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  • ठगी की उल्टी कथा

    ठगी की उल्टी कथा

    एक कथा- एक ब्राम्हण को बछिया दान में मिली। जिसे लेकर दूसरे गावं वह अपने घर को चला। रास्ते में जंगल प...

  • बुखार

    बुखार

    बुखार नया है। डॉक्टरों ने समझ तो लिया, लेकिन मर्ज को चाहने वालों के लिये, उन्होंने कई जांच लिखे। मले...

  • शिनाख्त

    शिनाख्त

    हम कहां हैं? हमारी समझ में नहीं आ रहा है, जैसे कोई भूलभुलइया, कोई तिलस्म हो, जहां आग, आग नहीं। पानी,...

  • कीचड़ में

    कीचड़ में

    मेरे जेहन से यह बात निकल चुकी है, कि ‘‘कीचड़ में कमल खिलता है।‘‘ बे-मौसम के बरसात से भी, घर के सामने...

  • दृश्य

    दृश्य

    सीन 1 एक कॉर्पोरेट ऑफिस में 10 लोग काम कर रहे हैं, एक फ़ौज से रिटायर्ड डॉक्टर साहब घुसते हैं. सवाल उछ...

  • दोस्त का नाम दोस्त ही था – निवेदिता भावसार

    दोस्त का नाम दोस्त ही था – निवेदिता भावसार

    एक कोई शहर था ,बड़ा ही खूबसूरत सा याद शहर नाम का। मेरे ख्वाबों के शहर से बहुत दूर था वो। वहां तक जाने...

  • लघु कथा के नायक

    लघु कथा के नायक

    1 ‘‘अंधा अंधा ही होता है, चाहे वह आंख का अंधा हो, या अक्ल का अंधा हो।‘‘ अंधे को देख कर किसी ने मुझसे...

  • कुआं

    कुआं

    यह पानी के लिये निरर्थक श्रम की ऐसी कहानी है, जो पूरा न हो कर भी सिर्फ इसलिये पूरी है, कि पानी के बि...

ठगी की उल्टी कथा

ठगी की उल्टी कथा

एक कथा- एक ब्राम्हण को बछिया दान में मिली। जिसे लेकर दूसरे गावं वह अपने घर को चला। रास्ते में जंगल पड़ता था। तीन ठगों की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने बछिया को बकरी बता कर ब्राम्हण को ठग लिया। ...

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बुखार

बुखार

बुखार नया है। डॉक्टरों ने समझ तो लिया, लेकिन मर्ज को चाहने वालों के लिये, उन्होंने कई जांच लिखे। मलेरिया, मियादी, मौसमी बुखार और न जाने क्या-क्या? कुछ ने डेंगू और चिकनगुनिया भी लिखा। दिमागी बुखार के बारे में भी ...

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शिनाख्त

शिनाख्त

हम कहां हैं? हमारी समझ में नहीं आ रहा है, जैसे कोई भूलभुलइया, कोई तिलस्म हो, जहां आग, आग नहीं। पानी, पानी नहीं। जमीन, जमीन नहीं। यहां तक कि आदमी, आदमी और जानवर, जानवर तक नहीं लग रहा है। चारो ...

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कीचड़ में

कीचड़ में

मेरे जेहन से यह बात निकल चुकी है, कि ‘‘कीचड़ में कमल खिलता है।‘‘ बे-मौसम के बरसात से भी, घर के सामने कीचड़ इतना भर जाता है, कि घर के पिछवाड़े बसने वाले सूअर सामने भी डेरा डाल देते हैं। ...

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दृश्य

दृश्य

सीन 1 एक कॉर्पोरेट ऑफिस में 10 लोग काम कर रहे हैं, एक फ़ौज से रिटायर्ड डॉक्टर साहब घुसते हैं. सवाल उछालते ‘बताओ यहाँ बिहारी कौन-कौन है ?’ ‘मैं बिहारी हूं बताइए क्या समस्या है आपको’. खुंदक में आया एक ...

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दोस्त का नाम दोस्त ही था – निवेदिता भावसार

दोस्त का नाम दोस्त ही था – निवेदिता भावसार

एक कोई शहर था ,बड़ा ही खूबसूरत सा याद शहर नाम का। मेरे ख्वाबों के शहर से बहुत दूर था वो। वहां तक जाने में पूरी एक नींद लग जाती थी । जहाँ आँख खुलती वही वो शहर होता। याद ...

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लघु कथा के नायक

लघु कथा के नायक

1 ‘‘अंधा अंधा ही होता है, चाहे वह आंख का अंधा हो, या अक्ल का अंधा हो।‘‘ अंधे को देख कर किसी ने मुझसे कहा। मैं ‘हां‘ में सिर हिलाने को ही था, कि मुझे अक्ल का अंधा न समझा ...

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कुआं

कुआं

यह पानी के लिये निरर्थक श्रम की ऐसी कहानी है, जो पूरा न हो कर भी सिर्फ इसलिये पूरी है, कि पानी के बिना आदमी जी नहीं सकता। इसलिये अंतिम सांस तक जीने की लड़ाई तो हमें लड़नी ही होगी। ...

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ग – रामनाथ राय

ग – रामनाथ राय

दोपहर में तेज धूप होने के कारण सड़क का पिच भी मानो गलना शुरू हो गया था। गले हुए इसी पिच के रास्ते बसें चल रही हैं, सड़क पर ट्रामें चल रही हैं। उसी सड़क पर लोग भी चल रहे ...

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आंख का नाम रोटी – हरि भटनागर

आंख का नाम रोटी – हरि भटनागर

बाहर कोई बच्चा रो रहा है। रोने की आवाज़ ऐसी कि लगता, बच्चा किसी तकलीफ में है – चोट लगी है या कोई दूसरी पीड़ा है। मैं अपने काम में लगा हूं। आम काटने में। पिछले साल किसी झंझट की ...

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