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सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एआईपीएफ ने जनसंसद आयोजित किया

AIPF

नई दिल्ली: 16 मार्च 2015

अखिल भारतीय लोक मंच (आॅल इंडिया पीपुल्स फोरम- एआईपीएफ) के दो दिवसीय स्थापना सम्मेलन के बाद आज जंतर-मंतर पर जन-संसद का आयोजन किया गया।

जनसंसद को किसान और आदिवासी आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण वामपंथी-समाजवादी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने संबोधित किया। जनसंसद में एआईपीएफ भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस 23 मार्च से 30 जून तक पूरे देश में भूमि अधिकार-श्रम अधिकार अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। जनस्वास्थ्य, शिक्षा समेत जनता की तमाम बुनियादी जरूरतों को लेकर भी एआईपीएफ निरंतर संघर्ष चलाएगी।

जनसंसद को संबोधित करते हुए स्तंभकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता कुलदीप नैयर ने वहां मौजूद हजारों मजदूर-किसानों, आदिवासियों और मेहनतकश महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी जमीन को उनकी मर्जी के बगैर कोई नहीं ले सकता, यह उनका लोकतांत्रिक हक है। उन्होंने कहा कि इस हक के लिए जो जरूरी लड़ाई लड़ी जाने वाली है, वे हर स्तर पर उसका साथ देंगे।

भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि मोदी सरकार ने लोगों से अच्छे दिन का वादा किया था, पर अच्छे दिन सिर्फ काॅरपोरेट और अमीरों के लिए आए हैं। सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर इस सरकार बेहद संवेदनहीन रुख रहा है और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर इसके द्वारा लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसके द्वारा पेश भूमि अर्जन अध्यादेश किसानों की जमीन हड़पने वाला अध्यादेश है। जमीन, खेत-खेती, आजीविका और खाद्य सुरक्षा सबकुछ पर यह सरकार हमला कर रही है। खाद्य सुरक्षा कानून और मनरेगा में किए गए जनविरोधी संशोधन इसकी बानगी हैं। वक्ताओं ने कहा कि जो बड़े बड़े आंदोलन हुए हैं उन्होंने यूपीए, राजद-जदयू सरकार समेत समेत तमाम दंभी सरकारों को सबक सिखाया है और अब मोदी सरकार के कंपनी राज को भी कड़ा सबक सिखाकर ही रहेगी। दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह दूसरी आजादी की लड़ाई है। जनांदोलनों की ताकतों की जो व्यापक एकता बन रही है, उसके जरिए यह लड़ाई निश्चित तौर पर जीती जाएगी।

भूमि अधिग्रहण विरोधी किसान आंदोलनों से जुड़े कृषक मुक्ति संग्राम समिति, आसाम तथा एआईपीएफ के सलाहकार समिति के सदस्य राजू बोरा, एआईपीएफ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य और पाॅस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के प्रकाश जेना, झारंखड में आदिवासी अधिकारों और जनांदोलनों की चर्चित नेता और एआईपीएफ अभियान समिति की सदस्य दयामनी बरला, एआईपीएफ अभियान समिति के सदस्य तथा मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक व किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनीलम ने जमीन पर किसानों-आदिवासियों के हक और सरकारी जमीन के वितरण के लिए पूरे देश में जोरदार आंदोलन संगठित करने का संकल्प दुहराया। सुनीलम ने कहा कि काॅरपोरेट ताकतों की मददगार पार्टियां इस देश की जनता का भला नहीं कर सकतीं, यह साबित हो चुका है। जमीनों पर कारपोरेट कब्जे की राजनीति के खिलाफ सरकारी जमीन पर भूमिहीन-मेहनतकश किसानों और खेत मजदूरों के कब्जे का आंदोलन तेज करना होगा। दयामनी बरला ने कहा कि जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ राजसत्ता पर भी जनता का अधिकार है, जिसे लड़कर लेना है। प्रकाश जेना और राजू बोरा ने कहा कि वे किसानों के लिए जो संघर्ष चला रहे हैं, उसे एआईपीएफ के अभियान से और ताकत मिलेगी।

आॅल इंडिया यूनियन आॅफ फारेस्ट वर्किंग पीपुल और एआईपीएफ अभियान समिति की सदस्य रोमा मलिक ने कहा कि किसान-मजदूरों, आदिवासियों समेत सारे आंदोलनों में महिलाओं की भागदारी रहती रही है। उन्होंने तमाम आंदोलनों के बीच अटूट एकता की जरूरत पर जोर दिया। एआईपीएफ अभियान समिति के सदस्य मु. सलीम ने कहा कि देश की संसद अरबपतियों-करोड़पतियों की प्रतिनिधि संस्था में तब्दील हो चुकी है, इसलिए देश की जनता ने उसके समानांतर अपना संसद लगाया है। उन्होंने देश में सांप्रदायिकता विरोधी बिल बनाने तथा उसमें अल्पसंख्यकों, दलितों, महिलाओं के साथ बदसलूकी और उनकी हत्याओं के लिए जिम्मेवार लोगों पर चुनाव लड़ने पर रोक लगाए जाने की प्रावधान की जरूरत पर जोर दिया।

