Home / साहित्य / कविता (page 5)

Category Archives: कविता

Feed Subscription
  • [मई दिवस पर विशेष] हंथौड़ा लोहा बन गया

    [मई दिवस पर विशेष] हंथौड़ा लोहा बन गया

    सैकड़ों बाहों के साथ उठी हमारी बाहें और एक मजबूत हंथौड़ा जंग लगे लोहे पर गिरा धड़ाम से। जबर्दस्त शोर हु...

  • मिट्टी होने की लड़ाई

    मिट्टी होने की लड़ाई

    लोहे को काट और मोड़-बांध कर खड़ा करता है वह उस इमारत का ढ़ांचा जिसकी गहरी बुनियाद में है वह मिट्टी जो ल...

  • पोस्टर

    पोस्टर

    ‘जो गुनाह हमने किये नहीं उन गुनाहों की सजा हमें मिलेगी’, खबर पक्की है। और मैं समझता हूं कि सजा हमें ...

  • बाजार में बिके पतंगों की डोर

    बाजार में बिके पतंगों की डोर

    खबरें फैलायी गयीं राजभवनों से कि ‘पतंग की डोर हमारे हाथों में है।’ हमने बाजार में बिके पतंगों को देख...

  • हमने जो सुना, हमने जो देखा है

    हमने जो सुना, हमने जो देखा है

    देश में सरकार हमारी है और चरवाहा कस्साई नहीं यह हमने सुना है। X X X देखा है हमने चरवाहे को मवेशियों ...

  • फिदेल कास्त्रो के लिये

    फिदेल कास्त्रो के लिये

    एक दबी ख्वाहिश थी, कॉमरेड फिदेल आपसे मिलने की मिल-बैठ कर बातें करने की यह पूछने की कि 21वीं सदी के स...

  • आग के कारोबारी

    आग के कारोबारी

    जिस आग को सहेज कर रखा कारोबारियों ने हम अश्वेतों को काबू में रखने के लिये, वह आग अब उनके अपने ही घरो...

  • रावण का दहन राम के साथ

    रावण का दहन राम के साथ

    श्री राम भक्त वानरों ने कल मचाया उत्पात। खुले दरवाजे से घुस आये कमरे में किताबों को रेक से, खाने के ...

जू लिझी की पांच कविताएं

जू लिझी की पांच कविताएं

ये कविताएँ चीन की फ़ॉक्सकॅान कम्पनी में काम करने वाले एक प्रवासी मज़दूर जू़ लिझी (Xu lizhi) ने लिखी हैं। लिझी ने 30 सितम्बर 2014 को आत्महत्या कर ली थी। लेकिन लिझी की मौत आत्महत्या नहीं है, एक नौजवान से ...

Read More »

नूर मुहम्मद नूर की तीन गज़लें

नूर मुहम्मद नूर की तीन गज़लें

1. हर घड़ी रिश्ता ग़मो से जोड़ता है रातदिन कौन है मुझमें, जो मुझको तोड़ता है रातदिन वह जो दिखलाता है सबको आईना या यूँ कहो मैं वो शीशा हूँ जो पत्थर तोड़ता है रातदिन ताकि कल गुल लहलहा उठ्ठें ...

Read More »

फिलिस्तीनी कवि हुस्साम मधून की कविता

फिलिस्तीनी कवि हुस्साम मधून की कविता

एक साल बाद – जंग के बाद हम हाजिर हैं जंग के एक साल बाद हम हाजिर हैं। हम जो जंग के बाद भी जिंदा हैं। हम अभी भी खाते हैं और सोते हैं। हम अभी भी काम पर जाते ...

Read More »

अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त दो

अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त दो

6. फिदायीन वो निकल गया फैक्ट्री बिना लगाये सील मोहर बिना टेस्ट प्रमाणित हुए कि अभी कच्चा था वो अपरिक्व बच्चा था वो जन्नत की हूरों का आशिक दूसरी दुनिया में खुद के लिए पाने को उम्दा मुकाम अपनी दुनिया ...

Read More »

अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त एक

अनवर सुहैल की दस कविताएं – किश्त एक

अनवर सुहैल की दस कवितायें हमारे सामने हैं – सिलसिलेवार! जैसे एक नदी अपने ही किनारों को छू कर बहती है! बात हदों और किनारों की करती है, मगर बात सिर्फ हदों और किनारों की नहीं होती, उससे आगे की ...

Read More »

शिरीष मौर्य की आठ कविताएं

शिरीष मौर्य की आठ कविताएं

1. कुछ प्रलापों से पहले एक बिखरा हुआ, टूटता-सा आलाप गांधार निषाद और धैवत का (बसें गिर जाती हैं पहाड़ों से/लील जाती हैं नदियां उन्हें भी/जिनकी वे प्रिय थीं) मृतकों का संसार बढ़ता जा रहा है उसे और बढ़ाने कुछ ...

Read More »

राज्यवर्द्धन की छः कविताएँ

राज्यवर्द्धन की छः कविताएँ

1. खेल चोर सिपाही मंत्री राजा का बच्चे खेल रहे थे – चॊर, सिपाही, मंत्री, राजा का खेल डेस कॊस सिंगल बुलबुल मास्टर सिपाही सिपाही चॊर कॊ पकड़ॊ -मंत्री ने आदेश दिया पकड़ लिया -सिपाही चिल्लाया राजा के सामने पेश ...

Read More »

पंकज चतुर्वेदी की तीन कविताएँ

पंकज चतुर्वेदी की तीन कविताएँ

1. 1947 में (सईद अख़्तर मिर्जा की फि़ल्म ‘नसीम’ देखकर) 1947 में जो मुसलमान थे उन्हें क्यों चला जाना चाहिए था पाकिस्तान ? जिन्होंने भारत में ही रहना चाहा उन्हें ग़रीब बनाये रखना क्यों ज़रूरी था ? जिस जगह राम ...

Read More »

प्रभात मिलिंद की कविता

प्रभात मिलिंद की कविता

चूहे भादो के काले बदराये दिन हों या पूस की चुभने वाली ठंढ रातें जब एकदम निश्शब्द हो जाती हैं थक कर बेसुध…औंधी गिरीं, और गहरी स्याह जड़ता, अँधेरे और सन्नाटे के ख़िलाफ़ तभी किसी एकांत से दर्ज़ होती है ...

Read More »

प्रदीप त्रिपाठी की चार कविताएँ

प्रदीप त्रिपाठी की चार कविताएँ

1. कविता में अचानक चुप हो जाना’ महापुरुषों की फसलें अब सूख गई हैं संताप-संलिप्त-जिजीविषाओं के विस्मृत कंठ खूँटे से बंधे विचारों के साथ अट्टहास करते हुए आम आदमियों की जुगाली और जुगलबंदियों के खंडहर-बीच अपने-अपने वजूदों के द्वंद्व में ...

Read More »
Scroll To Top