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Monthly Archives: September 2015

जू लिझी की पांच कविताएं

जू लिझी की पांच कविताएं

ये कविताएँ चीन की फ़ॉक्सकॅान कम्पनी में काम करने वाले एक प्रवासी मज़दूर जू़ लिझी (Xu lizhi) ने लिखी हैं। लिझी ने 30 सितम्बर 2014 को आत्महत्या कर ली थी। लेकिन लिझी की मौत आत्महत्या नहीं है, एक नौजवान से ...

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ब्राजील का आर्थिक एवं राजनीतिक संकट

ब्राजील का आर्थिक एवं राजनीतिक संकट

चीन की अर्थव्यवस्था में आयी थकान का प्रभाव लातिन अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है, क्योंकि चीन इस क्षेत्र के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा निवेशक एवं सहयोगी देश है। चीन के आर्थिक विकास के साथ ...

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राॅकस्टार प्रधानमंत्री

राॅकस्टार प्रधानमंत्री

‘‘राॅक स्टार की तरह सिलिकाॅन वैली में स्वागत होगा नरेंद्र मोदी का।‘‘ हमने पढ़ा। स्वागत भी हुआ। दूसरों के लिये किया गया प्रोग्राम जमा भी। रविवार का दिन बीत गया। सोमवार को भारत के अखबारों में मोदी जी की भीड़ ...

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मौत का जश्न क्यों?

मौत का जश्न क्यों?

बनारस है या जुनून? गंगा में प्रतिमा विसर्जन के लिये गोदौलिया चैक पर 30 घंटे का धरना! 22 सितम्बर मंगलवार की रात 1 से 1:30 बजे लाठीचार्ज! संतों और पंडालों की सक्रियता! मामला तनाव भरा! सवाल कई! यह है इसी महीने ...

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चीन के बाजारवादी अर्थव्यवस्था की थकावट (आॅस्ट्रेलिया का वित्तीय संकट)

चीन के बाजारवादी अर्थव्यवस्था की थकावट (आॅस्ट्रेलिया का वित्तीय संकट)

पिछले दो दशक से चीन दुनिया के बाजारवादी आर्थिक विकास की पटरी पर दौड़ने वाली रेल में इंजन का काम किया। उस दौरान उसका अपना आर्थिक विकास दर 8 से 15 प्रतिशत के बीच था। उसने दुनिया के प्राकृतिक संसाधन ...

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कुआं

कुआं

यह पानी के लिये निरर्थक श्रम की ऐसी कहानी है, जो पूरा न हो कर भी सिर्फ इसलिये पूरी है, कि पानी के बिना आदमी जी नहीं सकता। इसलिये अंतिम सांस तक जीने की लड़ाई तो हमें लड़नी ही होगी। ...

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नूर मुहम्मद नूर की तीन गज़लें

नूर मुहम्मद नूर की तीन गज़लें

1. हर घड़ी रिश्ता ग़मो से जोड़ता है रातदिन कौन है मुझमें, जो मुझको तोड़ता है रातदिन वह जो दिखलाता है सबको आईना या यूँ कहो मैं वो शीशा हूँ जो पत्थर तोड़ता है रातदिन ताकि कल गुल लहलहा उठ्ठें ...

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फिलिस्तीनी कवि हुस्साम मधून की कविता

फिलिस्तीनी कवि हुस्साम मधून की कविता

एक साल बाद – जंग के बाद हम हाजिर हैं जंग के एक साल बाद हम हाजिर हैं। हम जो जंग के बाद भी जिंदा हैं। हम अभी भी खाते हैं और सोते हैं। हम अभी भी काम पर जाते ...

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आॅस्ट्रेलिया में सत्ता परिवर्तन

आॅस्ट्रेलिया में सत्ता परिवर्तन

आॅस्ट्रेलिया में सरकार रातो-रात बदल जाती है। उसके बदलने की खबर आम लोगों को तब होती है, जब मीडिया उन्हें यह खबर सुनाती है। वहां का लोकतंत्र वित्तीय ताकतों की जेब में पड़ा ऐसा लोकतंत्र है, जिसमें आम जनता की ...

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खुशफहमी का मौसम

खुशफहमी का मौसम

‘मोदी जी तो मोदी जी हैं!’ मीडिया ने कहा! हमने सुना और पढ़ा! सुन और पढ़ कर अच्छा लगा। यह भी लगा कि देश की मीडिया कमाल है। गोबर सान कर गोइठा बना रही है। अपने लिये बाटी-चोखा का पक्का ...

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