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Monthly Archives: July 2017

लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 2

लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 2

प्रतिक्रियावादी ताकतें इस बात को अच्छी तरह जानती हैं, कि अंततः उनका वास्ता जनअसंतोष से ही पड़ेगा। आम जनता से लड़ाई उसे लड़नी होगी। ऐसी सरकारें यह भी जानती हैं, कि आम जनता का भरोसा जब तक बना रहेगा, सरकारें ...

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लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 1

लोकतंत्र यदि भारत है तो कोई खास बात नहीं – 1

स्तम्भों को हिलाने की नीति- अपने राजनीतिक प्रतिद्वन्दी और विपक्ष को कुचलने की जैसी राजनीति भाजपा कर रही है, वैसी राजनीति भारतीय लोकतंत्र में पहले कभी नहीं की गयी। राजनीतिक एकाधिकार की उसकी सोच उस ओर बढ़ चुकी है जो ...

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लकड़बग्घे की हंसी

लकड़बग्घे की हंसी

आपके जी में जो आये कह सकते हैं। अक्ल यदि आपकी है, तो उसका दीवालियापन भी तो अपका ही होगा। वैसे, अक्ल के दीवालियापन की आज कल वकत बढ़ गयी है। पूछ भी बढ़ी है। गांधी को आप मोदी बना ...

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भारत को अपनी नीतियां साफ करनी होंगी

भारत को अपनी नीतियां साफ करनी होंगी

कारोबार में सौदेबाजी तो होती ही है। ऐसे ही रिश्तों के नये दौर की शुरूआत हो गयी है, जिसमें युद्ध और युद्ध की धमकी भी शामिल है। सिक्कीम-दोकलम पठार को लेकर भारत और चीन के बीच का तनाव बढ़ गया ...

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भारत-चीन रिश्ते को संभालने की जरूरत है

भारत-चीन रिश्ते को संभालने की जरूरत है

चीन के विरूद्ध आप खड़े हो सकते हैं। सवाल यह है, कि उससे हमें हासिल क्या होगा? हम भारत सरकार की नीतियों की ही बात करें, तो देश की मोदी सरकार भारत को एक ब्राण्ड और बाजारवादी अर्थव्यवस्था के जरिये ...

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जीएसटी – एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार

जीएसटी – एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार

मोदी जो दिखाते हैं, उसके पीछे उससे बड़ा खतरा छुपाते हैं। अभी हम जीएसटी देख रहे हैं। ‘राष्ट्र के इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार‘ का जश्न देख रहे हैं। ‘एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार का सपना देख रहे ...

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