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इक्वाडोर में सरकार विरोधी प्रदर्शन

Ecuador Correa

लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों में राजनीतिक अस्थिरता से अमेरिकी वर्चस्व की स्थापना, अमेरिकी सरकार की स्थायी नीति रही है। वह किसी भी कीमत पर महाद्वीपीय एकजुटता और वैश्विक स्तर पर बन रहे समाजवादी विकल्प को तोड़ना चाहती है।

इक्वाडोर के राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया ने देश में हो रहे विपक्ष के प्रदर्शनों के पीछे अमेरिकी गुप्तचर इाकई सीआईए का हाथ होने की बात कहीं। उन्होंने कहा, कि ‘‘इक्वाडोर में हो रहे विपक्ष के प्रदर्शनों में अमेरिकी सेंण्ट्रल इण्टेलिजेन्स एजेन्सी की सम्बद्धता है, जिसका मकसद इक्वाडोर को अव्यवस्था के दौर में खींच कर ले जाना है।‘‘

21 मार्च को राष्ट्रपति कोरिया ने टेलेसुर टेलिविजन नेटवर्क पर कहा- ‘‘यहां (इक्वाडोर के विपक्ष में) सीआईए की मौजूदगी है जिसका मकसद देश की सरकार को कमजोर बनाना है।‘‘ राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के अनुसार- देश का विपक्ष हर संभव कोशिश कर रहा है, कि वह सरकार को होने वाले चुनाव से पहले थका दे, क्योंकि वो जानते हैं, कि मौजूदा सरकार के पास व्यापक जन समर्थन है।‘‘ इक्वाडोर की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना, उनका एकमात्र उद्देश्य है। जिस तरह के प्रदर्शन गये साल वेनेजुएला में हुए, उसी तरह के प्रदर्शनों की शुरूआत इक्वाडोर में हो गयी है।

19 मार्च को हजारों लोगों ने इक्वाडोर के 10 शहरों में, जिनमें राजधानी क्वेटो भी शामिल है, प्रदर्शन किये। उन्होंने राष्ट्रपति कोरिया के प्रति अपना असंतोष व्यक्त किया। वो नीति परिवर्तन की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने श्रम एवं भूमि सुधार को समाप्त करने की मांग की। वो उन नीतियों में परिवर्तन की मांग कर रहे थे, जिससे मजदूरों और किसानों का हित जुड़ा हुआ है।

राॅफेल कोरिया ने इक्वाडोर में हुए प्रदर्शनों के बारे में आंशका व्यक्त की, कि विपक्ष और सीआईए राष्ट्रीय स्तर पर हुए प्रदर्शनों में, एक-दूसरे क साथ मिल कर काम कर रहे हैं। 1963 में सीआईए ने इक्वाडोर में हुए सैन्य तख्तापलट का समर्थन किया था। अमेरिकी सरकार लातिनी अमेरिकी देशों में दशकों से यही करती रही है।

18 मार्च को इक्वाडोर के विदेश मंत्री रिकार्डो पटिनो ने ‘स्पूतनिक‘ पर कहा, कि ‘‘संयुक्त राज्य लातिनी अमेरिकी देशों के लिये खतरा है। वाशिंगटन को दूसरे देशों के मामले में हस्तक्षेप करने की आदत है, एक लम्बी परम्परा है।‘‘ वह दूसरे देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर ही अपने हितों को पूरा करने की नीति पर काम करता रहा है। जो काम एशिया और अफ्रीका में आतंकवादी और पेशेवर विद्रोही करते हैं, वहीं काम लातिनी अमेरिका में दक्षिण पंथी प्रतिक्रियावादी संगठन और पेशेवर प्रदर्शनकारी कर रहे हैं।

इक्वाडोर के दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी गुटों एवं विपक्षी दलों की अन्य मांग है, कि सरकार -प्राइज सेफगार्ड- की नीति को समाप्त करे। राॅफेल कोरिया की सरकार आयातित वस्तुओं पर 5 से 45 प्रतिशत टैक्स वृद्धि कर राष्ट्रीय एवं स्थानीय उत्पादन इकाईयों को संरक्षित करने की नीति पर चल रही है। जिसका सीधा सा प्रभाव यह होगा, कि विदेशी कम्पनियों के लिये इक्वाडोर का बाजार सिमटता चला जायेगा और स्थानीय एवं राष्ट्रीय इकाईयों को उस जगह को भरने का अवसर मिलेगा।

