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तेल गरम हो रहा है

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हम मोदी नगर में हैं।

लेकिन यह मोदी काॅन्टीनेन्टल वाला मोदी नगर नहीं है, ना ही यह गुजरात में अब तक, जो नहीं बन सका, वह मोदी नगर है, बल्कि यह शिव की नगरी काशी का ऐसा मोदी नगर है, जिसे आम चुनाव में जीत लिया गया है। मोदी जी ने जीता है। भारी मतों से जीता है। पांच साल के लिये जीता है। इसलिये काशी भी शिव की नगरी नहीं, अब मोदी नगर है। जहां बिजली की हालत बड़ी खराब है, इसलिये दीया-बत्ती, ढि़बरी-लालटेन और मोमबत्ती से लेकर इन्वर्टर तक का कारोबार आराम से चलता है। और इसे बनाने वाली छोटी-छोटी निजी कम्पनियां हैं, इसलिये जब तक कोई बड़ी कम्पनी नहीं आ जाती मैदान में, इन्हें चलने देना चाहिये। जनरेटर लोग औकात के हिसाब से धडधड़ाते हैं। जहां सदियां पंगत में बैठे साधु और सवादू की तरह एक ही पातिया पर है। वह सदी यूरोपीय सदी के पूर्व की हो या इक्कीसवीं सदी, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। सभी मिल-जुल कर बिजली होने, न होने की तकलीफ उठाते हैं। और अपने एक मोदी बाबा हैं, जो कहते हैं, बिजली बचाना देश की सेवा है। चांदनी रात में बिजली गुल करके रखिये और यदि सूरज है, तो बिजली की जरूरत ही नहीं है। और यदि आप कहते हैं, कि गरमी है। तो गर्मी को गोली मारिये। जब तक गरमी है, बाहर हवाखोरी कीजिये, फिर चांदनी रात तो है ही।

मगर गर्मी और उमस का दर्द घट नहीं रहा है।

दर्द का सबब यह है, कि हमारे मुहल्ले का ट्रांसफार्मर उड़ गया।

उड़ने की खबर सुन कर किसी को भी हैरत हो सकती है, कोई भी बहस कर सकता है, और सवाल कर सकता है, कि ‘‘ट्रांसफार्मर कैसे उड़ गया?‘‘

मगर यह तंज और गलचऊरों का शहर बनारस है, यहां बोलियां बोली जाती हैं, इसलिये किसी को ट्रांसफार्मर को चिडि़या समझने की भूल नहीं की। सभी को मालूम है, कि ट्रांसफार्मर उड़ता है, और इस मुहल्ले का ट्रांसफार्मर उड़ गया है।

किसी ने कहा- ‘‘का हो, अच्छा दिन आ गयल?‘‘

किसी ने कहा- ‘‘चैबिस घण्टा बिजली, बिना ट्रांसफार्मर के जरी।‘‘

किसी ने यह भी कहा- ‘‘बनारस में न चैबिस घण्टा बिजली देवे के बात कहले रहलन तोहार घरवा में नहीं।‘‘ और उन्होंने संधियों की तरह सिद्ध कर दिया कि बनारस में बिजली चैबिसों घण्टा है। कभी यहां, तो कभी वहां।

और ट्रांसफार्मर के उड़ने की खबर मुहल्ले भर में फैल गयी।

किसी ने उसके उड़ने की आवाज सुनी,

किसी ने उसके उड़ने की चमक देखी,

ऐसे भी लोग मिले, जिन्होंने चमक देखी और आवाज भी सुनी। वो ट्रांसफार्मर के उड़ने के चश्मद्दीद गवाह बने। उन्होंने न्यूज चैनलों की तरह आंखो देखा हाल सुनाया।

जिसने भी हाल सुना उसके दिल बैठ गये- ‘‘हे भोले बाबा! रात कैसे कटी?‘‘

भारी उमस और भीषण गर्मी।

ट्रांसफार्मर के उड़ने की घटना रात 8 बजे घटी।

धमाका हुआ।

बिजली चमकी।

और फिर अंधकार के साथ सन्नाटा खिंच गया।

यह सन्नाटा तब तक खिंचा रहा, जब तक मुहल्ले के निठल्ले सक्रिय नहीं हो गये।

निठल्लों ने उड़े हुए ट्रांसफार्मर को लाने का मोर्चा संभाल लिया। देखते ही देखते जर्नादन गुरू से लेकर मंटू चैबे तक और नित्यानंदन से लेकर बंटुआ तक जमा हो गये। राजनीति के सर्वमान्य दीनबंधु जी अवतरित हुए। पिछली सरकार जब बनी थी, उनका घर बना था, और अब जब मोदी जी की सरकार बनी उनके घर के ऊपर दो मंजिल और जुड़ गयी।

दीनबंधु जी राजनीतिक समन्वय और लोकतांत्रिक मूल्यों की मिसाल हैं। उनके अवतरित होते ही ‘ट्रांसफार्मर मार्च‘ हुआ। मुख्य सड़क जाम हुआ। मुहल्ले की खबर शहर में फैल गयी, कि ‘‘मोदी की नगरी काशी के गांधी नगर का ट्रांसफार्मर जल गया है।‘‘ मतलब जवाहर नगर से इंदिरा नगर की बत्ती गुल हो गयी है।

यह तय रहा कि आश्वासन के मुताबिक यदि सुबह तक उड़े हुए ट्रांसफार्मर की जगह दूसरा ट्रांसफार्मर नहीं आया, तो सुबह आठ बजे से फिर सड़क जाम होगा।

लेकिन दूसरे दिन सड़क जाम करने की नौबत नहीं आयी। दीन बंधू जी की भक्ती काम आयी।

मोदी नगर में त्वरित कार्यवाही हुई।

ट्रांसफार्मर के आने की खबर उड़ी और खबरों के साथ ट्रांसफार्मर को ट्रैक्टर पर बांध कर लाया गया। पीछे-पीछे लोहे का ‘हाथी‘ आया।

‘साइकिल‘ पर मिस्त्री-कारीगर आये। लोहे के ‘पंजा‘ नुमा खम्भे पर ट्रांसफार्मर को जकड़ दिया गया। सभी राजनीतिक एवं गैर राजनीतिक औपचारिकतायें पूरी हो गयीं।

अब खबर है, कि तेल गरम हो रहा है।

जब तेल गरम हो जायेगा, बिजली आपूर्ति पूरी हो जायेगी, और फिर 24 घण्टे बिजली उत्पादन और आपूर्ति का ‘गुजरात माॅडल‘ अवतरित होगा। एक कम्पनी बिजली बनायेगी, दूसरी उसे खम्भों तक पहुंचायेगी और तीसरी कम्पनियों का समूह उसे घरो-दुकानों तक पहुंचाने का काम करेगी। बिजली चैबिसों घण्टे रहेगी, जिसकी कीमत आम जनता चुकायेगी, जिसे तय निजी कम्पनियां करेंगी। सहयोग, समन्वय और सहभावना के नये युग की शुरूआत होगी।

हम मोदी नगर में हैं। जहां बिजली की किल्लत सुलझायी जा रही है। ट्रांसफार्मर के चक्करदार सांचे में भरा तेल गरम हो रहा है। मोदी जी ‘मेक इन इण्डिया‘ के साथ हमारे सामने हैं। जनता बजरबट्टूओं की तरह देख रही है।

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