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Monthly Archives: March 2017

मुद्दा साहित्य के छोटा या बड़ा होने का नहीं

मुद्दा साहित्य के छोटा या बड़ा होने का नहीं

साहित्य में राजनीति की बात चलती रहती है, मगर समझ यह पैदा की जाती है, कि राजनीति की बात करने से साहित्य छोटा हो जाता है। क्या वास्तव में ऐसा होता है? क्या यह साहित्य को उसके समय से काट ...

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पूंजी के वर्चस्व और राजनीतिक अराजकता का समय

पूंजी के वर्चस्व और राजनीतिक अराजकता का समय

बाजारवाद ने राज्य की सरकारों को आतंकी संगठन और समाज को मुक्त व्यापार का क्षेत्र बना दिया है। उसने समाजवादी समाज व्यवस्था के विकास की संभावनाओं को ही खत्म नहीं किया है, बल्कि जिस पूंजीवादी समाज व्यवस्था ने उसे जन्म ...

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भय की बनती सूरतें

भय की बनती सूरतें

आज सरकार और सरकार समर्थक मीडिया के किसी भी बात पर यकीन करना मुश्किल हो गया है। जिसे वो आतंकवादी कहते हैं, वह आतंकवादी प्रमाणित नहीं होता। जिसे वो देशद्रोही करार देते हैं, वह देशद्रोही प्रमाणित नहीं होता। और ऐसा ...

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पोस्टर

पोस्टर

‘जो गुनाह हमने किये नहीं उन गुनाहों की सजा हमें मिलेगी’, खबर पक्की है। और मैं समझता हूं कि सजा हमें मिलनी भी चाहिए कि हमने देखा नहीं उस कल को बिगड़ते हुए जो हमारा आज है…शहादत के बाद नयी ...

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मतलबी और कम मतलबी सरकारें

मतलबी और कम मतलबी सरकारें

‘कम्युनिस्टों की बात तो आप करें नहीं। वो कहीं नहीं हैं।’ उन्होंने कहा और हमने मान लिया। हमारा यह मानना चुनावी समर और दलगत आधार पर है। आम जनता को अपने पक्ष में मतों में बदलने से है। हमारी सहमति ...

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नारे मुंह चिढ़ा रहे हैं!

नारे मुंह चिढ़ा रहे हैं!

होली से एक दिन पहले। शहर के मॉल, पेट्रोल पम्प, शोरूम और ऐसी बड़ी दुकानें, जिनमें कांच और शीशे लगे हैं उन पर मोटे कपड़े तान दिये गये, पॉलीथिन और गत्ते लगा दिये गये। उनके साइन बोर्ड को भी ढ़ंक ...

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नोटबंदी का ‘रिटर्न गिफ्ट’

नोटबंदी का ‘रिटर्न गिफ्ट’

पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव परिणामों से पहले 9 मार्च के आलेख में हमने लिखा था- ‘‘भाजपा इकलौती ऐसी पार्टी है राष्ट्रीय स्तर पर, जिसके पास नरेन्द्र मोदी के अलावा कोई दूसरी सूरत नहीं है। मोदी ऐसे प्रचारित ‘जन ...

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चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनी हुई सरकारें लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा

चुनाव जनतंत्र का झूठा चेहरा बन कर रह गया है। आम जनता चाह कर भी अपना प्रतिनिधि नहीं चुन सकती। जिन जन प्रतिनिधियों से जनतंत्र में चुनी हुई सरकारें बनती हैं, वे जन प्रतिनिधि आम जनता का प्रतिनिधित्व ही नहीं ...

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पार्टी की तरह दिखते नेता

पार्टी की तरह दिखते नेता

राजनीतिक दल की तरह दिखते नेता यदि मौजूदा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव की विशेषता है, तो भारतीय लोकतंत्र के लिये यह घटित होती दुर्घटना भी है। जिसकी शुरूआत भले ही राष्ट्रीय कांग्रेस के विभाजन से हुई, मगर जिसका चरम ...

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मुद्दों को खारिज करने की रणनीति

मुद्दों को खारिज करने की रणनीति

उत्तर प्रदेश में भाजपा मुद्दों को खारिज रखने की रणनीति के तहत विधानसभा चुनाव लड़ रही है। वजह सिर्फ एक है, कि आर्थिक विकास एक पांव पर खड़ी है, और जन समस्याओं का समाधान उसके पास नहीं है। जिसे वह ...

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