Home / साहित्य / कविता / बंटवारे के बीच का राष्ट्रीय पर्व

बंटवारे के बीच का राष्ट्रीय पर्व

3

14 अगस्त
और 15 अगस्त के बीच
मैं सहज नहीं रह पाता
लाशों से भरी एक रेल पटरियों पर
भागती, दौड़ती रहती है,
और
एक चीख
दबती-घुटती हुई
मेरा पीछा कर रही होती है।
मेरे भीतर एक जिंदा आदमी
दशकों से, कट रहा होता है
और एक जमीन
बंट रही होती है टुकड़ों में।
पहले हम हिंदुस्तान थे,
फिर पाकिस्तान भी हुए
और फिर बांगलादेश भी।
सुनते हैं
लोगों में टूटने और बिखरने का गुस्सा
भरा जा रहा है,
हंथेली को
मुट्ठी बनने से रोकने के लिये
अंगुलियों में बदला जा रहा है।

हम
कहां खड़े हैं
और कहां के लिये निकले थे? का सवाल
कोई मुझसे करता है
और कहता है- ‘‘जानना ही चाहिये हमें,‘‘
जानना ही होगा हमें
कि जब सरहदें नहीं थीं, हमारे बीच
हम क्या कर रहे थे? गुलामी के विरूद्ध
अपनी आजादी के लिये
किससे लड़ रहे थे?
लगे हाथ
यह भी जान लें तो अच्छा होगा
कि हम आज, किससे लड़ रहे हैं?

मुश्किल नहीं है
इन बातों को जान लेना,
और गुजरे हुए कल को एक साथ जी लेना।
पाकिस्तान हो आना
अफगानिस्तान तक हो लेना
या इराक और ईरान को देखना
जहां हम
सिंधु से लेकर,
दजला फरात की घाटी तक फैले थे।
कहता है वह
माना हमारे बीच
कटीले तार बिछे हैं
आतंकी करतूतों
और कारनामों के जख्म खुले हैं,
हमलों के बाद
वार्ताओं की मेज सजी है,
पानी के साफ बोतलों की तरह
एक-दूसरे के सामने मुल्क के झण्डे गड़े हैं।

मगर
थोड़ी देर के लिये
हम उनसे तो मिल ही सकते हैं
जो खड़े या गड़े नहीं हैं
टोबा टेक सिंह की तरह गोली खा कर
सरहदों पर, गिरे-पड़े हैं,
या भगत सिंह की तरह
कहीं नारे, कहीं गैर हो गये हैं।
क्या, यह अजीब बात नहीं है
कि
इतिहास की कब्र में
हमारे पुरखे एक साथ दफन हैं?
यह मान लेने में केाई हर्ज नहीं है भाई,
कि सरहदों की रखवाली
और परवरिश करने का पागलपन
हम झेल रहे हैं।

हम झेल रहे हैं
टूटती हुई जमीन,
उजड़ते हुए लोग
और जिंदा आदमी के कटने की पीड़ा।
सही सोच को बउवाते हुए देखने का दर्द
हम सह रहे हैं
और अपने देश में
फिलिस्तीनियों की तरह जीने की ओर बढ़ रहे हैं।
कि जिनकी खाल खींच लेनी चाहिये,
उनके इशारे पर चल रहे हैं।
14 अगस्त और 15 अगस्त के बीच के बंटवारे को
राष्ट्रीय पर्व की तरह जी रहे हैं।

jurl

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top