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Monthly Archives: December 2015

दोस्त का नाम दोस्त ही था – निवेदिता भावसार

दोस्त का नाम दोस्त ही था – निवेदिता भावसार

एक कोई शहर था ,बड़ा ही खूबसूरत सा याद शहर नाम का। मेरे ख्वाबों के शहर से बहुत दूर था वो। वहां तक जाने में पूरी एक नींद लग जाती थी । जहाँ आँख खुलती वही वो शहर होता। याद ...

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वैश्विक अराजकता के बीच

वैश्विक अराजकता के बीच

एकध्रुवी विश्व की अमेरिकी अवधारणा और उसकी नीतियां चकनाचूर हो गयी हैं। जिस नव उदारवादी वैश्वीकरण से वह पूरे विश्व को एक खेमे मे बदलना चाहता था, उसी नवउदारवादी वैश्वीकरण ने विश्व को दो खेमों में बांट दिया है। अब ...

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निवेदिता भावसार की चार कविताएँ

निवेदिता भावसार की चार कविताएँ

1. तुम्हारा नाम बहुत खूबसूरत है ,पता तुम्हे … तुम्हारा नाम बहुत खूबसूरत है ,पता तुम्हे … मैं मर मिट जाती हूँ इन अक्षरों की बनावट पर और जब पुकारती हूँ ना मन ही मन तो एक मुस्कराहट सी आ ...

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दिल्ली, मास्को, काबुल और लाहौर

दिल्ली, मास्को, काबुल और लाहौर

23 दिसम्बर को मास्को 24 दिसम्बर को भी मास्को 25 दिसम्बर को काबुल और 25 दिसम्बर को ही नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री की हैसियत से लाहौर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घर पर। पाकिस्तान की उनकी यह ...

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विकास के जरिये समाजवाद और एक कहानी

विकास के जरिये समाजवाद और एक कहानी

वेनेजुएला में ‘विकास के जरिये समाजवाद‘ की अवधारणा को, 6 दिसम्बर 2015 को, एक गहरा झटका लगा है। नेशनल असेम्बली का चुनाव वहां के समाजवादी हार गये हैं। वैसे, मुझे नहीं लगता कि जिन दक्षिण पंथी ताकतों को सफलता मिली ...

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यह तमाशा कब तक चलेगा?

यह तमाशा कब तक चलेगा?

दूसरों के आंख में अंगुली डाल कर दिखाना आसान है, लेकिन भाजपा और मोदी सरकार अपने लिये ऐसा बिल्कुल नहीं करती। उसके लिये ‘घपले-घोटाले‘ और भ्रष्टाचार की नदी सिर्फ कांग्रेस और विपक्षी दलों में ही बहती है। भाजपा और मोदी ...

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गैर बाजारवादी यहां कोई नहीं

गैर बाजारवादी यहां कोई नहीं

देश को एक खास दिशा की ओर धकेला जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सवेक संघ भारतीय जनता पार्टी और देश की केंद्र सरकार, और उनके सहयोगी संगठन बड़े ही तरीके से मिल जुल कर, हिंदुत्व वादी मुद्दे को हवा दे ...

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भारतीय संसद की टपकती छत

भारतीय संसद की टपकती छत

बेमरम्मत घरों की छतें टपकने लगती हैं। भारतीय संसद की छत टपक रही है। यह टपकना कोई नयी बात नहीं है। पहले छत को टपकाने का आरोप भाजपा पर था, अब भाजपा कांग्रेस पर आरोप लगा रही है। तमाम लिक्खाड ...

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लोकतंत्र का तिलस्म

लोकतंत्र का तिलस्म

मेरे दिमाग पर जादूगर और जमूरो ने कब्जा कर लिया है। वो जो दिखाते हैं, मैं वही देखता हूं। वो जो बताते हैं, मैं वही सुनता हूं। वह हवा में शहर बसाता है। शहर को स्मार्ट बनाता है। स्मार्ट शहर ...

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बहस के बीचो बीच

बहस के बीचो बीच

साहित्य में समाज तो है, मगर गलत मुद्दों पर बहस और सही मुद्दों के प्रति उदासीनता भी है। भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बढ़ती हुई असहिष्णुता का मुद्दा है। बहस के बीचो-बीच। असहिष्णुता का मुद्दा अब राजनीतिक हो चुका ...

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