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वेनेजुएला पर लगाये गये अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ

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वेनेजुएला पर लगाये गये अमेरिकी प्रतिबंधों की जैसी प्रतिक्रिया वेेनेजुएला, लातिनी अमेरिकी देश और उनके क्षेत्रीय संगठन तथा वैश्विक स्तर पर चीन और खास कर रूस में हुई, उससे यह स्पष्ट हो गया, कि अमेरिकी नीतियों की असफलता का दौर अभी थमने को नहीं है। बराक ओबामा के खाते में न तो रिचर्ड निक्सन के द्वारा कराये गये चिली के तख्तापलट की गंदी सफलता दर्ज होगी, ना ही उनके खाते में जाॅर्ज बुश की इराक की घिनौनी सफलता ही दर्ज होनी है। लीबिया बराक ओबामा के ताबूत पर आखिरी कील है। जिसके इर्द-गिर्द अमेरिकी नीतियों को दम तोड़ना है।

10 मार्च की सुबह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने इनेब्लिंग एक्ट के उपयोग का अधिकार देने की मांग राष्ट्रीय असेम्बली से किया, ताकि अमेरिकी खतरे का सामना किया जा सकेे, और वेनेजुएला की शांति एवं स्थिरता के लिये ‘विशेष कानून‘ का निर्माण वो कर सकें। मदुरो ने ‘साम्राज्यवाद विरोधी कानून‘ को पास कराने के लिये ‘डीक्री पाॅवर‘ की मांग की।

नेशनल असेम्बली ने 11 मार्च की सुबह इसे बहुमत से पारित कर दिया। जिस समय नेशनल असेम्बली में राष्ट्रपति को विशेषाधिकार देने का प्रस्ताव पारित हो रहा था, ठीक उसी समय वेनेजुएला की आम जनता मदुरो सरकार के पक्ष में प्रदर्शन कर रही थी। 11 मार्च की सुबह अपने सम्बोधन के दौरान राष्ट्रपति मदुरो ने वेनेजुएला की ‘आर्मड फोर्स‘ को आदेश दिया कि सेना 14 मार्च को ‘डिफेन्सिव मिलिट्री एक्सरसाइज‘ करे। उन्होंने इस रक्षात्मक युद्धाभ्यास में पिपुल्स मिलिशिया और वेनेजुएला की आम जनता को हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित किया। जिनकी शुरूआत 14 मार्च को 10 दिनों के लिये हो गयी। इस सैन्य एवं जनयुद्धाभ्यास का मकसद विदेशी आक्रमण से देश की रक्षा करने की अपनी क्षमता का परीक्षण करना घोषित किया गया।

रक्षामंत्री व्लादिमीर पेड्रिनो लोपेज ने कहा, कि ‘‘यह युद्धाभ्यास किसी भी तरह के साम्राज्यवादी हमले के खिलाफ तैयारी है।‘‘ इस युद्धाभ्यास में वेनेजुएला की सेना के साथ रूस की आमंत्रित सैन्य टुकडियां भी हिस्सा लेंगी। स्वयंसेवी वेनेजुएला की मिलिशिया को भी आमंत्रित किया गया।

पहले चरण में काराकस के पास नौ सैनिक युद्धाभ्यास किया गया। जिसमें लगभग 1,00,000 लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें 20,000 वेनेजुएला के नागरिक भी शामिल थे। ज्यादातर युद्धाभ्यास काराकस के दक्षिण में हुआ। शेष युद्धाभ्यास वेनेजुएला के तेल शोधन क्षेत्र, जैसे कि कैरेबियन कोस्ट में हुए।

इस युद्धाभ्यास से पहले राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने कहा, कि ‘‘देश की रक्षा के लिये हमारे पास हमारी अपनी सेना है।‘‘ साथ ही पिपुल्स मिलिशिया और देश के नागरिकों को युद्धाभ्यास में हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित कर मदुरो ने यह संकेत भी दिया कि हमारे सामने, जनयुद्ध की अनिवार्यता भी है। यह जनयुद्ध देश की रक्षा और वेनेजुएला में चल रहे समाजवादी समाज के निर्माण का संघर्ष भी है। एक सीमा तक क्यूबा की क्रांति के समय आम लोगों में हथियारों को बांटने और उन्हें प्रशिक्षित करने की नीतियों का विस्तार भी है। यह इस सत्य से साक्षात्कार है, कि वेनेजुएला की मदुरो सरकार देश की प्रतिक्रियावादी ताकतों और महाद्वीपीय स्तर पर सक्रिय अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ आखिरी लड़ाई लड़ने की मानसिकता से संचालित हो रही है। जिसकी वैश्विक अनिवार्यता है।

