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Monthly Archives: October 2015

मूल मुद्दों पर चुप रहने की नीति

मूल मुद्दों पर चुप रहने की नीति

भारत की राजनीति को नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द घुमाने की नीतियां सफल रही हैं। भाजपा के देशी-विदेशी नीतिकारों ने 2014 का आम चुनाव भी नरेंद्र मोदी के नाम से लड़ा और सरकार भी मोदी की ही बनी। आज भी मोदी ...

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हर कलाकार एक ब्राॅण्ड है

हर कलाकार एक ब्राॅण्ड है

आज हर कलाकार एक ब्राण्ड है। जो जितना बड़ा ब्राण्ड है, वह उतना बड़ा कलाकाार है। और जो जितना बड़ा कलाकार है, वह उतना ही बड़ा ब्राण्ड है। ब्राण्ड के बिना न तो टोपी की कीमत है, ना जूते की। ...

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निशा चौधरी की पांच कविताएँ

निशा चौधरी की पांच कविताएँ

1. सड़कों के गड्ढ़े सड़कों पर पड़े गड्ढ़े गड्ढ़ों में भरा पानी और उसी पानी में दिखती इस टुटपुंजिए प्रशासन की छवि शर्मसार करती है कहीं न कहीं मानवता को कि हम कितने गिर चुके हैं कि हमें कोई फर्क ...

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सोशल मीडिया के दौर में हिंदी – प्रेमचन्‍द गांधी

सोशल मीडिया के दौर में हिंदी – प्रेमचन्‍द गांधी

आप इस लेख के शीर्षक से चौंक सकते हैं, क्‍योंकि यहां शुरुआती दो शब्‍द हिंदी भाषा के नहीं वरन अंग्रेजी के हैं और एक शब्‍द अरबी भाषा का है। इसलिए अगर शुद्ध हिंदी में लिखना होता तो यहां शीर्षक होता ...

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सरकार और बाजार की साझेदारी के बाद के करार

सरकार और बाजार की साझेदारी के बाद के करार

दुनिया के किसी भी देश की सरकार को इस बात की छूट नहीं दी जा सकती कि वो अपने देश की आम जनता की जिम्मेदारियों से हाथ खींच ले। लेकिन, दुनिया की ज्यादातर देशों की सरकारें आज यही कर रही ...

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राजनीति का वनमैन इण्डस्ट्रीज

राजनीति का वनमैन इण्डस्ट्रीज

अपने को मिलेनियम स्टार घोषित किये जाने पर- ‘‘आपको कैसा लगा?‘‘ के जवाब में, जावेद अख्तर को अमिताभ बच्चन ने कहा था- ‘‘एक जुमला याद आया, खुदा मेहरबान तो गदहा पहलवान।‘‘ और दोनों खुल कर हंसे थे। इसमें हंसने की ...

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बनारस में क्या हो रहा है?

बनारस में क्या हो रहा है?

बनारस का बिगड़ा हुआ माहौल कहने को नियंत्रण में है। सरकार और प्रशासन अपनी मुस्तैदी दिखा रही है। घोषणां के अनुसार- 20 से 26 अक्टूबर तक काशी की निगरानी 3 ड्रोन करेंगे। 45 सीसी टीवी कैमरे संवेदनशील इलाकों में लगायें ...

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नीता पोरवाल की छः कविताएं

नीता पोरवाल की छः कविताएं

1. आज नही तो कल आज नही तो कल वे बना सकते हैं तुम्हें भी दादरी और बनारस! इतनी हैरत से मत देखो तुमसे, हाँ, तुम्ही से मुखातिब हूँ मैं क्योंकि मचानों पर बैठकर देख लिया है उन्होंने तुम्हारा सिरफिरापन ...

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अकादमी सम्मान- जनआकांक्षाओं के सांचे में खुद को ढ़ालने का सवाल

अकादमी सम्मान- जनआकांक्षाओं के सांचे में खुद को ढ़ालने का सवाल

आपात काल (1975) और आपात काल के बाद (1977) इन दो सालों का दो दृश्य मुझे याद है, जिसे आप अभिव्यक्ति स्वतंत्रता के हनन के खिलाफ प्रतिकार और चाहें तो परिणाम के रूप में देख सकते हैं। एक- आपात काल ...

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यूरोप में अमेरिकी साझेदारी से बढ़ता अविश्वास

यूरोप में अमेरिकी साझेदारी से बढ़ता अविश्वास

दशकों से यूरोप अमेरिकी साम्राज्य के सदस्य देशों की तरह उसके पीछे चलता रहा है, आज भी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की सरकारों की स्थितियां यही हैं, कि वो अमेरिकी हितों से संचालित हो रही हैं, किंतु 2007-08 के ...

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