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अमेरिकी प्रतिबंधों के खिलाफ वेनेजुएला

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वेनेजुएला पर लगाये गय नये अमेरिकी प्रतिबंधों की जैसी तीखी प्रतिक्रिया लातिनी अमेरिकी देशों, और महाद्वीप से बाहर के रूस और चीन जैसे देशों में हुई, बराक ओबामा को उसकी उम्मीद नहीं थी। वेनेजुएला की मदुरो सरकार ने भी ‘बाहरी युद्ध‘ से अपनी सुरक्षा के लिये सैन्य एवं जन युद्धाभ्यास किया, जिसमें रूस की सैन्य टुकडियों ने भी हिस्सा लिया। जो इस बात का प्रमाण है, कि वेनेजुएला किसी भी विषम से विषम स्थिति में भी अकेला नहीं। उसे इराक और लीबिया बनाने या गृहयुद्ध के जाल में सीरिया बनाने की अमेरिकी नीति, सफल नहीं होगी। बराक ओबामा लातिनी अमेरिकी देशों में, अपनी असफलता के और भी करीब पहुंच गये है।

अमेरिकी सरकार का जनविरोधी होना, इस रूप में भी खुले आम है, कि उसकी नीतियों की वजह से, सामाजिक विकास योजनाओं के जरिये ‘अपने देश एवं महाद्वीप की आम जनता‘ के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की नीतियों के लिये, मुश्किलें बढ़ रही हैं। भूख, गरीबी, अशिक्षा, अस्वास्थ्य और अभावों से लड़ने की नीतियां बाधित हो रही हैं। ऐसे आर्थिक और राजनीतिक हमले हो रहे हैं, कि समाज के विकास की समाजवादी दिशा बदल जाये, उनके सामने इतनी मुश्किलें आयें, कि सरकार और आम लोगों के बीच की दूरियां बढ़ जायें। ‘स्ट्रीट गर्वमेंट‘ को उन वैधानिक एवं राजनीतिक इकाईयों की ओर वापस होना पड़े, जहां सरकार के होने का मतलब देश की जनता पर शासन करना है, राजमहलों में लौटना है, व्हाईट हाउस और कांग्रेस बनना है। कम्युनों को स्थगित करके सरकार के हाथ में हंथौड़ा थमाना है, कि ‘‘विरोध के स्वर को हम कुचल कर रख देंगे।‘‘

सेना को बढ़ाने और हंथियारों को खरीदने के लिये बाध्यता पैदा करना, अमेरिकी नीति है।

वेनेजुएला में ऐसी विवशता पैदा की जा रही है। आर्थिक हमलों के साथ राजनीतिक अस्थिरता पैदा की जा रही है।

किंतु, वेनेजुएला की शाॅवेजवादी मदुरो सरकार ने सेना को विश्वास मे लेने, उसे चुस्त-दुरूस्त करने के अलावा संवैधानिक इकाईयों को मजबूत करने और हर क्षेत्र में आम जनता की हिस्सेदारी को बढ़ाने का निर्णय लिया है। उसने महाद्वीपीय एकजुटता को तरजीह दी है, और बहुध्रुवी विश्व की अवधारणां से संचालित रूस एवं चीन से अपने आर्थिक, राजनीतिक एवं सामरिक सुरक्षा की नीतियों को नया रूप दे दिया है।

इसके बाद भी यदि बराक ओबामा व्हाईट हाउस के पिछवाड़े जा कर वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप की नीति के तहत खुद पर गोली चलाते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी। चीन वेनेजुएला की आर्थिक सुरक्षा और रूस कूटनीतिक एवं सामरिक सुरक्षा की पहल कर चुका है। विश्व बैंक के आंकड़़ों के अनुसार- –2008 से 2012 के बीच वेनेजुएला अपनी सेना पर, अपने जीडीपी का 1 प्रतिशत खर्च करता है।‘‘ जबकि अमेरिका अपने कई गुणा बड़े जीडीपी का 4 प्रतिशत से ज्यादा खर्च करता है, और वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता फैलाने में उसका सहयोगी, कोलम्बिया अपने जीडीपी का 3 प्रतिशत खर्च अपनी सेना पर करता है, जिसकी सीमा वेनेजुएला से लगती है।