लाल निशान पार्टी- लेनिनवादी केे राष्ट्रीय महासचिव भीमराव बंसोड ने कहा कि सांप्रदायिक और कारपोरेट हमले के खिलाफ जबर्दस्त प्रतिरोध खड़ा करना वक्त की मांग है। अखिल भारतीय खेत मजदूर सभा के अध्यक्ष और पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार का जो भूमि अर्जन अध्यादेश है, यह बड़े पैमाने पर खेत मजदूरों और ग्रामीणों की आजीविका, पोषण और कुल मिलाकर जीवन के लिए भारी संकट पैदा करेगा। एआईपीएफ इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। किरण शाहीन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पानी का अधिकार भी जनता का एक अहम सवाल है, जिस पर लड़ाई जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआईपीएफ के गठन से जनसंघर्षों के लिए एक नई सुबह की उम्मीद को बल मिला है।

एआईपीएफ के इस पहले जन-आयोजन में हजारों ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्तावों के जरिए मोदी सरकार भूमि अर्जन अध्यादेश, आजीविका और खाद्य सुरक्षा की अनदेखी करने वाले संशोधनों पर अविलंब रोक लगाने की मांग की गई। एआईपीएफ के सदस्यों और प्रबुद्ध नागरिकों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से हजारों विशेष ग्राम सभाओं द्वारा पारित इन प्रस्तावों को आज राष्ट्रपति को सौंपा गया। इन प्रस्तावों में कहा गया है कि किसानों के लंबे संघर्षों के बाद 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करके 2013 में बनाए गए कानून में भूमि अधिग्रहण के लिए लोगों की सहमति, भूमि अधिग्रहण का खाद्य सुरक्षा एवं समाज पर पड़ने वाले असर के आकलन को आवश्यक बनाया गया था, लेकिन केंद्र मोदी सरकार किसानों को हासिल हुए इन अधिकारों को नए अध्यादेश के जरिए फिर से छीन लेने पर आमादा है। मोदी सरकार का यह अध्यादेश कंपनियों और मुनाफाखोरों के फायदे के लिए लाया गया है। यह अध्यादेश देश के किसानों, मजदूरों, मछुआरों, आदिवासियों और महिलाओं तथा सार्वजनिक हित के विपरीत है। जल, जंगल, जमीन, मछली और खनिज पर नियंत्रण, उपयोग और निर्णय करने के ग्राम सभाओं के अधिकार को यह अध्यादेश

गैरसंवैधानिक तरीके से प्रभावित करता है, इसलिए ग्रामसभा इस अध्यादेश को नामंजूर करती है तथा राष्ट्रपति व लोकसभा अध्यक्ष से भू-अर्जन अध्यादेश, 2014 को अविलंब वापस लेने की मांग करती है।

विशेष ग्राम सभावों में पारित प्रस्तावों में यह कहा गया है कि केंद्र सरकार ग्रामीण गरीबों के रोजगार सृजन के मकसद से बने मनरेगा कानून में कांट-छांट की साजिश रच रही है। यह ग्रामीण गरीबों के रोजगार के अधिकार पर हमला है। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा कानून में भारी संशोधन के खतरों को चिह्नित करते हुए ऐसे कदमों पर रोक लगाने की मांग की गई है।

ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी पीसी तिवारी ने भी जनसंसद को संबोधित किया। इस मौके पर मंच पर अखिल भारतीय खेत मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, रिटायर्ड कर्नल लक्ष्मेश्वर मिश्रा, पीयूसीएल के कविता ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी तथा सचिव कविता कृष्णन, लाल निशान पार्टी- लेनिनिस्ट के राजेंद्र बाउके तथा एआईपीएफ के सलाहकार परिषद के ले. जेनरल यूएसपी सिन्हा भी मौजूद थे।

अखिल भारतीय किसान महासभा और एआईपीएफ के अभियान समिति के सदस्य राजाराम सिंह ने जनसंसद का संचालन किया।

कविता कृष्णन, सुनीलम, राजाराम सिंह, राजू बोरा द्वारा एआईपीएफ की ओर से जारी

जमीन, आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर मंडरा रहे खतरों के खिलाफ एआईपीएफ ने जोरदार संघर्ष का ऐलान किया

शहीदेआजम भगतसिंह के शहादत दिवस 23 मार्च से 30 जून तक एआईपीएफ भूमि अधिकार-श्रम अधिकार अभियान चलाएगा

भूमि अर्जन अध्यादेश, मनरेगा में कटौती तथा खाद्य सुरक्षा कानून में संशोधन के खिलाफ हजारों ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्ताव को राष्ट्रपति को सौंपा गया।

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