इक्वाडोर की उत्पादन इकाईयां यह मानती हैं, कि ‘प्राइज सेफगार्ड‘ से स्थानीय उत्पादकों को विकास का अवसर मिलता है। यही कारण है, कि जहां एक तरफ प्रतिक्रियावादी विपक्ष आर्थिक सुरक्षा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय उत्पादक और देश का बहुसंख्यक वर्ग राॅफेल कोरिया के नीतियों का समर्थन कर रही है।

राॅफेल कोरिया की सरकार ने हाल ही में ‘सीरिज आॅफ सेफगार्ड टैरिफ‘ की घोषणां की है। जिसे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को संरक्षित करने के उपाये के रूप में लागू किया है। यह उपाय तेल की कीमतों में आयी नाटकीय गिरावट को देखते हुए लागू किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आये तेल की कीमतों में गिरावट की वजह से कई तेल एवं तेल से उत्पादित कच्चे माल के निर्यातक देशों की अर्थव्यवस्था  प्रभावित हुई है। जिसके बारे में यह निश्चित धारणां है, कि अमेरिका सउदी अरब पर दबाव बना कर तेल की कीमतों में गिरावट कर ईरान, वेनेजुएला और रूस जैसे तेल उत्पादक देशों की अर्थव्यवस्था को तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

इक्वाडोर के पास अपनी मुद्रा नहीं है, वह अमेरिकी डाॅलर का उपयोग घरेलू बाजार में भी करता है, इसलिये उसके सामने मुद्रा का संकट है। मुद्रा बाजार में अमेरिकी डाॅलर की गिरती हुई शाख और असुरक्षा की स्थितियों से इक्वाडोर की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है।

विपक्ष ने भले ही प्रदर्शन किये, किंतु 19 मार्च को राजधानी के ‘इनडिपेन्डेन्स प्लाजा‘ मे आयोजित राष्ट्रीय व्यापार मेला में खाद्य उत्पाद, कपड़ा, ट्वाॅय और अन्य सामान के साथ, सैंकड़ों उत्पादकों ने भाग लिया। इन उत्पादों के अनुसार- हाल ही में लगभग 2800 महत्वपूर्ण सामान पर लगाये गये ‘टैरिफ सरचार्ज‘ का अच्छा लाभ स्थानीय उत्पादकों को मिलगा। वे इसे राष्ट्रीय उत्पादन को मजबूत करने का अवसर मान रहे हैं। छोटे उत्पादकों के लिये बाजार में जगह बन गयी है।

कयाम्बे के एक जूता निर्माता अल्मीकार उशीमा ने टेलेसुर इंग्लिश से कहा- ‘‘हम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग हैं, और अब हमारे द्वारा बनाया गया सामान पूरे इक्वाडोर में बेचा जा सकेगा। इस बात की संभावना भी है, कि एक दिन इसका निर्यात भी होने लगे।‘‘

इस राष्ट्रीय उत्पादन मेला के समय ही ‘काॅनफेडरेशन आॅफ इन्डिजेनस नेशनैलिटीज आॅफ इक्वाडोर‘ ने प्रदर्शन का आयोजन किया। दक्षिणपंथी विपक्षी गुटों की समान मांग थी, कि सेफगार्ड -संरक्षण- केे आधाार पर कुछ चुने हुए आयातित सामानों पर 5 से 45 प्रतिशत लगाये गये करों को समाप्त किया जाये।

captura_de_pantalla_2015-03-20_a_laxsx_15.06.24.png_1733209419सेन फ्रांसिस्को प्लाजा पर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाली कानून की विद्यार्थी मारिया मिरीव्ला मूंजो ने कहा- ‘‘मेरे विचार से ‘सेफगार्ड‘ खरीददार के स्वतंत्रता के विरूद्ध है।‘‘

प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले विपक्षी गुटों में ट्रेड़ यूनियन से ले कर वहां के मूल निवासी तथा उनके संगठन थे। उन्होंने देेश के लोकप्रिय एवं चुनी हुई सरकार को बदलने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान वहां उपस्थित एक दर्शक मारिया सांचेज रोडरिज ने कहा- ‘‘यहां जो हो रहा है, वह यह है, कि दक्षिणपंथी विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन के लिये आर्थिक सहयोग दिया है, और जो कामगर यहां हैं, उन्हें गलत जानकारी दे कर बहकाया गया है।‘‘ उन्होंने आगे कहा कि- ‘‘उदाहरण के लिये सेफगार्ड के मुद्दे को ही लें, तो यह ऐसा मुद्दा है, जोकि लोगों के लिये फायदेमद है, लेकिन लोग उसका यहां विरोध कर रहे हैं। लोगों को इस बात की सही जानकारी नहीं है, कि यह हमारे राष्ट्रीय उत्पादन को बढ़ाने के लिये है, यह हमारे राष्ट्रीय उत्पादन को बढ़ाने की स्वीकृति देता है। बजाये इसके लिये हमारे पैसे देश के बाहर जाये, यह ज्यादा अच्छा है, कि वह हमारे देश में ही रहे। ऐसा होने से हम काम के नये अवसर बना पायेंगे और उससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मदद मिलेगी।‘‘

राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के विरूद्ध हुए 19 मार्च के विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी विपक्ष सरकार की आर्थिक एवं श्रमिकों के प्रति नीति में मूलभूत परिवर्तन की मांग कर रहा था। प्रदर्शन के दौरान हिंसक वारदातों की भी खबरें हैं। अपने टेलीविजन सम्बोधन में राॅफेल कोरिया ने लोगों को बताया कि 19 माार्च को रियोबाॅम्बा शहर में हम लोग भी हमले का शिकार हुए। जब कोरिया रियोबाॅम्बा में एक लोकल हेल्थ सेंटर का उद्घाटन करने जा रहे थे। उन पर प्रदर्शनकारियों ने हिंसक हमले किये और उन्हें गंभीर क्षति पहुंचाने की कोशिश की गयी।

अपने वक्तव्य में राष्ट्रपति कोरिया ने विपक्ष के द्वारा उनकी सरकार के कार्यो के अवमूल्यन का आरोप लगाया। उन्होंने इन प्रदर्शनों को फौरी संकेत करार दिया। जो इस बात का प्रमाण है, कि इक्वाडोर की सरकार यह मान कर चल रही है, कि इक्वाडोर में भी वेनेजुएला जैसी स्थितियां बनायी जा रही हैं, जिसका मकसद समाजवादी सरकार का तख्तापलट है।

इक्वाडोर के प्रतिक्रियावादी विपक्ष के द्वारा ‘जनतत्र की बहाली‘ के नाम पर चलाये जा रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद भी ‘एसोसियेशन आॅफ पाॅलिटिकल कम्यूनिकेशन‘ द्वारा आयोजित सर्वे के अनुसार राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के लिये आम इक्वाडोरवासियों का समर्थन दर 79 प्रतिशत है।

यह सर्वे ही इस बात का प्रमाण है, कि प्रतिक्रियावादी विपक्ष के पास जनसमर्थन नहीं है। देश की आम जनता जनसमर्थक लोकतांत्रिक सरकार केे विरूद्ध अमेरिकी लोकतंत्र के पक्ष में नहीं है।

जिस तरह 1963 में अमेरिकी गुप्तचर इकाई सीआईए ने इक्वाडोर के वामपंथी राष्ट्रपति कार्लोस अरोमेन्ना मोनरोयी का सैन्य तख्तापलट किया था, क्योंकि कारलोस ने अमेरिकी नीतियों के विरूद्ध फिदेल कास्त्रो और क्यूबा के क्रांति का समर्थन किया था। ठीक उसी तरह सीआईए राॅफेल कोरिया को सत्ता से बेदखल करना चाहती है, क्योंकि राॅफेल कोरिया ने 2009 में इक्वाडोर से अमेरिकी मिलिट्री बेस को हटाया और विकीलिक्स के संस्थापक जुलियन असांजे को ब्रिटेन में अपने दूतावास में शरण दे रखा है। साल 2013 में इक्वाडोर के समाचार एजेन्सी एंडीज ने रिपोर्ट दिया था, कि सीआईए राॅफेल कोरिया की हत्या का षड़यंत्र रच रहा है।

इसके बाद भी जिस तरह विपक्ष का विरोध प्रदर्शन असफल रहा है, उसे देखते हुए राॅफेल कोरिया ने अपने ट्वीटर एकाउण्ट पर एएफपी न्यूज एजेन्सी की खबरों को चुनौती देते हुए लिखा है, कि ‘‘यदि विपक्ष का विरोध प्रदर्शन सीआईए के द्वारा आयोजित होता, तो वह इस तरह से असफल नहीं होता।‘‘ राॅफेल कोरिया का यह वक्तव्य कूटनीतिक भी हो सकता है। अमेरिकी सम्बद्धता को पूरी तरह से अस्वीकार नहीं किया जा सकता।

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