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गाजा से डाॅ. मेस गिल्बर्ट – ‘‘मि. ओबामा क्या आपके पास दिल है?’’

MadsGilbertडाॅ. मेस गिल्बर्ट

‘‘गाजा में जो हो रहा है, आप उसका समर्थन कैसे कर सकते हैं?‘‘ यह सवाल बराक ओबामा या उनके बेरहम दोस्तों से नहीं है, जिनके पास सेना और आतंकी हत्यारे हैं। उनसे यह सवाल हम नहीं कर सकते हैं, जो चाहते हैं- मध्य-पूर्व में तनाव, अस्थिरता और युद्ध का खतरा बना रहे। लोग मरते रहें। हत्यायें होती रहें। जिनके टी-शर्ट पर लिखा है- ‘‘एक गोली से दो फिलिस्तीनियों को मारो।‘‘ वो गर्भवती महिलाओं की हत्या कर रहे हैं। इस्त्राइली सेना फिलिस्तीनियों के लिये बेरहम दरिन्दे हैं। वो घायलों के सिर पर बंदूक की नाल सटाते हैं, और ट्रिगर दबा देते हैं। उनके पास गोलियों की, हथियारों की कमी नहीं है। अमेरिकी समर्थन और अमेरिकी हथियार उनके पास है।

यह सब जानने के बाद भी उत्तरी नार्वे के डाॅक्टर मेस फ्रेडरिक गिल्बर्ट ने बराक ओबामा को लिखा-

‘‘मिस्टर ओबामा क्या आपके पास दिल है?

मैं आपको, बस एक रात के लिये, अल-शाईफा में आमंत्रित कर रहा हूं, अपने साथ काम करने वाले एक सफाई कर्मचारी के रूप में। हाॅस्पिटल में काम करने के लिये।

मुझे इस बात का सौ प्रतिशत विश्वास है, कि हमारे साथ गुजारी गयी यह रात इतिहास को बदल देगी।

कोई भी, जिसके पास दिल है, और जिसके पास हो रहे हमलों को रोकने की ताकत है, वह शाईफा में गुजारे गये रात के अनुभव से भाग नहीं सकता, उसे यह तय करना ही होगा, कि ‘‘फिलिस्तीनियों की हत्या बंद हो।‘‘

किंतु हृदयहीन और जरूरत से ज्यादा निर्दयी लोगों ने गाजा में एक दूसरा ‘डाजिआ’ बनाने का निर्णय कर लिया है।

मैं जानता हूं कि आने वाली रातों में भी खून का बहना जारी रहेगा। मैं मृत्यु के साज पर उसके तरंगों की आहट सुन सकता हूं।

मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप जो भी, कर सकते हैं, कीजिये। इसे जारी रखा नहीं जा सकता। फिलिस्तीनियों की हत्या बंद कीजिये।‘‘

नार्वे के इस डाॅक्टर की अपील को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सुना या नहीं? यह तो मालूम नहीं है, मगर अमेरिकी सरकार जो कर सकती है, वह कर रही है, उसने इस्त्राइल के नये हथियारों की आपूर्ति की मांग को स्वीकार कर लिया है। पेशेवर हत्यारों ने नया जोश भरने के लिये, अब नये टी-शर्ट पर एक गोली से दो को मारने की जगह एक धमाके से एक कौम को मिटाने का स्लोगन हो सकता है।

लेकिन, दुनिया के ज्यादातर लोग और ज्यादातर देश गाजा पर इस्त्राइली हमले और फिलिस्तीनियों की की जा रही हत्यारों के खिलाफ हैं।

Norvegesiडाॅ0 गिल्बर्ट सिर्फ एक डाॅक्टर नहीं, बल्कि समाजसेवी और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के पाॅलिटीशियन हैं। उन्होंने डाॅक्टर की हैसियत से वहां पहले भी काम किया है।

और उन्होंने जो किया और जो वो कर रहे हैं, वह बड़ी चीज है। और उनके साथ जो घायलों को बचाने में लगे हैं, वो बड़ी चीज है। उन्होंने लिखा-

‘‘19 जुलाई की रात सभी सीमाओं को लांघ गयी। जमीनी कार्यवाही की वजह से सैंकड़ों घायल खून से लथ-पथ, क्षत्त-विक्षत्त, कांपते और मरते हुए, फिलिस्तीनी कारों में भर-भर कर आते रहे। सभी उम्र के आम फिलिस्तीनी जो नहीं जानते थे, कि उन पर हमले क्यों हो रहे हैं? क्यों उन्हें मारा जा रहा है?‘‘

उन्होंने लिखा- ‘‘गाजा के सभी अस्पताल और ऐम्बुलेन्स में ऐसे ही हीरो हैं, जो 12 से 24 घण्टों के सिफ्ट में काम कर रहे हैं। वो थकान से चूर और अमानवीय काम को लगातार करते हुए, खुद बीमार हो रहे हैं। शाईफा में ऐसे लोगों को पिछले 4 महीनों से वेतन नहीं मिला है, फिर भी वो उन घायलों को बचाने में दिन-रात लगे हैं। वो भारी अव्यवस्था के बीच यह तय करने में लगे हैं, कि पहले इलाज के लिये किसे भेजा जाये? जो बड़े-बूढ़े हैं, या बच्चे हैं? या उन्हें जो खून से तर-ब-तर हैं, और अपना अंग खो बैठे हैं? या उन्हें जो सांस नहीं ले पा रहे हैं, और जिनका दम घुट रहा है? ऊपर से देख कर यह तय करना मुश्किल है, लेकिन इस समय के, ये नायक कर रहे हैं।‘‘

