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Monthly Archives: February 2017

बद्जुबानी भी तो जुबान है

बद्जुबानी भी तो जुबान है

बातों और बकवासों की राजनीति चल पड़ी है। यह क्या कह दिया अखिलेश जी आपने कि ‘‘महानायक गुजरात के गदहों का प्रचार बंद करें।’’ अब आप ही बताईये, सदी ही यदि गदहों की है, तो सदी के नायक या महानायक ...

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चिनम्मा कोई सबक नहीं

चिनम्मा कोई सबक नहीं

चिनम्मा कोई सबक नहीं। राजनीतिक गलियारे में भ्रष्टाचार की परम्परा बड़ी समृद्ध है। तमिलनाडु की राजनीति में वी. के. शशिकला सत्ता के गलियारे में ही रह गयी, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के बाद सत्ता तक पहुंचने की कोशिशें जरूर की, ...

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बाजार में बिके पतंगों की डोर

बाजार में बिके पतंगों की डोर

खबरें फैलायी गयीं राजभवनों से कि ‘पतंग की डोर हमारे हाथों में है।’ हमने बाजार में बिके पतंगों को देखा आसमान में उड़ते, हमने देखा अपने शहर को, और छतों, मुंडेरों पर खड़े पतंगबाजों को। कौम कुनबा और जमातों से ...

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राजनीतिक दलों की झांसा-पट्टी

राजनीतिक दलों की झांसा-पट्टी

एक नंगा दूसरे नंगे को कहता है- ‘‘भाई तू नंगा है।’’ और लोगों को उसे दिखाता है। नंगई इतनी बढ़ गयी है कि लोग मान लेते हैं- ‘‘हमाम में सभी नंगे हैं।’’ जिनके बदन पर कपड़े हैं, आज-कल शर्म उन्हें ...

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बजट पर बकवास

बजट पर बकवास

सरकार ने फ्यूचर का बजट पेश किया। वर्तमान पर बातें करेंगे सरकार? हालत खराब है- देश की, दुनिया की, हमारी और आपकी भी। काहे यह भरम फैला कर रखते हैं, कि आप जो भी करेंगे आम जनता आपके साथ है। ...

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अपने को सफल दिखाने की राजनीति

अपने को सफल दिखाने की राजनीति

मोदी सरकार की ‘सफलता’ इस बात की मिसाल है कि मीडिया और संगठित प्रचारतंत्र के जरिये एक असफल सरकार को सफल दिखाया जा सकता है। यह प्रमाणित किया जा सकता है, कि सरकार की उपलब्धियां बेमिसाल हैं। भारत के राजनीतिक ...

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