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Yearly Archives: 2016

सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार

सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार

(सोवियत संघ के विघटन के सूत्रधार स्टॉलिन के बाद ख्रुश्चेव से लेकर ब्रेजनेव और गोर्बाचोव तक चार दशक लम्बी कतार में खड़े हैं, मगर हम गोर्बाचोव और येल्तसिन का जिक्र यहां करेंगे।) 25 दिसम्बर 1991 की रात सोवियत संघ का ...

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आरोपों से घिरी ठप्प व्यवस्था

आरोपों से घिरी ठप्प व्यवस्था

संसद भवन में बुलायी गयी विशेष प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा- ‘‘मेरे पास पीएम के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। इसे मैं लोकसभा में रखना चाहता हूं, लेकिन मुझे रोका जा रहा है। प्रधानमंत्री घबराये हुए ...

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बुखार

बुखार

बुखार नया है। डॉक्टरों ने समझ तो लिया, लेकिन मर्ज को चाहने वालों के लिये, उन्होंने कई जांच लिखे। मलेरिया, मियादी, मौसमी बुखार और न जाने क्या-क्या? कुछ ने डेंगू और चिकनगुनिया भी लिखा। दिमागी बुखार के बारे में भी ...

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रूस के विरूद्ध भारतीय प्रचारतंत्र

रूस के विरूद्ध भारतीय प्रचारतंत्र

भारत के विदेश नीति में भारी परिवर्तन हो चुका है। केंद्र की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ अच्छे सम्बंधों की बहाली का दांव चलते-चलते, आतंकवाद के मुद्दे को बढ़ा कर पहले उसे दुश्मन देश का दर्जा दिया, अघोषित युद्ध ...

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प्रधानमंत्री जी रोना रो रहे हैं

प्रधानमंत्री जी रोना रो रहे हैं

प्रधानमंत्री जी की बात करें तो वो रोना रो रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है, कि क्या करें? सच तो बोल नहीं सकते, झूठ बोलें तो कितना बोलें? कहां-कहां बोलें और किससे बोलें? मुरादाबाद परिवर्तन महारैली में उन्होंने ...

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सोच और सम्बद्धता, अब बाजार में है

सोच और सम्बद्धता, अब बाजार में है

‘‘मगर यह तो दोगलापन है।‘‘ उन्होंने तल्खी से कहा। चेहरे पर भाव ऐसा था, जैसे इससे घिनौनी कोई चीज नहीं। ‘‘हां, है तो।‘‘ मैंने सीधे तौर पर अपनी स्वीकृति दी। मेरे जेहन में सवालों से घिरा तर्क था। ‘‘लेकिन, यह ...

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फिदेल कास्त्रो के लिये

फिदेल कास्त्रो के लिये

एक दबी ख्वाहिश थी, कॉमरेड फिदेल आपसे मिलने की मिल-बैठ कर बातें करने की यह पूछने की कि 21वीं सदी के समाजवाद को मार्क्सवाद की किन संभावनाओं से हम जोड़ें? क्रांति की किस सोच के साथ खड़े हों हम लेनिन के ...

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देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बढ़ती मांग

देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बढ़ती मांग

‘देशभक्ति’ और ‘राष्ट्रवाद’ की मांग अक्सर वे सरकारें करती हैं, जिनके पास अपनी पसंद का कपड़ा होता है, उन्हें पहनाने के लिये। जब से केन्द्र में मोदी की सरकार बनी है, तब से खास किस्म की देशभक्ति और खास किस्म ...

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जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

जन ध्रुवीकरण के लिये जन संघर्ष

मार्क्सवाद के विरोधी सिर्फ दो ही किस्म के लोग होते हैं एक – वो जो उसे जानते नहीं दूसरा – वो जिनका हित उससे प्रभावित होता है। इसलिये, वो मार्क्सवाद की सूरत ही बिगाड़ देते हैं। उनके पास ऐसे लोगों ...

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विलेन ‘शेर खां‘ क्यों है?

विलेन ‘शेर खां‘ क्यों है?

रोज-ब-रोज की जिंदगी में कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो फैलाती तो गंदगी हैं, मगर पता नहीं चलता। खिड़की खुली है, तो बाहर के नजारे को भी कमरे में जगह मिलेगी ही। शोर-शराबा होगा, आवाजें घुसेंगी। धूल-धुआं का आना भी ...

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