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Category Archives: साहित्य

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[शहादत दिवस पर विशेष] भगत सिंह सिक्का या शहादत का विज्ञापन नहीं

[शहादत दिवस पर विशेष] भगत सिंह सिक्का या शहादत का विज्ञापन नहीं

पांच रूपये के गिलट छाप सिक्के के सांचे में ढ़ले भगत सिंह को मैं खर्च नहीं कर पाता एक कप चाय, एक पावरोटी या खुदरा पैसा के रूप में जो, एक सदी का सरकारी सम्मान है जहां गांधी हजार रूपये ...

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रमेश प्रजापति की दो कविताएँ

रमेश प्रजापति की दो कविताएँ

1. महानगर में मज़दूर अभी-अभी आए हैं पूर्वांचल से या शायद मालदा से रेलगाड़ी में चढ़कर दिहाड़ी मज़दूर पेट में मचलती इच्छाएँ और हाथों में लिए रोज़ी-रोटी का हुनर मुस्कुरा रहे हैं उतर के महानगर के प्लेटफाॅर्म पर उमंग से ...

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दृश्य

दृश्य

सीन 1 एक कॉर्पोरेट ऑफिस में 10 लोग काम कर रहे हैं, एक फ़ौज से रिटायर्ड डॉक्टर साहब घुसते हैं. सवाल उछालते ‘बताओ यहाँ बिहारी कौन-कौन है ?’ ‘मैं बिहारी हूं बताइए क्या समस्या है आपको’. खुंदक में आया एक ...

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निदा नवाज़ की पांच कविताएं

निदा नवाज़ की पांच कविताएं

1. जीवन झांकता जीवन बुझे हुए चेहरे की पॉवडर-तले छुपी हर उस झुर्री में से झांकता है जो ग्राहक के निकलते ही पछतावे और मजबूरी की पीड़ा से और गहरी हो जाती है . *** जीवन पसीने की हर उस ...

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निदा नवाज़ की तीन कविताएं

निदा नवाज़ की तीन कविताएं

1. हमारी अम्मा की ओढ़नी वे जब आते हैं रात-समय दस्तक नहीं देते हैं तोड़ते हैं दरवाजे़ और घुस आते हैं हमारे घरों में वे दाढ़ी से घसीटते हैं हमारे अब्बू को छिन जाती है हमारी अम्मा की ओढ़नी या ...

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देशभक्ति अब बाजार में, बाजार के लिये

देशभक्ति अब बाजार में, बाजार के लिये

यह अच्छी खबर है, कि वाम रचनाकार और सामाजिक सरोकार रखने वाले लोगों की बातें सुनी जाने लगी हैं, वो अकेले नहीं हैं। उनके पक्ष में, या विरोध में अब आवाजें आने लगी हैं। उन्होंने बढ़ती हुई सामाजिक असहिष्णुता का ...

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श्वेता राय की पांच कविताएं

श्वेता राय की पांच कविताएं

1. दोस्ती रिश्तों को जीते हुये हम आँखों की पुतलियों में जीते हैं कई भाव और तय होती हैं हर भाव की एक निश्चित परिधि कि तभी बीज बन उतर जाता है एक रिश्ता मन की जमीन पर जो एक ...

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मार दें आप, जेएनयू को मार दें

मार दें आप, जेएनयू को मार दें

एक शिकंजा है लोगों को कसने कस कर उन्हें मारने के लिये। आपने रोहित वेमुला को मारा मैं तो कहता हूं आप कन्हैया कुमार को मार दें, उन तमाम लोगों को मार दें, जिन्हें मारने का खयाल आपके जेहन में ...

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नित्यानंद गायेन की चार कविताएं

नित्यानंद गायेन की चार कविताएं

1. अगले वर्ष अगले फिर निकलेगी झांकी राजपथ पर भारत भाग्य विधाता लेंगे सलामी डिब्बों में सजाकर परोसे जाएंगे विकास के आंकड़े शहीदों की विधवाओं को पदक थमाएं जाएंगे राष्ट्र अध्यक्षों के शूट की चमक और बढ़ जाएगी जलती रहेगी ...

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नंदना पंकज की चार कविताएँ

नंदना पंकज की चार कविताएँ

1. अवसरवाद अवसर के अनुकुल अपनी सुविधानुसार हम चुनते है इतिहास से कोई नायक/विचारक महापुरूष पूजने लगते हैं उन्हें ईश्वर की भाँति रिचाओं सी दोहराते रहते है उनकी सुक्तियाँ अपने ‘वाद’ को अपना धर्म बना लेते हैं ढोते रहते है ...

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