मदुरो ने कहा- ‘‘वेनेजुएला को निश्चित रूप से तैयार रहना चाहिये, क्योंकि वेनेजुएला कभी भी लीबिया और इराक जैसा नहीं बन सकता।‘‘ जहां अमेरिकी नेतृत्व में नाटो सेना और बहुराष्ट्रीय सेनाओं ने हमले किये और कर्नल गद्दाफी तथा सद्दाम हुसैन का तख्तापलट किया। जनसमर्थक सरकारों के साथ जननायकों की भी हत्या की गयी। और आज इराक इस्लामिक स्टेट के आतंकी तथा लीबिया वहां की हथियारबद्ध मिलिशियायी गुटों के संघर्ष में बिखरा हुआ ऐसा देश है, जहां साम्राज्यवादी हमले भी हो रहे हैं।

वेनेजुएला के सामने अपने समुद्री सीमाओं की निगरानी करने, अपने वायु सीमाओं को सुरक्षित करने और घरेलू स्तर पर हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के जरिये राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिये भीतरघात करने वाली ताकतों से लड़ने का दायित्व है। उसके सामने महाद्वीपीय एकजुटता और वैश्विक स्तर पर बन रहे विकास के जरिये समाजवाद के विकल्पों की रक्षा की जिम्मेदारियां भी हैं। महाद्वीपीय एकजुटता और समाजवाद उसकी सुरक्षा की निश्चित व्यवस्था है।

11071607_10153231200973203_8048147076258286770_nघोषित युद्धाभ्यास में ‘एन्टी एयरडिफेन्स‘ युद्धाभ्यास भी शामिल है। वेनेजुएला के ‘एयर डिफेन्स सिस्टम‘ का मेरूदण्ड रूस में निर्मित ‘एस-300 वी एम एयर डिफेन्स सिस्टम‘ है, जोकि उसने अप्रैल 2013 में हासिल किया। यह दुनिया की सबसे उन्नत एवं प्रभावी ‘मोबाइल एयर डिफेन्स सिस्टम‘ में से एक है। जिससे मिसाइल और एयरक्राॅफ्ट को आकाश में 200 किलोमीटर तक की दूरी तक मारा जा सकता है।

वेनेजुएला की राष्ट्रीय सेना अपने ‘एयर डिफेन्स‘ और ‘एन्टी एयर क्राॅफ्ट सिस्टम‘ का भी परीक्षण करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके, कि ‘‘वो तैनात करने के लायक है, और साम्राज्यवादी हमले की स्थिति में कारगर प्रभावित होंगे।‘‘ वेनेजुएला का यह कदम साम्राज्यवादी हमले की आशंका का ही परिणाम है, कि वह अपनी सेना का पुर्ननिरिक्षण कर रहा है, नहीं तो लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों में आपसी विवादों का निपटारा वार्ताओं की मेज पर करने की नीतियां कारगर तरीके से लागू है। एक सीमा तक वहां हंथियारों के निषेध की स्थितियां हैं। और यह स्थिति समाजवादी देशों की ‘महाद्वीपीय‘ एकजुटता और क्यूबा तथा वेनेजुएला की उस पहल का परिणाम है, जिसके तहत किसी भी देश की समाज व्यवस्था की भिन्नता से ऊपर उठ कर आपसी सम्बंधो को विस्तार देने की नीति है। जिसने सामाजिक विकास योजना और क्षेत्रीय संगठनों का विस्तार किया।

‘बोलिवेरियन एलायन्स फाॅर द पिपुल्स आॅफ आॅवर अमेरिका‘ – अल्बा

‘यूनियन आॅफ साउथ अमेरिकन्स नेशन्स‘ – यूएनएएसयूआर

‘कम्युनिटी आॅफ लैटिन अमेरिकन एण्ड कैरेबियन स्टेट्स‘

जैसे महाद्वीपीय संगठन का निर्माण हुआ और जिसने अमेरिकी संगठन ‘आॅर्गनाइजेशन आॅफ अमेरिकन स्टेट्स‘ -ओएएस- के विस्तार को रोकने का काम किया है, बल्कि वैकल्पिक सगठनों का निर्माण कर महाद्वीपीय एकजुटता की भावना को बढ़ाने का सफल काम किया है। जिसमें क्यूबा और वेनेजुएला की भूमिका महत्वपूर्ण है। अमेरिकी सरकार वेनेजुएला पर इस बात का दबाव बना रही है, कि वह अमेरिकी हितों से संचालित हो। यह सच है, कि वेनेजुएला में यदि अमेरिका समर्थित प्रतिक्रियावादी ताकतों केे द्वारा तख्तापलट की कार्यवाही हो जाती है, तो पूरे महाद्वीप की एकता, समाजवादी विकास योजनाओ से जुड़ती महाद्वीप की आम जनता और वैश्विक स्तर पर विकास के जरिये समाजवाद और बहुध्रुवी विश्व की अवधारणां को गहरा आधात लगेगा।