उन्होंने इस्त्राइली सेना के लिये लिखा कि ‘‘अपने को दुनिया में सबसे नैतिक समझने वाली सेना फिलिस्तीनियों के साथ जानवरों की तरह व्यवहार कर रही है।‘‘

डाॅक्टर गिल्बर्ट ने लिखा है कि ‘‘घायलों के प्रति मेरा सम्मान असीम है, जिन्होंने दर्द, यातना और सदमे के बीच अपने धैर्य को बनाये रखा है। मैं अपने साथ काम करने वालों और स्वयं सेवकों के प्रति असीम प्रशंसा का भाव रखता हूं। फिलिस्तीनियों के साथ मेरी निकटता मुझे नयी शक्ति देती है। फिर भी कभी-कभी चीखना चाहता हूं। किसी को पकड़ कर रोना चाहता हूं। मैं खून से भीगे हुए बच्चे के बालों को सूंघना चाहता हूं, जो अंतहीन मृत्यु के आलिंगन में बंधता जा रहा है। जिसे न तो मैं बर्दास्त कर पा रहा हूं, ना वो लोग जिन्हें यह बर्दास्त करना पड़ रहा है।‘‘

डाॅक्टर गिल्बर्ट ने जो भी लिखा है, वह वहां हुए इस्त्राइली हमले की ऐसी भयानक तस्वीर है, जिसे आसानी से महसूस किया जा सकता है, मगर उसे जीने का साहस कर पाना, किसी भी हौसलामंद आदमी के लिये भी मुश्किल है। अस्पताल के भीतर का नजारा शहर की तबाही और लोगों को दम तोड़ते हुए जीने की जद्दोजहद है। उन्होंने लिखा-

‘‘राख की तरह सलेटी चेहरे। एक नहीं, ऐसे दसों घायलों को संभालने, उनका इलाज करने का बोझ हम पर पहले से है, जो अपने ही खून से भीगे हुए हैं। इर्मेजेन्सी रूम का फर्श जैसे खून का तालाब है, ढेर सारे ड्रिप्स, खून से भीगे बैंण्डेज हैं, साफ करने के लिये। सफाई करने वाले लोग तेजी से बेलचे से खून, टिसू, बाल, कपड़े, मरे हुए लोगों के कटो हुए अंग, मानव शरीर के टुकड़ों को साफ कर रहे हैं। वो फिर से तैयार हो रहे हैं, इसे दोहराने के लिये, क्योंकि घायलों का अंत नहीं है, जिन्हें इलाज और देख-भाल की जरूरत है। पिछले 24 घण्टे में शाईफा में 100 से ज्यादा ऐसे केसेस आये हैं। किसी भी बड़े अस्पताल के लिये, जहां सारी सुविधायें हों, भी यह संख्या ज्यादा है, मगर यहां लगभग कुछ भी नहीं है, ना बिजली है, ना पानी है, ना दवाईयां हैं, और ना ही इलाज के लिये उपकरण हैं। जो भी उपकरण हैं, वो ऐसे जंग लगे हैं, जैसे उन्हें किसी पुराने अस्पताल के म्यूजियम से लाया गया हो, मगर वो शिकायत नहीं करते, वो वास्तव में इस समय के नायक हैं, वो योद्धाओं की तरह लड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं।‘‘

‘‘और जब, मैं ये सारी बातें आपको बता रहा हूं, उस वक्त मैं अकेले एक बिस्तर पर पड़ा हूं। मेरे आंसू बह रहे हैं, गर्म आंसू। दुख, दर्द, नाराजगी और डर के महत्वहीन आंसू।‘‘ और अंत में वो लिखते हैं- ‘‘और एक बार फिर इस्त्राइली वाॅर मशीन के आर्केस्ट्रा ने अपने भयानक संगीत को शुरू कर दिया है। उनके नेवी बोट्स ने समुद्री किनारे पर हमला कर दिया है। कानफाडू धमाके, शोर मचाते एफ-16 लड़ाकू बम वर्षक, जानलेवा ड्रोन और खलबली मचाते अपाचे हेलिकाॅप्टर अमेरिका के बने हुए। ओह, मिस्टर ओबामा, क्या आपके पास दिल है?‘‘

मगर, बराक ओबामा के पास दिल नहीं, शातीर दिमाग है। वह हत्यारा है, जो हर खूबसूरत चीज को तोड़-फोड़ रहा है, हंसते-बोलते लोगों की हत्या कर रहा है। और हत्यारों को ओबामा सरकार हथियार और गोला-बारूद सौंप रही है। पेंटागन ने कहा है, कि ‘‘अमेरिका के लिये यह सम्मान की बात है, कि इस्त्राइल ने उससे कई तरह के आयुद्धों की मांग की है। जिसकी कीमत 1 बिलियन डाॅलर से ज्यादा है।‘‘ वैसे भी मानवाधिकार की सबसे बड़े समर्थक अमेरिकी सरकार के लिये यह गर्व की बात होनी ही चाहिये कि इस्त्राइली सेना शरणार्थी शिविर और अस्पतालों पर भी हमले कर रही है।10547633_10203689050259851_663080638962254566_n

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One comment

  1. RAMESH KUMAR GOHE

    डॉ.मेस गिल्बर्ट का पत्र पढ़कर मैं कुछ समय के लिए एकदम खामोश हो गया | सचमुच हिंसा मनुष्यता को ख़त्म कर रही है यह चिंता और चिंतन करने का समय है |काश कि यह पर बराक ओबामा ने पढ़ा होता !

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