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शांतिवार्ता के साथ बढ़ती सैन्य सक्रियता

Turkey-protest-Syria-warसीरिया को लेकर एक बड़े युद्ध का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शांति की प्रक्रिया के बीच सैन्य सक्रियता बढ़ गयी है। हाल के दिनों में सीरिया और उत्तरी इराक में हो रहे परिवर्तन को देखते हुए 3000 से ज्यादा अमेरिकी सेना गुप्त रूप से इराक में फिर से दाखित हो गयी है। प्रेस टीवी संवाददाता के अनुसार- अमेरिकी टुकडि़यां कर्इ चरणों में गुप्त रूप से कुवैत की सीमा से दाखिल हुर्इं। इन सैन्य टुकडियों ने सलाहुददीन प्रांत के बलाद मिलिट्री मोर्चा और अल-अनबर प्रांत के अल-असद एयरबेस में अपना ठिकाना बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार -इन टुकडियों में अमेरिकी सेना के अधिकारी भी शामिल हैं, और लगभग 17,000 टुकडियां इन्हीं रास्तों से गुप्त रूप से -इराक में वापस लौटने के लिये तैयार बैठी हैं।

इराक से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद सैन्य ठिकानों के बने रहने के लिये दिये जाने वाले तर्क उसकी अपनी ही घोषणाओं का उल्लंघन है। 2011 के अंत में इराक से अमेरिकी सेना की वापसी हुर्इ थी। लेकिन उसकी ज्यादातर सेना को कुवैत में रोक कर रखा गया। वहां से कुछ की वापसी अमेरिका हुर्इ और कुछ को जार्डन भेज दिया गया। जहां से वह अपनी साम्राज्यवादी गतिविधियों को सीरिया के खिलाफ चला रहा है।

इराक में अमेरिका के 1,70,000 ‘ट्रूप्स’ और 500 से ज्यादा ‘बेस’ मौजूद थे। इराक युद्ध में 1 मिलियन से भी ज्यादा इराकियों की जान गयी।

इराक में अमेरिकी सेना की गुप्त वापसी और कुवैत में अमेरिकी सेना का होना, सीरिया की समस्या को संगीन बना रहा है। जार्डन में उसकी सेना पहले से है, और नाटो के द्वारा सीरिया-तुर्की सीमा के करीब पेटि्रयाट मिसाइल की तैनाती की जा चुकी है। जिसे रूस भी अपने लिये खतरा मानता है।

3 दिसम्बर को रूस के राष्ट्रपति पुतिन इस्ताम्बुल पहुंचे। तुर्की के प्रधानमंत्री से उनकी वार्ता हुर्इ। दोनों के बीच वार्ता का मुख्य मुददा -सीरिया की ताजा सिथति, गाजापटटी और मध्यपूर्व के मौजूदा हालात थे। सीरिया और तुर्की के बीच का तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। तुर्की के एफ-16 लड़ाकू विमान के द्वारा 10 अक्टूबर को रूस से सीरिया जा रहे एक सीरियन एयर बस ए-320 को अंकारा के एयरपोर्ट पर उतरने के लिये विवश किया गया था। सीरिया के यात्री विमान का अपहरण और उसके यात्रियों सहित चालक दल से की गयी बदतमीजियों का विरोध सीरिया ही नहीं, रूस के द्वारा भी किया गया। तुर्की के सभी तर्कों को अस्वीकार करते हुए रूस ने सीरिया को भेजे गये एंटी मिसाइल सिस्टम को वापस करने का दबाव डाला जोकि सीरिया और रूस के सैन्य समझौतों के तहत जायज आपूर्ति थी। तुर्की की संसद से सीरिया पर आवश्यकता होने पर, सैन्य कार्यवाही का प्रस्ताव, भारी जनविरोध के बाद भी, पारित करा लिया गया है। तुर्की-सीरिया सीमा से भारी संख्या में घुसपैठ हो रहा है। तुर्की की सेना को सर्तक कर दिया गया है। सीरिया के अनुरोध पर ही ‘नाटो’ के द्वारा पेटि्रयाट मिसाइल की तैनाती की गयी है।

रूस ने तुर्की को सीरियार्इ सीमा के पास नाटो संगठन के द्वारा जमीन से हवा में मार करने वाले पेटि्रयाट मिसार्इल तैनात करने पर गंभीर चेतावनी दी है। तुर्की ने अधिकृत रूप से रूस को आश्वस्त किया है, कि यह तैनाती तुर्की की सुरक्षा के लिये, आत्मरक्षा के लिये है। और इसका उपयोग ‘नो-फ्लार्इ जोन’ या हमले के लिये नहीं किया जायेगा।

