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Category Archives: कविता

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  • [मई दिवस पर विशेष] हंथौड़ा लोहा बन गया

    [मई दिवस पर विशेष] हंथौड़ा लोहा बन गया

    सैकड़ों बाहों के साथ उठी हमारी बाहें और एक मजबूत हंथौड़ा जंग लगे लोहे पर गिरा धड़ाम से। जबर्दस्त शोर हु...

  • मिट्टी होने की लड़ाई

    मिट्टी होने की लड़ाई

    लोहे को काट और मोड़-बांध कर खड़ा करता है वह उस इमारत का ढ़ांचा जिसकी गहरी बुनियाद में है वह मिट्टी जो ल...

  • पोस्टर

    पोस्टर

    ‘जो गुनाह हमने किये नहीं उन गुनाहों की सजा हमें मिलेगी’, खबर पक्की है। और मैं समझता हूं कि सजा हमें ...

  • बाजार में बिके पतंगों की डोर

    बाजार में बिके पतंगों की डोर

    खबरें फैलायी गयीं राजभवनों से कि ‘पतंग की डोर हमारे हाथों में है।’ हमने बाजार में बिके पतंगों को देख...

  • हमने जो सुना, हमने जो देखा है

    हमने जो सुना, हमने जो देखा है

    देश में सरकार हमारी है और चरवाहा कस्साई नहीं यह हमने सुना है। X X X देखा है हमने चरवाहे को मवेशियों ...

  • फिदेल कास्त्रो के लिये

    फिदेल कास्त्रो के लिये

    एक दबी ख्वाहिश थी, कॉमरेड फिदेल आपसे मिलने की मिल-बैठ कर बातें करने की यह पूछने की कि 21वीं सदी के स...

  • आग के कारोबारी

    आग के कारोबारी

    जिस आग को सहेज कर रखा कारोबारियों ने हम अश्वेतों को काबू में रखने के लिये, वह आग अब उनके अपने ही घरो...

  • रावण का दहन राम के साथ

    रावण का दहन राम के साथ

    श्री राम भक्त वानरों ने कल मचाया उत्पात। खुले दरवाजे से घुस आये कमरे में किताबों को रेक से, खाने के ...

हारे हुए लोगों के साथ

हारे हुए लोगों के साथ

सपनों में हम हारे हुए लोगों के साथ होते हैं। इसलिये जागने के बाद सपने टूटते नहीं, सवाल करते हैं, जानना चाहते हैं, उन लोगों के बारे में जो सपनों में आते हैं। जिनके बदन पर होते हैं जख्मों के ...

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दीवारों को मैंने

दीवारों को मैंने

दीवारों को मैंने बाहों की तरह जुड़ते देखा है! कह नहीं सकते हैं उन्हें आप कि दीवारों को बोलना नहीं आता, वो सपाट और बेजुबान हैं! नहीं कह सकते हैं उन्हें आप कि छत के बोझ को उठाये रहने का ...

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जो बीता नहीं, वह दिन हमारे पास है

जो बीता नहीं, वह दिन हमारे पास है

नहीं बीता वह दिन जो अच्छा हो, वो रातें नहीं बीतीं जिसके बाद, दिन निकलता है! समय अंधेरे में बीता, यह सच है, मगर उजाले की गहरी चमक है हमारे पास यह भी तो सच है! माना, साजिशों की धार ...

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जंगल कहां है?

जंगल कहां है?

जंगल कहां है? यह सवाल नहीं, खोज है कि जंगल वहां है जहां कुल्हाडि़यां उठी हैं और कुल्हाडि़यों के खिलाफ पेड़ खेड़े हैं! जंगल वहां है जहां, हम और आप खड़े हैं, और हमारे बीच बिगड़ती, बनती दुनिया की संभावनायें ...

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