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Monthly Archives: September 2013

बड़ी बे-अदबी हो रही है

बड़ी बे-अदबी हो रही है

समाज में बड़ी बे-अदबी हो रही है। सीमा पर जवान शहीद हो जाते हैं। जो संतरी बनने की काबलियत नहीं रखते, वो मंत्री कुछ ऐसा कहते हैं, जैसे खस्सी की जान चली गयी हो, कि ‘जवान होते ही है, शहीद ...

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कम्युन को राष्ट्रीय मुददा बनाया जाये

कम्युन को राष्ट्रीय मुददा बनाया जाये

वेनेजुएला में ‘विकास के जरिये समाजवाद’ के निर्माण की पहल की जा चुकी है। सरकार को सड़कों पर उतारने और मजदूर वर्ग के हाथों में औधोगिक इकार्इयों की कमान सौंपने की अच्छी शुरूआत के साथ ही कम्युनों के निर्माण को ...

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मिस्त्र की रजानीतिक अस्थिरता का अंत कहां है?

मिस्त्र की रजानीतिक अस्थिरता का अंत कहां है?

मिस्त्र की आम जनता एक बार फिर धोखा खा चुकी है। मुसिलम ब्रदरहुड़ के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी अपदस्त हैं। होस्नी मुबारक जेल से रिहा मगर नजरबंद हैं। मिस्त्र की राजसत्ता सेना के कब्जे में है। तहरीर चौक से शुरू हुआ ...

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सीरिया पर हमले की वजह, विश्वयुद्ध की पृष्टभूमि है

सीरिया पर हमले की वजह, विश्वयुद्ध की पृष्टभूमि है

सीरिया पर हमले की वजह तलाश ली गयी है, और अपनी जेब में शांति का नोबल पुरस्कार लिये बराक ओबामा रक्त पिशाच की तरह मंड़राते हुए, यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं, कि सीरिया मानवता का दुश्मन है। सीरिया ...

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फ्रांस में कर और कटौतियों के खिलाफ बढ़ता जन असंतोष

फ्रांस में कर और कटौतियों के खिलाफ बढ़ता जन असंतोष

फ्रांस की आम जनता सरकार के द्वारा पेश बजट, कटौती और निर्माण योजनाओं पर नजर रखने लगी है। सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिये कटौतियों का सहारा ले रही है। लगातार सरकारी करों में वृद्धि कर रही हैं इसके ...

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यूरोपीय देशों के पास, जनसमस्याओं का समाधान नहीं है

यूरोपीय देशों के पास, जनसमस्याओं का समाधान नहीं है

यूरोपीय देशों का वित्तीय संकट यूरोपीय संघ की व्यवस्था के संकट में बदल गया है। यूरोप की आम जनता न तो अपने देश की सरकारों के पक्ष में है, ना ही यूरोपीय संघ की व्यवस्था से उसकी सहमति रह गयी ...

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आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी बकवास

आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी बकवास

9/11 के बाद से अमेरिकी सरकार की योजना दुनिया पर अपने वर्चस्व को बढ़ाने की रही है। 2976 अमेरिकी मारे गये थे, इस प्रचारित ‘आतंकी हमले’ में! जिसका गाना अमेरिकी सरकार आज भी पर्लहार्बर के हमले की तरह गाती रहती ...

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भ्रष्टाचार लाभ पर आधारित व्यवस्था है

भ्रष्टाचार लाभ पर आधारित व्यवस्था है

भारत में भ्रष्टाचार को राष्ट्रीय मुददा बनाया जा चुका है। इस बात से किसी को कोर्इ आपतित नहीं है। भ्रष्टाचार स्वाभाविक है, लोग सोचते हैं। देश की सरकार भ्रष्ट है, लोग मानते हैं। वर्तमान सरकार के बाद, आनेवाली सरकार भ्रष्ट ...

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जनतंत्र जीवित दिखे, मगर तानाशाही को विस्तार मिले

जनतंत्र जीवित दिखे, मगर तानाशाही को विस्तार मिले

पाकिस्तान से उलझे सम्बंधों को, भारतीय राजनीति में, पेंच की तरह इस तरह कसा जाता है, कि भारत का हमलावर होना ही एक मात्र विकल्प है। जबकि लड़ी गयी सभी लड़ार्इयों का हासिल, यथास्थिति को बनाये रखना ही प्रमाणित हुआ ...

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विश्व जन समुदाय को धोखा दिया जा सकता है, मगर हमेशा नहीं

विश्व जन समुदाय को धोखा दिया जा सकता है, मगर हमेशा नहीं

आम जनता के पक्ष में खड़ा होना और उस पर यकीन करना, किसी भी देश की सरकार के लिये जरूरी है। मगर, सरकारें जब आम जनता के विरूद्ध खड़ी हो जाती है, उनका यकीन अपने आप घट जाता है, और ...

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