इस बीच, सीरियार्इ सेना के द्वारा विद्रोहियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा रही है। उन्हें महत्वपूर्ण सफलता भी मिली है। 6 दिसम्बर को दमिश्क हवार्इ अडडे को विद्रोहियों से मुक्त करा लिया गया। विद्रोहियों को उनके प्रभाव क्षेत्र वाले इलाकों से खदेड़ रही है। विपक्ष और विद्रोहियों को जमीनी लड़ार्इयों में वह सफलता नहीं मिल पा रही है, जो साम्राज्यवादी ताकतें चाहती हैं। इसलिये, अमेरिका एवं यूरोपीय शकितयां सीरिया के खिलाफ कूटनीतिक दबाव के साथ अपनी सैन्य सक्रियाता बढ़ दी हैं। अमेरिका रसायनिक हथियारों का कोहराम मचा कर खुला हस्तक्षेप चाहता है। उसका युद्धपोत यूएसएस आइजेन हावर सीरिया के निकट पहुंच गया है।

सीरिया के पक्ष में रूस की कूटनीतिक पहल के साथ सैन्य सक्रियता भी नजर आने लगी है। 18 दिसम्बर को रूस के रक्षा मंत्रालय ने घोषणां की है कि ”रूस के युद्धपोत का एक नया बेड़ा मध्य सागर से सीरिया की समुद्री सीमा के करीब पहुंच रहा है।” मंत्रालय ने जानकारी दी है कि रूसी नौसैनिक बेड़ा मध्यसागर में अपने अन्य बेड़ों को बदलने के साथ सैन्य अभ्यास करेगा।

इंटर फैक्स न्यूज एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार ‘सीरिया की सिथति खराब होने की सिथति में यह बेड़ा वहां से रूसी नागरिकों को निकालने का काम करेगा।’ सीरिया में रूस का एक नौसैनिक अडडा है। वह सीरिया का महत्वपूर्ण सहयोगी देश है। वह सीरिया को किसी भी कीमत पर लीबिया बनने देना नहीं चाहता।

9 दिसम्बर को रूस के विदेशमंत्री सर्गेर्इ लोवारोव ने कहा कि ”मास्को सीरिया के साथ लीबिया वाली घटना दोहराने नहीं देगा।” उन्होंने कहा- ”हम सीरिया में लीबिया के अनुभव को लागू करने की इजाजत नहीं देंगे। दुर्भाग्यवश हमारे पशिचमी साझेदार जिनेवा समझौते का पालन न करके, सीरिया के राष्ट्रपति बशर-अल-असद को हटाने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने उन अफवाहों को खारिज कर दिया कि ”रूस सीरिया में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी कर रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ”हमारी वरियता सीरिया की असिथरता को समाप्त करने की है, ना कि किसी एक व्यकित -बशर-अल-असद- के भाग्य के बारे में सोचने की।” उन्होंने कहा- ”सीरिया में हमारी सिथति बिल्कुल साफ है, मास्को सीरिया के मुददे पर किसी एक व्यकित -असद या कोर्इ अन्य- से जुड़ा हुआ नहीं है।”

सीरिया में बशर-अल-असद को रूस, वहां का वैधानिक नेतृत्व मानता है। जिन्हें सत्ता से बेदखल करने की मांग पशिचमी देश और अमेरिका करते रहे हैं। दिसम्बर की शुरूआत में अमेरिका ने सीरिया की सरकार पर, अपने ही देशवासियों के खिलाफ रसायनिक हथियारों का उपयोग करने की तैयारी करने का प्रचार करते हुए, उसकी समुद्री सीमा पर यूएसएस आइजेन हावर नौसैनिक बेड़ा तैनात कर दिया। मध्य-पूर्व सागर में पहले से ही अमेरिका का यू0एस0एस0 आर्इ वो जिमा, यू0एस0एस0 न्यूयार्क और यू0एस0एस0 गनस्टन हाल युद्धपोत तैनात है, जिनमें 2500 अमेरिकी मैरिन मौजूद हैं।

सीरियायी सीमा के करीब अमेरिका के 17 युद्धपोत, 70 बमवर्षक विमान और 10,000 सैनिक मौजूद हैंं, इसके अलावा अमेरिकी एयरफोर्स का 39वां एयरबेस विंग तुर्की के इन्सरलार्इक बेस में तथा हजारों की संख्या में अमेरिकी सैन्य टुकडियां कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमिरात और बहरीन में तैनात है।

2012 की शुरूआत में सीआर्इए ने दक्षिणी तुर्की में एक कमाण्ड एण्ड कंट्रोल हेडक्वाटर स्थापित किया है। जिसका उददेश्य सीरियायी विद्रोहियों को हथियार एवं अन्य सहायता पहुंचाना है।

तुर्की की सीमा से ही सीरिया में हजारों लीबिया के टीएनसी विद्रोही एवं आतंकियों की घुसपैठ करार्इ गयी है। पिछले एक दशक में जहां भी अमेरिकी साम्राज्यवादी हस्तक्षेप हुआ है, सेना के द्वारा तख्तापलट और हमले हुए हैं, वहां उसके सहयोगी इस्लामी शकितयां और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभार्इ है। तख्ता पलट के बाद इन इस्लामी शकितयों एवं आतंकी संगठनों की संख्या बढ़ जाती है और वो उस देश की सरकार का निर्णायक हिस्सा होते हैं, चाहे वह इराक हो, लीबिया हो या सीरिया। जहां गृहयुद्ध जैसी सिथतियां बनी रहती हैं। अरब जगत की इस्लामी शकितयां, शाहों और उनकी सैनिक सरकार ही आज अमेरिका के सहयोगी देश हैं। जहां अमेरिकी साम्राज्य और पशिचमी देशों के खिलाफ गहरी घृणां है। दुनिया में एक भी देश ऐसा नहीं है, जहां अमेरिका और अमेरिकी सरकार को जनसम्मान हासिल हो।