यही कारण है, कि ओबामा केे द्वारा नये प्रतिबंधों की तीखी प्रतिक्रिया बहुध्रुवी विश्व की अवधारणां से संचालित देशों और लातिनी अमेरिका महाद्वीप में वेनेजुएला के पक्ष में हुई है। वेनेजुएला की सुरक्षा महाद्वीपीय मसला बन गया है।

14 मार्च को ‘यूनियन आॅफ साउथ अमेरिकन नेशन्स‘ ने वाशिंगटन के कदमो की निंदा की। सदस्य देशों की आवश्य बैठक में संगठन के सेक्रेटरी जनरल अर्नेस्टो सेम्पर ने कहा- ‘‘इस संगठन का उद्देश्य लातिनी अमेरिका में लोकतंत्र और शांति की रक्षा करना है।‘‘ उन्होंने स्पष्ट किया, कि ‘‘जिन सिद्धांतों की वजह से ‘यूनियन आॅफ साउथ अमेरिकन नेशन्स‘ अस्तित्व में आया वह है- इस क्षेत्र को शांति का क्षेत्र बनाना, लोकतंत्र को मजबूत करना और मानवाधिकार को सुनिश्चित करना।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘ये वो तीन बिंदू हैं, जिस पर हम काम कर रहे हैं, और आगे भी करते रहेंगे।‘‘

12 दक्षिण अमेरिकी देशों के इस संगठन के विदेश मंत्रियों की यह बैठक अमेरिका के द्वारा वेनेजुएला पर लगाये गये नये प्रतिबंधों पर चर्चा के लिये आयोजित की गयी थी।

क्यूबा से सम्बंध सुधारने की जो कूटनीतिक पहल अमेरिका के द्वारा की गयी थी, वेनेजुएला के लिये उसकी नीतियों ने उन्हें एक ऐसी चालबाजी के मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां उसकी विश्वसनियता पहले से ज्यादा घट गयी। राष्ट्रसंघ में निकारागुआ की प्रतिनिधि मारिया रूबियालेस ने सभी लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों से अपील की, कि ‘‘वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका के अस्वीकार किये जाने वाले इस आक्रामक रवैये की निंदा करें।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘इस क्षेत्र में हम अपने ही जैसे लोकतंत्र के खिलाफ, किसी को भी हमले की इजाजत नहीं दे सकते, क्योंकि आज उनके सामने वेनेजुएला है, कल कोई और हो सकता है, जैसा कि साम्राज्यवाद का इतिहास रहा है।‘‘ निकारागुआ ने सभी अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और क्षेत्रीय संगठनों से अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के द्वारा वेनेजुएला को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा‘ बता कर पैदा किये गये तनाव और चेतावनी की निंदा करने की अपील की।

रूबियालेस ने कहा- ‘‘ओबामा के द्वारा वेनेजुएल को अमेरिका के लिये अस्वाभाविक और अतिरिक्त खतरा घोषित करना बेतुका और अस्वाभाविक है।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘यह बात सारी दुनिया जानती है, कि राज्य की सम्प्रभुसत्ता और लोगों के लिये एकमात्र वास्तविक खतरा साम्राज्यवाद है। जिसका नेतृत्व उत्तरी अमेरिकी सरकार कर रही है। जिसके खिलाफ हम अपना संघर्ष जारी रखेंगे।‘‘

11 अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के संगठन -‘बोलिवेरियन एलाॅयन्स फाॅर द पिपुल्स आॅफ अवर अमेरिका‘- अल्बा ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ उत्पन्न स्थिति पर चर्चा करने के लिये 17 मार्च को एक बैठक बुलाई। इस बैठक में ‘संयुक्त वक्तव्य‘ भी जारी किया गया। अल्बा देशों ने अपने संयुक्त वक्तव्य में अमेरिकी सरकार के इस कदम की निंदा करते हुए उसे अन्याय एवं पक्षपातपूर्ण करार दिया। दूसरे देशों के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप की धमकी की भी निंदा की गयी।

