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Category Archives: वक्रदृष्टि

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  • लकड़बग्घे की हंसी

    लकड़बग्घे की हंसी

    आपके जी में जो आये कह सकते हैं। अक्ल यदि आपकी है, तो उसका दीवालियापन भी तो अपका ही होगा। वैसे, अक्ल ...

  • गाय एक पॉवरफुल प्राणी है

    गाय एक पॉवरफुल प्राणी है

    पहले बड़े-बड़े लेखकों और कवियों की पंक्तियां दे दी जाती थीं, और कहा जाता था- संदर्भ के साथ व्याख्या की...

  • बद्जुबानी भी तो जुबान है

    बद्जुबानी भी तो जुबान है

    बातों और बकवासों की राजनीति चल पड़ी है। यह क्या कह दिया अखिलेश जी आपने कि ‘‘महानायक गुजरात के गदहों क...

  • बहुमंजिली ईमारत पर टंगा ‘देश‘

    बहुमंजिली ईमारत पर टंगा ‘देश‘

    चंद लोग आये और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री की तस्वीर को बहुमंजिली ईमारत के महत्वपूर्ण हिस्से पर टां...

  • पढ़-लिख कर हम कहां फंस गये?

    पढ़-लिख कर हम कहां फंस गये?

    पढ़ने-लिखने की हमारी आदत रही है, मगर क्या करें, पढ़-लिख कर हम बुरे फंसे। न घर के रहे न घाट के। खुद को ...

  • स्मृति जी खुश हैं

    स्मृति जी खुश हैं

    मोदी जी ने अपने मंत्री मंडल में विस्तार किया। फेर बदल किये। क्षमता का आंकलन किया गया और अपनी क्षमता ...

  • शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार

    शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार

    एक बार जंगल राज्य में राजा का चुनाव होना था. अजी चुनाव क्या… बस खाना-पूर्ति तो करनी थी ताकि जं...

  • भारत माता की जय

    भारत माता की जय

    जब सवाल देशभक्ति का हो तो कभी पीछे नहीं हटना चाहिए. हम जिस देश में रहें और उसके प्राचीन सामन्ती विचा...

पानी का मेढक

पानी का मेढक

कल रात फिर मैंने सपना देखा | लगातर तीन दिन तक बारिश के कारण दिल्ली की सड़के तालाब बन चुकी थीं | बड़ी –बड़ी गाड़ियाँ उनमें तैर रही थी ऐसा लग रहा था कि सार्क और व्हेल तैर रही हों ...

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महानायक, आप ही समझदार हैं!

महानायक, आप ही समझदार हैं!

कालिख और कोयले सभी नाराज हैं, कि दलाली तो लोग करते हैं, मगर बद्नामी हमारी ओर धकेल देते हैं। उन्होंने मोदी जी से मुलाकात की इंदिरा जी को कोसा, जिन्होंने कोयले का राष्ट्रीयकरण किया मनमोहन जी को भला कहा, बुरा ...

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अच्छे दिनों की आपात लैंडिंग

अच्छे दिनों की आपात लैंडिंग

साल भर का रिपोर्ट कार्ड लिये पीएम साहब अपनी तारीेफ खुद ही करते फिर रहे हैं। ऐसा नहीं है, कि उनकी तारीफ करने वाला कोई नहीं है। लोग हैं, संघ-भाजपा की टीम है, सरकारी तत्र और मीडिया है। घरों में ...

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सेल्फी इसी को कहते हैं भाई!

सेल्फी इसी को कहते हैं भाई!

मोदी जी पहले अपना पीठ थपथपाते हैं, फिर, फूले नहीं समाते हैं, और फिर अपना फोटो खींच लेते हैं, इसी को सेल्फी कहते हैं। कई सवाल और सवालों के जवाब मोदीनुमा होते हैं- अपना ढोल बजाते हुए। अपनी मुनादी करते ...

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मोदिस्तान या मुरीदिस्तान, तय आप करें

मोदिस्तान या मुरीदिस्तान, तय आप करें

पहले मुरीदों के बीच छनती थी, आज-कल बनती है। यदि कोई एक पत्थर उछालता है, तो दूसरी ओर से चार पत्थर उछल आते हैं ‘‘कौन किसका मुरीद है?‘‘ अब यह सवाल नहीं रह गया है। अब सवाल यह हो गया ...

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गदहा हाईजैक हो गया

गदहा हाईजैक हो गया

खुदा मेहरबान, तो गदहा पहलवान। गदहों में इस बात की खबर बांटी गयी और वो खुदा की मेहरबानी पाने के लिये निकल पड़े। मशक्कत की, पसीना बहाया मलबे ढोये जान जोखिम में डाला गदहों की सोच, आनेवाले अच्छे दिनों की ...

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मुनाफे का रस

मुनाफे का रस

‘‘हां तो भाई मेरे! हमारे मोदी जी अच्छे कारोबारी है। ‘‘विवादों की बोली लगवाते हैं, और उसे नीलाम कर देते हैं।‘‘ जहां धंधे की बात हो, वहां मुनाफे का रस टपकने लगता है। मोदी जी का सूट 4 करोड़ 31 ...

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तेल गरम हो रहा है

तेल गरम हो रहा है

हम मोदी नगर में हैं। लेकिन यह मोदी काॅन्टीनेन्टल वाला मोदी नगर नहीं है, ना ही यह गुजरात में अब तक, जो नहीं बन सका, वह मोदी नगर है, बल्कि यह शिव की नगरी काशी का ऐसा मोदी नगर है, ...

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बे-पते की बात

बे-पते की बात

बात हमेशा पते की हो, यह जरूरी नहीं। हां, बे-पते की बात भी कई बार सही ठिकाने पर पहुंच जाती है। हमें मानना पड़ा। हमें यह भी मानना पड़ा कि बेघर-बार लोगों की तरह बे-पता बातों की तादाद, तेजी से ...

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संसद में राजनीति सदाबहार झूठ है

संसद में राजनीति सदाबहार झूठ है

‘‘राजनीति में पतझड़ नहीं, बहारों का तबादला होता है। नमो आये तो ममो के बहारों का तबादला हो गया।‘‘ उन्होंने सुना और उनके चेहरे के दो टुकड़े हो गये। एक ने मुझे लानत भेजी, दूसरे ने तंज कसा- ‘‘यह ममो ...

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