सीरिया का संकट निर्णायक होता जा रहा है। अमेरिकी सैन्य एवं कूटनीतिक सक्रियता में तुर्की और जार्डन की सम्बद्धता खुले आम है। 31 दिसम्बर को अरबी में निकलने वाला अखबार ‘अल वतन’ अपने रिपोर्ट में लिखता है कि सीरियायी सेना की टुकडियों ने उत्तरी-पशिचमी प्रांत एलेप्पो के मिलिट्री एयरपोर्ट के करीब तुर्की के 4 फार्इटर जेट पाइलटों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट के अनुसार तुर्की के पायलटों को तब गिरफ्तार किया गया, जब वो विद्रोहियों की मदद से वहां घुसने की कोशिश कर रहे थे।” रिपोर्ट में कहा गया है कि ”यह घुसपैठ सीरिया के संघर्ष में तुर्की का सीधे तौर पर जुड़े होने का प्रमाण है।”

17 दिसम्बर को राष्ट्रसंघ में सीरिया के राजदूत बशर जाफरी ने सुरक्षा परिषद और माहसचिव बान की मून को भेजे अपने खत में कहा है कि ”विद्रोही रसायनिक हथियारों का उपयोग सीरियार्इ लोगों के खिलाफ कर सकते हैं, और यह आरोप सीरिया की सरकार पर डालने की कोशिश भी कर सकते हैं।” जबकि सीरिया की सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता रसायनिक हथियारों का उपयोग किसी भी कीमत पर न करने की घोषणा के प्रति, दुहरार्इ है।

9 दिसम्बर को सीरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ‘दमिश्क सीरियायी लोगों के खिलाफ रसायनिक हथियारों का उपयोग कभी नहीं करेगा।” मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि आतंकवादी गुट इस तरह के हथियारों का सहारा ले सकते हैं।” विद्रोहियों से शहर को खाली कराने का परिणाम यह हुआ है कि 26 दिसम्बर से वहां भागे हुए लोग अपने शहर और घरों में लौटने लगे हैं। सीरिया की सेना शहर के शांति एवं सुरक्षा स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

सीरिया में रसायनिक हथियारों के उपयोग को मुददा बना कर अमेरिका सीरिया की बशर सरकार के खिलाफ हमले के लिये तर्क बना रहा है, दूसरी ओर 23 दिसम्बर को इस बात के प्रमाण सामने आये हैं कि विद्रोही रसायनिक हथियारों का दमिश्क के करीबी दारया में, सीरियायी सेना के खिलाफ, कर रहे है। सीरिया के प्रसिडेंसियल गार्ड के कमाण्डर ने जानकारी दी है कि कम से कम 7 सीरियायी सैनिक 22 दिसम्बर को रसायनिक हथियारों से हुए हमले में मारे गये हैं। इस रसायनिक हथियार से जहरीले पीले रंग की गैस निकलती है, जो सांस के जरिये शरीर के अंदर चली जाती है, और आदमी की मौत दम घुटने से हो जाती है। जिसका उपयोग अमेरिका वियतनाम युद्ध में पहले भी कर चुका है।

हाल के दिनों में अमेरिका और पशिचमी देशों के समर्थन प्राप्त विद्रोही सीरियायी सेना और सीरिया की बशर सरकार के समर्थक लोगों पर रसायनिक हथियारों के उपयोग की धमकी देते रहे हैं। उन्होंने पीने के पानी में जहर मिलाने की धमकी भी दी है। लोगों में दहशत फैलाने के लिये यू-टयूब पर कुछ विडियो भी पोस्ट किये हैं, जिसमें एक खरगोश पर जहरीले पानी का उपयोग किया जाता दिखाया गया है। जिसे पीने के बाद खरगोश सांस नहीं ले पाता और उसकी मौत हो जाती है। इस विडियो से पहले भी एक जहरीले गैस का विडियो पोस्ट किया गया था। जिसके प्रभाव से खरगोश की मौत हो जाती है।

राष्ट्रसंघ के रिपोर्ट के अनुसार ”29 देशों के विद्रोही सीरिया की बशर-अल-असद सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं। जो बशर-अल-असद को सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं।” सीरियायी विपक्ष और विद्रोही अपने को सीरिया की आम जनता की प्रवासी सरकार कहते हैं, जिन्हें दोहा सम्मेलन के बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ अपना समर्थन दे रहा है। यह बताने वाला कोर्इ नहीं है कि सीरिया की आम जनता ने यह अधिकार उन्हें कब और कैसे दिया?

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