड़ी गर्माहट मिल जाती इस कंपकंपाते हाथों को बूढा मालिक जब चिल्लाता है उस पर तेज ...

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निखिल ‘नादां’ की तीन कविताएं

निखिल ‘नादां’ की तीन कविताएं

1. नहर में चाँद ऑफिस से घर लौट रहा था, रेलगाड़ी में बैठे बैठे , खिड़की से बाहर नज़र चली गयी, चांदनी रात थी | खिड़की से बाहर , आसमान की तरफ देखा, तो पाया, चाँद भी बड़ी रफ़्तार से, ...

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परितोष कुमार ‘पीयूष’ की तीन कविताएँ

परितोष कुमार ‘पीयूष’ की तीन कविताएँ

1.अजन्मी बच्ची उस अजन्मी बच्ची के हत्या की सारी साजिशें गढ़ी जा चुकी थी पराध्वनिक चित्रण की पुर्जी में लिंग पता लगते ही० उस बेचारी, बेजुवान, अपूर्ण और निराकार बच्ची की गलती बस इतनी थी कि वह लड़की जन्मती० घर ...

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मनोज कुमार गुप्ता की पांच कविताएँ

मनोज कुमार गुप्ता की पांच कविताएँ

1.सफेद रोशनी चांद की सफेद रौशनी दस्तक देती है बिना किसी परवाह हर रात हर आंगन में जहां आज भी आंगन बचे हैं। वो सफेद रोशनी नहीं जानती किसी अमीरी गरीबी के भेद को, उसे कोई गुरेज नहीं उस फूस ...

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