Home / 2016 / April

Monthly Archives: April 2016

सड़कें आजकल

सड़कें आजकल

1. सड़कें आज कल खून के आंसू रोती हैं और चीखती हैं। एक जोड़ी घिसी हुई चप्पल की तरह सड़क को मैं जीता हूं। 2. एक जुलूस निकलती है सड़क पर। सड़क पर कुछ होता है ऐसा कि लोग गिरते ...

Read More »

समाजवाद के वापसी का मुद्दा – 2

समाजवाद के वापसी का मुद्दा – 2

सोवियत संघ केे पतन की बाद की दुनिया यूरो-अमेरिकी साम्राज्यवाद की सूरत लगा कर वैश्विक ताकतों के मनमानी की दुनिया है, वैसे यह सूरत उनके पास पहले से थी, जिसका मकसद विश्व पर एकाधिकार है। जिसके लिये उन्हें बार-बार मार्क्सवाद और ...

Read More »

समाजवाद के वापसी का मुद्दा – 1

समाजवाद के वापसी का मुद्दा – 1

सोवियत संघ के पतन के बाद कुछ लोगों ने मान लिया था, कि मार्क्सवाद गुजरी हुई सदी की सोच है। लेनिनवाद की अब कोई पूछ नहीं। माओवाद के पांव के नीचे तो चीन की भी जमीन नहीं है। उन्होंने लातिनी अमेरिकी ...

Read More »

शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार

शिकार करने का जन्मसिद्ध अधिकार

एक बार जंगल राज्य में राजा का चुनाव होना था. अजी चुनाव क्या… बस खाना-पूर्ति तो करनी थी ताकि जंगल लोकतंत्र का भी ख्याल रखा जा सके. भला वर्षों पुरानी इस प्राचीन प्रथा को नया जंगल निजाम कैसे बदल सकता ...

Read More »

देश की आम जनता से कुछ कहती अदालतें – 1

देश की आम जनता से कुछ कहती अदालतें – 1

देश की आम जनता के प्रति जिम्मेदार रहने, और देश के लोकतांत्रिक ढांचे में रह कर सरकार चलाने की नसीहतें देश की उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय दे रही हैं जिसका सीधा सा अर्थ निकलता है, कि मोदी सरकार देश की ...

Read More »

लोकतंत्र को वर्दी पहनाने की नीति

लोकतंत्र को वर्दी पहनाने की नीति

भाजपा का राजनीतिक विकल्प बनने की बातें कुछ ऐसे की जाती हैं, जैसे यह मोदी के खिलाफ खड़े होने की गुस्ताखी है, या अवसरवादी लोगों की राजनीतिक चाल है। उन राजनीतिक दलों की चालबाजी है, जो भाजपा, संघ और मोदी ...

Read More »

दमन के छोटे-बड़े हथियार उठाती सरकार-3 (राष्ट्रवाद में घुला वित्तीय पूंजी का रंग)

दमन के छोटे-बड़े हथियार उठाती सरकार-3 (राष्ट्रवाद में घुला वित्तीय पूंजी का रंग)

किसके पास कितना राष्ट्रवाद है? यदि हम यह सवाल करें और विज्ञापन दें, तो पता चलेगा कि राष्ट्रवाद की इतनी गठरियां जमा हो गयी हैं, कि उन्हें रखने के लिये हमारे पास जगह नहीं है। भाजपा अपनी गठरी को सबसे ...

Read More »

दमन के छोटे-बड़े हथियार उठाती सरकार-2 (किसके पास कितना राष्ट्रवाद है?)

दमन के छोटे-बड़े हथियार उठाती सरकार-2 (किसके पास कितना राष्ट्रवाद है?)

राष्ट्रवाद पर जारी बहस में मोदी सरकार के द्वारा ‘राष्ट्रगान‘ और ‘राष्ट्रीय ध्वज‘ को भी शाामिल कर लिया गया। 10 अप्रैल को केंद्रिय गृह मंत्रालय के द्वारा राज्य सरकारों को एक फरमान जारी कर कहा गया है- ‘‘उसे राष्ट्र ध्वज ...

Read More »

शिनाख्त

शिनाख्त

हम कहां हैं? हमारी समझ में नहीं आ रहा है, जैसे कोई भूलभुलइया, कोई तिलस्म हो, जहां आग, आग नहीं। पानी, पानी नहीं। जमीन, जमीन नहीं। यहां तक कि आदमी, आदमी और जानवर, जानवर तक नहीं लग रहा है। चारो ...

Read More »

दमन के छोटे-बड़े हथियार उठाती सरकार-1 (भारत में अघोषित आपातकाल नहीं)

दमन के छोटे-बड़े हथियार उठाती सरकार-1 (भारत में अघोषित आपातकाल नहीं)

कुछ लोगों को लगता है, कि ‘‘इस देश में अघोषित रूप में आपातकाल की शुरूआत हो गयी है।‘‘ उनको यह लगना, एक सीमा तक इसलिये जायज है, कि उनके पास सरकारी आतंक और दमन का और कोई दूसरा अनुभव नहीं ...

Read More »
Scroll To Top