संयुक्त वक्तव्य में कहा गया है, कि ‘‘वेनेजुएला किसी भी देश के लिये खतरा नही है।‘‘ उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका से मांग की, कि ‘‘वह वेनेजुएला की सरकार और वेनेजुएला की आम जनता के खिलाफ अपने आक्रामक एवं अन्यायपूर्ण, थकाने वाली नीतियों को तत्काल बंद करे।‘‘ क्योंकि अल्बा यह मानता है, कि ‘‘इससे अस्थिरता बढ़ेगी और वेनेजुएला के विपक्षी खेमों के द्वारा हिंसा की वारदातों को (उनके हिंसक प्रदर्शनों को) बढ़ावा मिलेगा।‘‘ वक्तव्य में ‘संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान‘ की पेशकश के साथ अमेरिका से कहा गया है, कि ‘‘वह अंतर्राष्ट्रीय सिद्धांत और राष्ट्रसंघ के चार्टर की सीमा में रह कर काम करे।‘‘ एकतरफा प्रतिबंधों की कार्यवाही को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघ करार दिया गया।

अमेरिकी सरकार से यह मांग की गयी कि ‘‘वह वेनेजुएला की बोलिवेरियन सरकार के साथ संघर्ष और विरोध की नीति को छोड़ कर उसकी सम्प्रभुसत्ता और स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए, उससे बातचीत करे। वक्तव्य में दक्षिण अमेरिका एवं कैरेबियन देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्रीय संगठनों से भी अपील की गयी है, कि वो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने में सहयोग दे, ताकि दोनों के बीच के तनाव को घटाया जा सके और समस्याओं का शांतिपूर्ण समाधान निकालना संभव हो सके।

अल्बा देशों के इस सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने कहा- ‘‘संयुक्त राज्य अमेरिका वेनेजुएला पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, और वह इस क्षेत्र के अन्य सम्प्रभुसत्ता सम्पन्न देशों के साथ भी ऐसा ही करना जारी रखेगा।‘‘ निकोलस मदुरो ने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शाॅवेज के वक्तव्य को दोहराया कि ‘‘21वीं सदी हमारी सदी होगी- उद्धार और मुक्ति की सदी होगी।‘‘

बोलेविया के राष्ट्रपति इवो मोरालिस ने कहा- ‘‘अमेरिकी सरकार इस क्षेत्र को गलत दिशा देने की कोशिश कर रही है।‘‘ उन्होंने साफ किया कि ‘‘अमेरिकी सरकार न तो राजनीतिक रूप से हमें पराजित कर सकी, ना ही आर्थिक रूप से पराजित करना संभव हो सका, और न ही सैन्य तख्तापलट की नीतियों से हमें हरा सकी, इस लिये अब वह हमें गलत दिशा देने की कोशिश कर रही है।‘‘ उन्होंने खुले रूप में बराक ओबामा से कहा- ‘‘अमेरिकी सरकार को समझ लेना चाहिये कि हम अतीत में साम्राज्यवादी समय में, नहीं जी रहे हैं। बराक ओबामा को यह जानना ही चाहिये कि वो गलत हैं।‘‘ उन्होंने अमेरिकी सरकार के द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघ का जिक्र किया।

क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो ने कहा- ‘‘तथ्य यह प्रमाणित करते हैं, कि इतिहास की अनदेखी नहीं की जा सकती। हम इस बात को अच्छी तरह जानते हैं, कि दशकों इस क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका ने घृणित सैन्य तानाशाही और उसके आतंकवाद को अपना समर्थन दिया है।‘‘ अमेरिकी सरकर की नीतियों के बारे में उन्होंने कहा- ‘‘अमेरिका की नीतियों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। उद्देश्य वही है, मगर उन्होंने अपना तरीका बदल दिया है।‘‘ राउल कास्त्रो ने कहा- ‘‘इस क्षेत्र को शांति चाहिये। हमें शांति और स्थिरता की जरूरत है, लेकिन पूरे आत्म सम्मान के साथ। हम घुटनों के बल खड़े हो कर क्षेत्रीय शांति और सम्मान की रक्षा नहीं कर सकते।‘‘ उन्होंने अपने भावों से व्यक्त किया कि हमें ऐसी शांति नहीं चाहिये।

सेंट विन्सेन्ट एण्ड ग्रेनेडियन्स के राष्ट्रपति राल्फ गोंसल्विस ने कहा- ‘‘अमेरिका का शासनात्मक आदेश हम सभी के लिये खतरा है।‘‘

