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इण्डोनेशिया, ड्रग तस्करों के पक्ष में आॅस्ट्रेलियायी सरकार

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सरकारें यदि आतंकवादियों की तरह तस्करों और अपराधियों का समर्थन करने लगे तो ऐसी सरकारों की विश्वसनियता स्वाभाविक रूप से घट जाती है, सरकार के लिये समर्थन की सोच को लकवा मार जाता है। आज यही हो रहा है। अमेरिकी सरकार जिस तरह तीसरी दुनिया के देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिये आतंकवादियों का समर्थन कर रही है। उन्हें आर्थिक एवं कूटनीतिक सहयोग दे रही है। हथियारों की आपूर्ति कर रही है, और उन्हें प्रशिक्षित कर रही है, आॅस्ट्रेलिया की टोनी एबोट की सरकार तस्करों के लिये इण्डोनेशिया की सरकार पर दबाव बना रही है, कि वह आॅस्ट्रेलियायी ड्रग तस्करों को रिहा कर दे। 9 में से जिन 2 तस्करों को फांसी की सजा दी गयी है, वह इण्डोनेशिया की सरकार से उनके लिये क्षमा चाहती है। जिसकी वजह 2004 में आये सुनामि में दिये गये सहयोग को बना रही है।

2004 में आये भूकम्प और सुनामि में इण्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में 1,00,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी थी। उस समय आॅस्ट्रेलिया ने इण्डोनेशिया को लगभग 1 बिलियन डाॅलर का आर्थिक एवं सहायता सामग्री उपलब्ध कराया था। अब आॅस्ट्रेलिया की सरकार इस मानवीय सहयोग के एवज में ‘बाली-9‘ के नाम से चर्चित नशीली पदार्थों के तस्करों के लिये क्षमा चाहती है।

‘बाली-9‘ उन 9 लोगों का ग्रूप है, जिन्हें 17 अप्रैल 2005 को इण्डोनेशिया के बाली में 8.3 किलोग्राम हीरोइन के साथ, ‘नशीले पदार्थों की तस्करी‘ के आरोप में, गिरफ्तार किया गया था। जिसका मूल्यांकन उस समय 3 मिलियन डाॅलर था। तस्कर इण्डोनेशिया से इस पदार्थ को आॅस्ट्रेलिया ले जा रहे थें इसी महीने सजा पाये, दो अपराधी एंड्रयू चैन और म्यूरन सुकुमारन को फांसी दी जानी थी।

18 फरवरी को आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबोट ने एक प्रेस कांफ्रेन्स में जोर दे कर कहा- ‘‘यदि इण्डोनेशिया फांसी के निर्णय पर आगे बढ़ता है, तो यह हमारे लिये निराशाजनक निर्णय होगा। इस निर्णय से आॅस्ट्रेलिया अपने को नीचा महसूस करेगा।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘इण्डोनेशिया को यह नहीं भूलना चाहिये कि कुछ साल पहले जब हिंद महासागर में आये सुनामि ने इण्डोनेशिया में तबाही मचायी थी, उस समय हमने उसे 1 बिलियन डाॅलर के मूल्य की सहायता भेजी थी। हमने मानवीय सहायता के लिये अपनी सेना को भेजा था, जिसमें कई आॅस्ट्रेलियावासियों की जान भी गयी थी।

उन्होंने आगे कहा कि ‘‘मैं इण्डोनेशियावासियों से और वहां की सरकार से यह कहुंगा कि हम आॅस्ट्रेलियायी वहां आपकी सहायता करने के लिये थे, और हम उम्मीद करते हैं, कि इण्डोनेशिया उसका बदला इस समय देगा। आॅस्ट्रेलियायी प्रधानमंत्री ‘बाली-9‘ के समर्थन में बोल रहे थे। उन्होंने उन दोषी लोगों का पक्ष लेते हुए कहा- ‘‘हमें ऐसा लग रहा है, कि बाली के जेल में रहने वाले कैदियों के स्वभाव में बदलाव आ गया है, वो नशीले पदार्थों की तस्करी और अपराध के विरूद्ध लड़ने में सहयोगी बन सकते हैं। इसलिये ज्यादा अच्छा यह होगा कि हम उन्हें मारने के बजाये उन लोगों का इस तरह के अपराध के खिलाफ लड़ने में उपयोग करें।‘‘

इण्डोनेशिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरमानाथा नासिर में कहा कि ‘‘आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री विगत में दिये गये सहायता को वर्तमान के मामले से जोड़ रहे हैं।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘हम उम्मीद करते हैं, कि जो वक्तव्य दिया गया है, वह आॅस्ट्रेलियावासियों के सही भावनाओं को प्रदर्शित नहीं करता हो।‘‘ उसने आगे कहा, कि ‘‘धमकी या चेतावनी किसी भी राजनीतिक भाषा का हिस्सा नहीं है, और जितना मैं जानता हूं, ऐसे राजनीतिक धमकी का प्रभाव अच्छा नहीं पड़ता है।‘‘ इण्डोनेशिया के अधिकारियों ने 17 फरवरी को यह सूचित किया, कि इसी महीने दी जाने वाली फांसी को इस समय देना संभव नहीं है।‘‘ जिसका स्वागत आॅस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने किया।

