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Category Archives: राष्ट्रीय परिदृश्य

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नोटों के जाल में बेहाल

नोटों के जाल में बेहाल

सरकार की नीतियां बड़ी शानदार हैं। वह अपनी सूरत बनाने और चमकाने में लगी है, इसलिये वह सिर्फ और सिर्फ अपने लिये काम कर रही है, और उन अपनों के लिये काम कर रही है, जो सरकार बनाने में उसके ...

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प्रधानमंत्री जी रोना रो रहे हैं

प्रधानमंत्री जी रोना रो रहे हैं

प्रधानमंत्री जी की बात करें तो वो रोना रो रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है, कि क्या करें? सच तो बोल नहीं सकते, झूठ बोलें तो कितना बोलें? कहां-कहां बोलें और किससे बोलें? मुरादाबाद परिवर्तन महारैली में उन्होंने ...

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जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

मार्क्सवाद के विरोधी सिर्फ दो ही किस्म के लोग होते हैं एक – वो जो उसे जानते नहीं दूसरा – वो जिनका हित उससे प्रभावित होता है। इसलिये, वो मार्क्सवाद की सूरत ही बिगाड़ देते हैं। उनके पास ऐसे लोगों ...

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नोट बदलने की पैंतरेबाजी

नोट बदलने की पैंतरेबाजी

‘‘अपने देश और देशवासियों को मुर्ख बनाने वाली सरकार की जय हो!‘‘ यह आपको कहना पड़ेगा। ऐसा न करने पर देशद्रोही बना दिये जाने का खतरा है। हिरासत में लिये जाने और न्यायालय परिसर में सार्वजनिक रूप से कन्हैया कुमार ...

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घर से लेकर बाहर तक बढ़ता सेना का महत्व

घर से लेकर बाहर तक बढ़ता सेना का महत्व

लोकतंत्र में सेना का उपयोग जब भी सरकार को टिकाये रखने के लिये होता है, आम आदमी की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उसके अधिकारों पर ताले जड़े जाते हैं, उसके हितों को किनारे खिसका कर राष्ट्रीय हितों से अलग कर ...

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भुखमरी और कुपोषण के साथ बढ़ता युद्ध उन्माद

भुखमरी और कुपोषण के साथ बढ़ता युद्ध उन्माद

भारत में अभी भूख, गरीबी, कुपोषण और बेरोजगारी से ज्यादा आर्थिक विकास के लिये अर्थव्यवस्था का निजीकरण और सर्जिकल स्ट्राइक, भाजपा की मोदी सरकार की नामालूम उपलब्धियों पर चर्चा हो रही है। राष्ट्रवाद देशभक्ति और युद्ध के उन्माद को बढ़ाया ...

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सेना को साझेदार बनाने की रणनीति

सेना को साझेदार बनाने की रणनीति

कश्मीर की समस्या का समाधान क्या सेना निकाल सकती है? हमारे लिये यह सवाल है, मगर केंद्र की मोदी सरकार इस निर्णय पर पहुंच चुकी है, कि हथियारों के साथ वार्ता ही समस्या का समाधान है। गोलियां दागे, पैलट गन ...

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भारत-पाक, लोकतंत्र की बढ़ती मुश्किलें

भारत-पाक, लोकतंत्र की बढ़ती मुश्किलें

जम्मू-कश्मीर में, भारत के उड़ी सैन्य मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले के बाद ‘कूटनीतिक लड़ाई‘ अब ‘घुस कर मारने की रणनीति‘ में बदल गयी है। विश्व समुदाय के बीच भारत की छवि पहली बार एक आक्रामक देश की बन रही ...

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उड़ी आतंकी हमला – 2

उड़ी आतंकी हमला – 2

इस बात के ठोस प्रमाण हैं, कि दुनिया के अधिकांश आतंकी संगठनों के पीछे यूरोपीय देश, अमेरिकी साम्राज्य और उसके मित्र देश हैं। उन्हीं के आर्थिक सहयोग, कूटनीतिक समर्थन और दिखावटी विरोध से आतंकी संगठनों की सांसें चल रही हैं, ...

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उड़ी आतंकी हमला

उड़ी आतंकी हमला

जम्मु-कश्मीर के उड़ी सैन्य मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले के बारे में कुछ भी कहने या लिखने से पहले हम यह खुले तौर पर घोषित करते हैं, कि हम आतंकवाद के खिलाफ हैं। हर किस्म के आतंकवाद के खिलाफ हैं, ...

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