निकारागुआ के राष्ट्रपति डेनियल ओरटेगा ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए हुण्डुरास और पराग्वे के तख्तापलट तथा बोलेविया और इक्वाडोर में तख्तापलट की कोशिशों का उल्लेख करते हुए कहा, कि ‘‘ओबामा के सत्त में रहने के दौरान ही यह हुआ।‘‘ ओरटेगा ने वैश्विक सुरक्षा के लिये अमेरिका को खतरा बताया।

इक्वाडोर के विदेशमंत्री ने कहा- ‘‘संयुक्त राष्ट्र हमें मानवाधिकार के बारे में क्या सिखाना चाहता है? जो बच्चों और अवयस्क किशोरों पर आजीवन कारावास की सजा थोपता है।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘अमेरिका एक ऐसा देश है, जिसने लोगों को शारीरिक एवं मानसिक यातना देने को वैधानिक बनाया है और सबसे बड़े सर्विलांस सिस्टम को विकसित किया है।‘‘ उन्होंने खुले तौर पर कहा है, कि ‘‘यदि वेनेजुएला अमेरिकी सुरक्षा के लिये खतरा है, तो हममें से कोई भी देश अमेरिका के लिये खतरा हो सकता है।‘‘ उन्होंने अपील की, कि ‘‘विश्व समुदाय लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों के इस क्षेत्र का सम्मान शांति के क्षेत्र के रूप में करे।‘‘

अल्बा देशों के सम्मेलन से वापसी के दौरान निकारागुआ के विदेश मंत्री ने काराकस में, लातिनी अमेरिकी देशों के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक विकास की सही दिशा का उल्लेख करते हुए, उसे बनाये रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा- ‘‘हमें इसे बनाये रखना है।‘‘

जिसे बनाये रखना वास्तव में आसान नहीं है,क्योंकि अमेरिकी साम्राज्यवाद अपने से असहमत देशों की आर्थिक एवं सामाजिक विकास की दिशा को बदलने और उसकी राजनीतिक संरचना को तोड़ने की स्थायी नीतियों से संचालित होता रहा है। एशिया में जिस तरह इराक के बाद ईरान और सीरिया निशाने पर है, और जिस तरह अफ्रीका में लीबिया को निशाना बनाया गया, लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों में कई देशों के अलावा वेनेजुएला उसके निशाने पर है।

12 मार्च को रूस के विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी करके अमेरिकी सरकार पर वेनेजुएला की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने के लिये उस पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। स्पेन की न्यूज एजेन्सी ईएफई के अनुसार- मास्को ने चेतावनी दी है, कि ‘‘लातिनी अमेरिकी देशों की अस्थिरता अमेरिकी सरकार की स्थायी नीति रही है।‘‘ वक्तव्य में कहा गया है, कि ‘‘यह वेनेजुएला के साथ उस क्षेत्र के देशों के लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा है।‘‘ विदेश मंत्रालय ने अपने जारी वक्तव्य में कहा है, कि ‘‘हम इस बात से चिंतित है कि वेनेजुएला केे खिलाफ हो रहे दुषप्रचार और अस्थिरता के लिये जारी संघर्षों में बढ़ोत्तरी हुई है।‘‘ वक्तव्य में यह स्पष्ट कर दिया है, कि ‘‘वेनेजुएला रूस का करीबी मित्र देश है और दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक सम्बंध है।‘‘

रूस केे द्वारा जारी वक्तव्य का सीधा सा मतलब है, कि ‘‘वेनेजुएला के खिलाफ हो रहे आर्थिक एवं राजनीतिक हमलों के बीच यदि सामरिक हंस्तक्षेप होता है, तो रूस तटस्थ नहीं रहेगा।‘‘ वैसे भी रूस और चीन लातिनी अमेरिकी देशों के आर्थिक विकास और सामरिक सुरक्षा के लिये कड़े महत्वपूर्ण कदम उठा चुके हैं। बराक ओबामा को निश्चित रूप से यह जान लेना चाहिये कि वेनेजुएला की सुरक्षा लातिनी अमेरिकी देशों की महाद्वीपीय एकजुटता और रूस तथा चीन के सामरिक एवं आर्थिक सहयोग एवं वैकल्पिक विश्व की व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। जिसमें वेनेजुएला और महाद्वीप की आम जनता की सक्रीय हिस्सेदारी है। वेनेजुएला ने भी कई महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम उठाये हैं।

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