अमेरिकी योजना के अनुसार यदि वेनेजुएला का संकट बढ़ता है, तो सीरिया के संकट में जैसी सम्बद्धता तुर्की की है, वैसी ही सम्बद्धता कोलम्बिया की होगी। जिसकी राजनीतिक असहमति वेनेजुएला से है, और वह मदुरो सरकार के खिलाफ भी है।

शाॅवेज के असामयिक निधन के बाद से साम्राज्यवादी ताकतों की सक्रियता बढ़ गयी है। वेनेजुएला की वित्त व्यवस्था को तोड़ने के लिये मुद्रा की तस्करी और अंतर्राष्ट्रीय बाजार मे तेेल की कीमतों में की गयी गिरावट, राजनीतिक अस्थिरता बढ़ाने के लिये हिंसक प्रदर्शन और अब वेनेजुएला को अमेरिकी सुरक्षा के लिये खतरा बता कर सैन्य हंस्तक्षेप की पृष्टभूमि का निर्माण किया जा रहा है।

साम्राज्यवादी हमले के खिलाफ शांति एवं स्थिरता के लिये राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने नेशनल असेम्बली से विशेष अधिकारों की मांग की थी। 15 मार्च को एक आपात बैठक में वेनेजुएला की संसद ने राष्ट्रपति को ‘डिक्री पाॅवर‘ की स्वीकृति दे दी। प्रस्ताव के पक्ष में 60 प्रतिशत वोट पड़े। नेशनल असेम्बली के अध्यक्ष डिओसडाडो कैबेलो ने कहा- ‘‘राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को नेशनल असेम्बली वेनेजुएला की शांति एवं सुरक्षा के लिये कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों को अपने हाथ में लेने का अधिकार देती है। इस अध्यादेश का शीर्षक ‘‘एटी इम्प्रलिस्ट अनेब्लिंग लाॅ फाॅर पीस‘‘ है। यह विशेषाधिकार 9 महीने के लिये राष्ट्रपति को सौंपा गया है।

राष्ट्रपति मदुरो ने काराकस में सरकार समर्थक रैली को सम्बोधित करते हुए दुनिया भर के लोगों और सरकारों के समर्थन के लिये आभार व्यक्त किया और इसे वेनेजुएला की सम्प्रभुसत्ता की रक्षा की दृष्टि में बड़ी जीत करार दिया।

7c0014e2346bf58f91ec1f9d8eea6fb8679bf34fवेनेजुएला मेड्रिड-स्पेन में किये गये ‘एक्सपो‘ की तरह ही -जोकि काफी सफल रहा- वाशिंगटन में एक ‘एक्सपो‘ का आयोजन कर रहा है। जिसे वेनेजुएला विरोधी मीडिया वेनेजुएला के बारे में दुष प्रचार कर रही है। राष्ट्रपति मदुरो ने कहा, कि ‘‘हो सकता है, कि वाशिंगटन में होने वाले व्यापार-प्रदर्शनी में मैं अपने देश की ओर से जाऊं, और वाशिंगटन की सरकार को यह बताऊं कि वह बड़ी भूल कर रही है।‘‘

अमेरिकी सरकार पर वेनेजुएला के बारे में उसकी नीति के विरोध भरे दबाव को देखते हुए अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कि ‘‘ओबामा सरकार निकोलस मदुरो को असंवैधानिक तरीके से सत्ता से हटाने के लिये कोई भी काम नहीं कर रही है।‘‘ जबकि अमेरिकी सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त ‘नेशनल इण्डोमेण्ट फाॅर डेमोक्रेसी‘ के एक उच्च अधिकारी को वेनेजुएला मे वहां के दक्षिणपंथी प्रतिक्रियावादी विपक्ष के महत्वपूर्ण लोगों के साथ गुप्त रूप से बैठक करते हुए पाया गया।