आॅस्ट्रेलियायी विदेश मंत्री जूली बिशप ने एबीसी पर 18 फरवरी को कहा- ‘‘इण्डोनेशिया के अधिकारियों द्वारा श्री चैन और श्री सुकुमारन को फांसी देने की योजना में किया गया कोई भी स्थगन इन दोनों तथा इनके परिवारवालों के लिये राहत है।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘इससे आने वाले समय में सही समाधान निकालने का अवसर मिलेगा।‘‘ आॅस्ट्रेलियायी प्रधानमंत्री ने इण्डोनेशिया की सरकार द्वारा फांसी की सजा दिये जाने के सवाल के जवाब में कहा था, कि- ‘‘हम इस की अनदेखी नहीं करेंगे।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘हम अपने पड़ोसी और अच्छे मित्र देश के साथ अपने सम्बंधों को बिगाड़ना नहीं चाहते। मगर मुझे यह कहना पड़ रहा है, कि हम ऐसे किसी भी निर्णय की अनदेखी नहीं कर सकते।‘‘ उन्होंने इण्डोनेशिया के सामने रखे गये अपनी मांग को मुनासिब और सही कार दिया। जिसका कि कोई न्यायोचित आधार नहीं है।

आॅस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के वक्तव्य ने आम इण्डोनेशियायी लोगों को आहत और उद्वेलित कर दिया है। उन्हें एक राष्ट्रीय अपमान का एहसास हो रहा है। उन्होंने आॅस्ट्रेलिया के मुंह पर दी गयी आपदा सहायता की राशि को, दे मारने का निर्णय लिया है। यह निर्णय आम जनता की तीखी प्रतिक्रिया है, जो ‘री-पे प्रोटेस्ट‘ के रूप में व्यक्त हो रहा है। बड़ी संख्या में जमा हुए लोगो ने आॅस्ट्रेलियायी सहायता राशि का भुगतान करने के लिये सार्वजनिक पहल की।

जकार्ता और पूरे देश में आॅस्ट्रेलिया के प्रधान मंत्री के मुंह पर ‘टेप लगा कर तस्वीरें, सार्वजनिक स्थानों पर रख दी गयी हैं। जंगल में लगे आग की तरह फैली, ‘पुर्नभुगतान, विरोधी भावना इण्डोनेशिया भर में फैल गयी है। आॅस्ट्रेलियायी प्रधानमंत्री के तस्वीर के चारो ओर सिक्कों का ढूह लगा है। लोग टोनी एबोट की तुलना शेस्सपियर के ‘मर्चेन्ट आॅफ वेनिस‘ के शाॅयलाॅक से कर रहे हैं। जिसके कर्ज का भुगतान न करने पर वह ऐसे लोगों से एक पाउण्ड गोस्त की मांग करता था। 250 मिलियन आबादी वाला यह देश आॅस्ट्रेलिया के मांग के खिलाफ है। उनकी सोच है कि, यदि हम अपने जेब का खुदरा भी दे दे ंतो उक्त राशि का भुगतान हो सकता है।

22 फरवरी को हुए प्रदर्शन के दौरान एक बैनर पर लिखा था- ‘‘आॅस्ट्रेलिया वासियों को एक प्रधानमंत्री चाहिये, शाॅयलाॅक और ड्रग तस्करों के अपने नहीं।‘‘ उन्होंने ट्विटर पर भी भारी जनसमर्थन हासिल किया है। हालांकि कूटनीतिक मोर्चे पर इण्डोनेशिया की सरकार आॅस्ट्रेलिया के द्वारा दिये गये स्पष्टी करण से संतुष्ट है। 22 फरवरी के विरोध प्रदर्शन में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और पुर्न भुगतान की राशि जमा करने के अभियान को जारी रखने का निणर्य लिया।

‘‘प्रो-इण्डोनेशिया काॅलिजन‘‘ ने ‘क्वाइन फाॅर आॅस्ट्रेलिया मोमेंट‘ होटल इण्डोनेशिया के करीब के चैराहे पर आयोजित किया। उसके को-आॅर्डिनेटर एंडी शिनाॅलिंगा ने कहा- ‘‘हम अपनी गरिमा को टोनी एबोट को खरीदने नहीं देंगे।‘‘ ऐसे आयोजन पूरे देश में हो रहे हैं। आयोजकों ने जमा किये गये पैसों को आॅस्ट्रेलिया के दूतावास में देने का निर्णय किया है। एक आयोजक रिआन ने कहा- ‘‘यदि हर एक इण्डोनेशियायी एक सिक्का भी जमा करे तो कुल आबादी 250 मिलियन है, हम आॅस्ट्रेलिया द्वारा दिये गये सहायता राशि को वापस कर सकते हैं।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘हमने किसी भी देश का उपनिवेश बनना अस्वीकार कर दिया है। हम एक ऐसा देश हैं, जो दूसरे देशों को बताना चाहता है, कि वो अपने लोकतंत्र को सुरक्षित रखें, उन्हें टूटने न दें।‘‘

इण्डोनेशिया में ड्रग अपराधियों को मृत्युदण्ड देने का प्रावधान है। इसलिये माना यही जा रहा है, कि ‘बाली-9‘ को भी मृत्युदण्ड ही मिलेगा। वहां ऐसे 11 अपराधी हैं, जिन्हें न्यायालय से मृत्युदण्ड मिला है, जिनमें से 2 अपराधी आॅस्ट्रेलिया के भी हैं। जिनकी दया याचिका को इण्डोनेशिया के राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया है। जनवरी 2015 को ऐसे 6 लोगों को मृत्युदण्ड दिया जा चुका है, जिनमें 5 विदेशी हैं। मृत्युदण्ड के बारे में आम लोगों की धारणां चाहे जो हो, किंतु ड्रग तस्करों के लिये उनकी मान्यता बिल्कुल स्पष्ट है।

ट्विटर पर एक इण्डोनेशियायी ने लिखा है- ‘‘डियर टोनी एबोट अपना एक डाॅलर लो। मैं उम्मीद करता हूं कि इससे इण्डोनेशिया के बच्चों को ड्रग से बचाया जा सकेगा।‘‘

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