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Monthly Archives: November 2015

सीरिया के संकट का विस्तार

सीरिया के संकट का विस्तार

सीरिया में रूस के सैन्य हस्तक्षेप ने न सिर्फ सीरिया बल्कि विश्व परिदृश्य को बदल दिया है। इस संकट के चार साल बाद, इस बात की संभावना नजर आने लगी है, कि इस संकट का समाधान संभव है। कि अमेरिकी ...

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आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का सवाल!

आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता का सवाल!

आतंकवाद के खिलाफ विश्व स्तर पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है। जी-20 सम्मेलन हो या आसियान देशों का सम्मेलन आार्थिक मुद्दों के अलावा आतंकवाद का मुद्दा अहम् रहा है। आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक एकजुटता और संयुुक्त कार्यवाही पर जोर दिया गया, ...

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शिक्षा को बाजार के हवाले करने की साजिश

शिक्षा को बाजार के हवाले करने की साजिश

बाजार के लिये भारत के प्राकृतिक संसाधन पर अधिकार जमाने के लिये- भूमि अधिग्रहण कानून भारत के मानव श्रमशक्ति को सस्ते में बेचने के लिये- श्रम कानूनों में संशोधन और अब भारत के बौद्धिक सम्पदा को विश्व व्यापार संगठन के ...

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लघु कथा के नायक

लघु कथा के नायक

1 ‘‘अंधा अंधा ही होता है, चाहे वह आंख का अंधा हो, या अक्ल का अंधा हो।‘‘ अंधे को देख कर किसी ने मुझसे कहा। मैं ‘हां‘ में सिर हिलाने को ही था, कि मुझे अक्ल का अंधा न समझा ...

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छवि और छद्म मुद्दों का भरम

छवि और छद्म मुद्दों का भरम

भारत की राजनीति छवि और छद्म की राजनीति बन गयी है। विचार और समाज व्यवस्था के मुद्दों को राजनीति से बाहर निकाल दिया गया है। ऐसा जानबूझ कर किया गया है, ताकि बाजारवादी व्यवस्था के विरूद्ध सीधे तौर पर जन ...

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आतंकवाद के खिलाफ होना साम्राज्यवादी बाजारवाद के खिलाफ होना है।

आतंकवाद के खिलाफ होना साम्राज्यवादी बाजारवाद के खिलाफ होना है।

14 नवम्बर को फ्रांस पर आतंकी हमला हुआ और यह सवाल जेहन में कौंध गया, कि इस हमले का मकसद क्या है? क्या यूरोप अमेरिका के साथ मिल कर अपने ही द्वारा पैदा किये गये शरणार्थी संकट से भाग रहा ...

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मालिनी गौतम की चार कविताएँ

मालिनी गौतम की चार कविताएँ

1. प्रेम में होना प्रेम औरत के लिए होता है कुछ ऐसा…. जो पल-पल होता है प्रस्फुटित, पल्लवित, जिसमें हर रोज़ फूटते हैं नवांकुर, बिखरता है रेशम, कोख में गहरे-गहरे फूटता यह बीज हर रोज अपनी कोंपलों की छुअन से ...

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संघ की तरह हो राज्य सरकारों के लिबास

संघ की तरह हो राज्य सरकारों के लिबास

लोकतंत्र में आम चुनाव क्यों? यह एक ऐसा सवाल है, जिससे टकराये बिना, न तो हम अपने देश की चुनी हुई सरकारों को समझ सकते हैं, ना ही हम यह जान सकते हैं, कि वो क्या कर रही हैं? सामान्य ...

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असहिष्णुता निवेश के लिये खतरा?

असहिष्णुता निवेश के लिये खतरा?

सरकार को अपनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छवि की बड़ी फिक्र है। जिसका सम्मोहन टूट रहा है। उसकी समझ में नहीं आ रहा है, कि वह इस मौके का फायदा उठाये या कदम खींच ले? उसने यह सोचा नहीं ...

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बिहार – जीत के बाद बहस जारी है

बिहार – जीत के बाद बहस जारी है

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम को ले कर बहस जारी है। इस बहस को अभी जारी रहना है। बहस हार और जीत पर होगी, भारतीय राजनीति में बनते हुए विकल्पों की होगी, कांग्रेस और राजद की होगी, लालू प्रसाद यादव ...

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