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Category Archives: सवाल-दर-सवाल

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एक साथ चुनाव-राजनीतिक एकाधिकार का प्रस्ताव

एक साथ चुनाव-राजनीतिक एकाधिकार का प्रस्ताव

भारत में देश की चुनी हुई सरकार और उसकी राजनीतिक बुनावट ही लोकतंत्र और संविधान के लिये, सबसे बड़ा खतरा बन गयी है। वह उग्र राष्ट्रवाद और निजी वित्तीय पूंजी की गिरफ्त में है। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा किसी भी ...

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यह डर है

यह डर है

किसी मंदिर पर आपने तिरंगा को लहराता हुआ नहीं देखा होगा। किसी मस्जिद, गिरजाघर या गुरूद्वारे के लिये भी यह जरूरी नहीं है। धर्म ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज अलग-अलग ही रहे हैं। यह धर्म और राष्ट्र की आपसी समझदारी है….. ...

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हत्या की चाहत और वैधानिक हत्या की राजनीति

हत्या की चाहत और वैधानिक हत्या की राजनीति

राष्ट्रवाद का खेल चल पड़ा है। एक महिला ने कहा- जो टीचर भी हैं- ‘‘मेरा बस चले तो, कन्हैया कुमार की मैं गर्दन मरोड़ दूं।‘‘ उन्होंने अब तक एक मुर्गी की गदर्न नहीं मरोड़ी है, लेकिन मानसिक रूप से हिंसक ...

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लोकतंत्र का मलीन अध्याय

लोकतंत्र का मलीन अध्याय

आप चाहे जो कहें, इस देश में लोकतंत्र की हालत सचमुच खराब है। उसे संभालने वाला कोई नहीं। संसद का बजट सत्र चल रहा है। लोकतंत्र जागृत अवस्था में है। रेल बजट पर सरकार तालियां बजा रही है। अपना पीठ ...

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(आम जनता को दिये जाने वाले) धोखे के खिलाफ

(आम जनता को दिये जाने वाले) धोखे के खिलाफ

मौजूदा दौर की ज्यादातर सरकारें बाजारवादी ताकतों का हाथ बंटाने के लिये, बस दो ही काम कर रही हैं- 1.    अपने आर्थिक एवं वैधानिक अधिकारों को बाजर के हवाले कर रही हैं, 2.    अपने देश की आम जनता को धोखा ...

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मीडिया के कंधों पर उचकता फासीवाद

मीडिया के कंधों पर उचकता फासीवाद

हम आज कौन से अन्धकार के युग में जीने के लिए अभिशप्त हो गए हैं? यह कौन सी पत्रकारिता हम देख रहे हैं जो पूरे समाज में जहर घोलने पर आमादा है? ऐसा लगता है कि अर्नब गोस्वामी जैसे उद्दंड, ...

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क्यों पैदा होते हैं, अनुपम खेर जैसे लोग?

क्यों पैदा होते हैं, अनुपम खेर जैसे लोग?

अमिताभ बच्चन ने पूरी जवानी, अपनी फिल्मों में जैसी जिंदगी जी, यदि वो वास्तव में वैसे जीते तो या तो बुढ़ापे में उम्र कैद की सजा काट कर जेल से बाहर आ रहे होते, या उन्हें मौत की सजा मिली ...

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क्या विशिष्ठ लोग ही गणतंत्र की खुशिया मनायेंगे?

क्या विशिष्ठ लोग ही गणतंत्र की खुशिया मनायेंगे?

यदि ओबामा और ओलांदे आतंकवाद के खिलाफ खड़ा होने की बात करते हैं, तो यह सवाल अपने आप खड़ा हो जाता है, कि फिर आतंकवादी कौन है? अल-कायदा और उससे जुड़े तमाम आतंकी संगठन? या इस्लामिक स्टेट आॅफ इराक एण्ड ...

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यह तमाशा कब तक चलेगा?

यह तमाशा कब तक चलेगा?

दूसरों के आंख में अंगुली डाल कर दिखाना आसान है, लेकिन भाजपा और मोदी सरकार अपने लिये ऐसा बिल्कुल नहीं करती। उसके लिये ‘घपले-घोटाले‘ और भ्रष्टाचार की नदी सिर्फ कांग्रेस और विपक्षी दलों में ही बहती है। भाजपा और मोदी ...

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5 पदो के लिये 26 हजार आवेदन

5 पदो के लिये 26 हजार आवेदन

बाजारवादी सरकारें अपने देश की आम जनता की जिम्मेदारियों से हाथ खींचती जा रही हैं। उनका यह हाथ खींचना ही, लोकतंत्र और आम जनता की सबसे बड़ी परेशानी है। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, आवास, रोजी-रोजगार और सामाजिक विकास की ...

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