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Monthly Archives: June 2015

सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक फोरम का वार्षिक सम्मेलन

सेंट पीटर्सबर्ग अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक फोरम का वार्षिक सम्मेलन

18 जून, 2015 को रूस में ‘‘सेंट पीटर्सबर्ग इण्टरनेशनल इकोनाॅमिक फोरम‘‘ का सम्मेलन सेंट पीटर्सबर्ग में हुआ। 1997 से हर वर्ष रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित यह सम्मेलन, वैश्विक स्तर पर ‘वल्र्ड इकोनाॅमिक फोरम‘ की तरह ही, दुनिया  ...

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भारत के महत्व को बढ़ाने की नीति

भारत के महत्व को बढ़ाने की नीति

सरकार समर्थक भारतीय मीडिया अमेरिका और यूरोपीय देशों से सम्बंधों और उनके वक्तव्यों को तरजीह देती है। उस पर इतराना भी उसे अच्छा लगता है। जहां मोदी जी सिर्फ इसलिये विशेष हैं, कि वो उनकी शर्तों पर देश की सूरत ...

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समीक्षा – हमारी कहानी कहने वाला कवि : हरीश चन्द्र पाण्डे

समीक्षा – हमारी कहानी कहने वाला कवि : हरीश चन्द्र पाण्डे

‘लोगों की चेतना उनके अस्तित्व को निर्धारित नहीं करती, बल्कि समाज में उनका अस्तित्व ही उनकी चेतना को निर्धारित करता है.’ मार्क्स  के इस बहु’उद्धृत कथन को कवि निराला के उस कथन से मिला कर देखें जिसमें उन्होंने कहा है मनुष्य की तरह ...

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रपट – “युवा कवि शम्भु यादव का एकल कविता-पाठ”

रपट – “युवा कवि शम्भु यादव का एकल कविता-पाठ”

“मंडेला” यह तेरह फ़रवरी दो हज़ार बारह की ख़बर है दक्षिण अफ्रीका में बैंक नोटों पर अब मंडेला दिखेंगे आगे मैं कहता हूँ– जैसे हमारे यहाँ गाँधी दिखते हैं अब दक्षिण अफ्रीका में भी कुछ इस तरह से होगा पाँच ...

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महानायक, आप ही समझदार हैं!

महानायक, आप ही समझदार हैं!

कालिख और कोयले सभी नाराज हैं, कि दलाली तो लोग करते हैं, मगर बद्नामी हमारी ओर धकेल देते हैं। उन्होंने मोदी जी से मुलाकात की इंदिरा जी को कोसा, जिन्होंने कोयले का राष्ट्रीयकरण किया मनमोहन जी को भला कहा, बुरा ...

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21वीं सदी के दावेदार – 2

21वीं सदी के दावेदार – 2

सोच की जमीन के अन्तर्गत पहली किश्त – 13 अप्रैल, 2015 के आगे- चीन की क्षमताओं का सही आंकलन करना मुश्किल है। रूस की क्षमताओं के बारे में भी अंदाजा लगाना आसान नहीं। और दोनों की संयुक्त आर्थिक, सामरिक एवं ...

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मनीषा जैन की तीन कविताएं

मनीषा जैन की तीन कविताएं

1. सच्चाई को स्वीकार क्यों नहीं करते तुम तुम्हारे एक अद्द् चौबारे में जब जब होती हैं गंभीर राजनीतिक, सामाजिक गोष्ठियां उन बेदर्द, बेखौफ संगठनों की सिरिया या ईरान व ईराक के उन मानवता के विरोधी संगठनों की क्या तुम्हारी छाती ...

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लातिनी अमेरिकी देशों की ओर, यूरोपीय पलायन

लातिनी अमेरिकी देशों की ओर, यूरोपीय पलायन

आर्थिक एवं राजनीतिक संकट झेल रहे यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के लिये लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देश ‘सुरक्षित क्षेत्र‘ के रूप में उभर रहे हैं। जहां अपने देश एवं महाद्वीप की आम जनता की फिक्र करने वाली जन समर्थक ...

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म्यांमार में भारत की सैन्य कार्यवाही

म्यांमार में भारत की सैन्य कार्यवाही

म्यांमार में घुस कर भारतीय सेना ने उग्रवादियों के विरूद्ध सैन्य कार्यवाही की। शायद पहली बार? नहीं। ऐसा पहले भी हुआ है, मगर इतना हल्ला नहीं मचाया गया। म्यांमार में स्थित भारत विरोधी उग्रवादियों के दो शिविरों को ध्वस्त किया ...

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रंजीत वर्मा की तीन कविताएँ

रंजीत वर्मा की तीन कविताएँ

रंजीत वर्मा हमारे समय के एक महत्वपूर्ण कवि हैं | आज जब साहित्य में चारों ओर अन्याय और शोषण के खिलाफ़ एक सन्नाटा सा पसरा हुआ है, ऐसे में कवि रंजीत वर्मा इस ख़ामोशी को लगातर तोड़ने के अथक प्रयास ...

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