Home / 2017 / April

Monthly Archives: April 2017

सामाजिक विकास की उल्टी दिशा

सामाजिक विकास की उल्टी दिशा

समाज में बुद्धिजीवियों की क्या कोई जगह है? इस सवाल से आप टकरा कर देखें, होश उड़ जायेंगे। भारत में यह वर्ग दशकों से नहीं, बल्कि सदियों से विभाजित है। और यह विभाजन स्वाभाविक है। समाज यदि बंटा हुआ है, ...

Read More »

बिना लाल बत्ति की सरकार

बिना लाल बत्ति की सरकार

लाल बत्ती के दिन लद गये। यह अच्छी बात है, मगर इसमें ऐतिहासिक क्या है? क्या आप बता सकने के लायक हैं? कैबिनेट ने निर्णय लिया, प्रस्ताव पीएम साहब का था। बत्तियां गुल हो गयीं। तमाम भेंड़ दिखा-दिखा कर बत्तियां ...

Read More »

मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को ब्राण्ड समझना गलत नहीं

मोदी को एक ब्राण्ड समझना गलत नहीं है। वो देश को ब्राण्ड बना रहे हैं। देशभक्ति की ब्राण्डिंग कर रहे हैं, और देशद्रोह की भी। जिसे आने वाले कल में तब समझा जाएगा, जब हम देश की दुर्दशा की बात ...

Read More »

सीरिया को बचाने की लड़ाई

सीरिया को बचाने की लड़ाई

सीरिया को बचाने की लड़ाई विश्व समुदाय को लड़नी ही चाहिए, क्योंकि जिन आधारहीन आरोपों के तहत सीरिया पर अमेरिकी हमले की शुरूआत हो गयी है, वह सीरिया को इराक और लीबिया बनाने की नयी पहल है। जिसमें यूरोपीय देश ...

Read More »

सीरिया का संकट

सीरिया का संकट

इराक में 2003 से अब तक अमेरिका घातक -रासायनिक एवं जैविक- हथियार ढ़ूंढ़ रहा है जो नहीं मिला, मगर जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इराक को तबाह कर दिया, सद्दाम हुसैन को फांसी दी और एक मिलियन से ज्यादा इराकियों को ...

Read More »

समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

समाजवादी क्रांति और सोवियत संघ के पतन के बाद – 2

पूंजीवाद का संकटग्रस्त होना समाजवादी सर्वहारा क्रांति की ऐतिहासिक अनिवार्यता है, किंतु समाजवाद के सामने भी गंभीर संकट है। यह सवाल है, कि सोवियत संघ का विघटन समाजवादी समाज व्यवस्था के विघटन का आखिरी पड़ाव नहीं। क्या राज्य की इजारेदारी ...

Read More »

मिट्टी होने की लड़ाई

मिट्टी होने की लड़ाई

लोहे को काट और मोड़-बांध कर खड़ा करता है वह उस इमारत का ढ़ांचा जिसकी गहरी बुनियाद में है वह मिट्टी जो लोहे से ज्यादा मजबूत और मुलायम है, जिसके खिलाफ इमारत मरे हुए ईंट-पत्थर और मरी हुई लकड़ियों से ...

Read More »

उधड़ी हुई सड़कों का चौराहा

उधड़ी हुई सड़कों का चौराहा

हम उस चौराहे पर खड़े हैं जहां से निकली और जहां तक पहुंची राहें उधड़ी हुई, बेमरम्मत हैं। ध्वस्त हैं बांये बाजू की राहें दायें बाजू विध्वंस है। चौराहे पर टंगा निर्देश है- ‘बांये बाजू से चलें लालबत्ती से रूकें ...

Read More »

भाजपा की जीत स्वाभाविक नहीं

भाजपा की जीत स्वाभाविक नहीं

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव परिणाम आने के दौरान ही बहुजन समाज पार्टी की सब कुछ मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर भाजपा और केन्द्र की सरकार पर चुनावी मशीन -ईवीएम- से छेड़-छाड़ करने का सीधा आरोप लगाया था। सपा ...

Read More »
Scroll To Top