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Monthly Archives: February 2016

राज्य के वर्चस्व की पुर्नस्थापना का सवाल

राज्य के वर्चस्व की पुर्नस्थापना का सवाल

सोच की स्तर पर समाजवाद पूंजीवाद का विकल्प और समाज के विकास की उच्च अवस्था है। होना भी यही चाहिये। किंतु, संकट और संक्रमण के इस दौर में, -जब वैश्विक वित्तीय ताकतों ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है, और ...

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दिल्ली का एक दिन, चंद घंटे

दिल्ली का एक दिन, चंद घंटे

दिल्ली का एक दिन, चंद घंटे! दिन सोमवार, 15 फरवरी 2016 घण्टों का हिसाब मैं नहीं दे पाऊंगा, बस मेरे पास वारदातें हैं, वह भी सुनी हुई, चैनलों पर देखी हुई और सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं से जानी ...

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वाॅलमार्ट की बंद होती दुकानें और बढ़ती बेरोजगारी

वाॅलमार्ट की बंद होती दुकानें और बढ़ती बेरोजगारी

‘इकोनाॅमिक पाॅलिसी इन्स्टीच्यूट‘ के द्वारा हाल ही में जारी किये गये अध्ययन के अनुसार- ‘‘अमेरिका के 4 लाख कामगरों के बेरोजगार होने का मुख्य कारण वाॅलमार्ट और चीन के बीच का व्यापार घाटा है। अपने काम से हाथ धोने वाले ...

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जेएनयू गंभीर चेतावनी है

जेएनयू गंभीर चेतावनी है

यह देश है। यह देशद्रोह है। और यह आतंकवाद है। चलिये मान लेते हैं। बस, आप हमें बतायें यह तय कौन करता है, कि यह देश है, यह देशद्रोह है, और यह आतंकवाद है। मानी हुई बात है, कि आम ...

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नित्यानंद गायेन की चार कविताएं

नित्यानंद गायेन की चार कविताएं

1. अगले वर्ष अगले फिर निकलेगी झांकी राजपथ पर भारत भाग्य विधाता लेंगे सलामी डिब्बों में सजाकर परोसे जाएंगे विकास के आंकड़े शहीदों की विधवाओं को पदक थमाएं जाएंगे राष्ट्र अध्यक्षों के शूट की चमक और बढ़ जाएगी जलती रहेगी ...

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ट्रांस पैसेफिक पार्टनरशिप को अमेरिकी स्वीकृति

ट्रांस पैसेफिक पार्टनरशिप को अमेरिकी स्वीकृति

राष्ट्र के नाम अपने आखिरी सम्बोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 12 जनवरी को, ‘ट्रांस पैसेफिक पार्टनरशिप‘ के बारे में उसके पूरा होने के बारे में, जानकारी दी। ओबामा ने कहा- ‘‘संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘ट्रांस पैसेफिक पार्टनरशिप‘ -मुक्त ...

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पिवोट टू एशिया के बाद पिवोट टू लैटिन अमेरिका – 2

पिवोट टू एशिया के बाद पिवोट टू लैटिन अमेरिका – 2

अमेरिकी साम्राज्य अपने डाॅलर और अपनी सामरिक क्षमता पर टिका हुआ है। माॅर्गन ने ‘पिवोट टू लैटिन अमेरिका‘ के पक्ष में अपने निष्कर्षों को सामरिक आधार भी दिया है। वो मानते हैं, कि लातिनी अमेरिकी देशों में चीन की मौजूदगी, ...

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क्यों पैदा होते हैं, अनुपम खेर जैसे लोग?

क्यों पैदा होते हैं, अनुपम खेर जैसे लोग?

अमिताभ बच्चन ने पूरी जवानी, अपनी फिल्मों में जैसी जिंदगी जी, यदि वो वास्तव में वैसे जीते तो या तो बुढ़ापे में उम्र कैद की सजा काट कर जेल से बाहर आ रहे होते, या उन्हें मौत की सजा मिली ...

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इलाहाबाद -निराला सभागार- में काम के अधिकार पर परिचर्चा

इलाहाबाद -निराला सभागार- में काम के अधिकार पर परिचर्चा

‘यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट’ नाम से संगठित युवाओं ने बेरोज़गारी के मुद्दे पर 8 फ़रवरी, सोमवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के निराला सभागार में एक बड़ी परिचर्चा आयोजित की। इस परिचर्चा में 250 से अधिक युवाओं व विद्यार्थियों ने भागीदारी ...

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नंदना पंकज की चार कविताएँ

नंदना पंकज की चार कविताएँ

1. अवसरवाद अवसर के अनुकुल अपनी सुविधानुसार हम चुनते है इतिहास से कोई नायक/विचारक महापुरूष पूजने लगते हैं उन्हें ईश्वर की भाँति रिचाओं सी दोहराते रहते है उनकी सुक्तियाँ अपने ‘वाद’ को अपना धर्म बना लेते हैं ढोते रहते है ...

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