गेलेन ग्रीनवाॅल्ड -जनरलिस्ट- जिन्होंने स्नोडेन द्वारा उपलब्ध कराये गये दस्तावेजों को पहली बार प्रकाशित किया -ने कहा है, कि ‘‘वेनेजुएला उन चंद देशों में से एक है, जिनके पास काफी मात्रा में तेल का भण्डार है, और वह अमेरिकी सरकार के प्रति समर्पित नहीं है।‘‘ उन्होंने आगे कहा, कि ‘‘इस तरह के देश अमेरिकी सरकार और मीडिया के उस सूचि में रहते हैं, जिन्हें अमेरिका अपने लिये, अपनी सुरक्षा के लिये खतरा समझता है।‘‘ जिसके खिलाफ दुष-प्रचार, हस्तक्षेप, अमेरिकी नीति रही है। जिसमंे यूरोपीय संघ और उसके सहयोगी देशों की हिस्सेदारी होती है। लोकतंत्र और मानवाधिकार के हनन को उन्होंने अपना हथियार बना लिया है।

12 मार्च को यूरोपीय संघ की संसद ने वेनेजुएला से कहा कि ‘‘वह अपने देश के विपक्ष के लोगों को तत्काल रिहा करे।‘‘ जिन्हें वो ‘मनमाने ढंग से हिरासत में लेना‘ करार देते हैं। यूरोपीय पार्लियामेण्ट मे यह प्रस्ताव 384 केे मुकाबले 17 मतों से पारित किया गया। जिसमें कहा गया है, कि ‘‘वेनेजुएला की सरकार विपक्ष के दमन की कार्यवाही को समाप्त करे।‘‘ वो मानते हैं, कि ‘‘वेनेजुएला में विपक्ष का प्रदर्शन शांतिपूर्ण और संवैधानिक रहा है।‘‘ जबकि विपक्ष  अपने हिंसक प्रदर्शनों के द्वारा वेनेजुएला की चुनी गयी सरकार को सत्ता से बेदखल करने का षडयंत्र रचती रही है। सैन्य तख्तापलट की योजना का खुलासा पिछले महीने ही हुआ है।

जिन लोगों के रिहाई की मांग अमेरिकी सरकार और यूरोपीय संघ की संसद कर रही है, उन पर गंभीर अपराधिक एवं देशद्रोह का आरोप है, और उन पर न्यायिक कार्यवाहियां चल रही हैं। मदुरो सरकर ने यह स्पष्ट कर दिया है, कि ऐसी मांगों का कोई मतलब नहीं है।

वेनेजुएला की मदुरो सरकार ने अमेरिका और अपने देश में आमेरिका के राजनीतिक दूतावास -जो विपक्ष का अघोषित निर्देशक केंद्र है- के विरूद्ध आवश्यक कदम उठा चुकी है। वेनेजुएला की विदेशमंत्री डेल्सी रोडरिज ने 2 मार्च को कहा कि ‘‘काराकस में मौजूद अमेरिकी दूतावास में काम करने वालों की संख्या घटा कर वाशिंगटन 17 करे।‘‘ उन्होंने 15 दिन की समय सीमा भी निर्धारित कर दिया। वेनेजुएला के अमेरिकी दूतावास में 100 अमेरिकी अधिकारी कार्यरत हैं। जबकि वाशिंगटन में वेनेजुएला के दूतावास में 17 प्रतिनिघी हैं। वेनेजुएला ने अमेरिकी सरकार से दूतावास में पदस्थ अधिकारियों के ‘रेंक‘ की भी जानकारी मांगी है।‘‘

रोड़रिज का यह वक्तव्य 28 फरवरी को राष्ट्रपति मदुरो के द्वारा जारी आदेश के बाद आया। जिस दिन अमेरिकी हंस्तक्षेप की आशंका को देखते हुए मदुरो सराकन ने 4 कदम उठाये। रोडरिज ने स्पष्ट किया कि ‘‘इस कदम से अमेरिका के आक्रामक कदम को रोका जा सकेगा।‘‘ उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘संयुक्त राज्य के राजनीतिज्ञों को वेनेजुएला में रहने के लिये फिर से ‘विजा‘ के लिये आवेदन देना होगा।

28 फरवरी को सरकार समर्थक रैली को सम्बोधित करते हुए मदुरो ने कहा था, कि ‘‘यह कदम उठाना जरूरी था, क्योंकि दो सप्ताह पहले असफल तख्तापलट के षडयंत्रों की जांच के दौरान यह बात सामने आई है, कि इस योजना में अमेरिकी दूतावास के अधिकारी भी शामिल थे।‘‘ उन्होंने अमेरिकी जासूस के पकड़े जाने की भी जानकारी दी।

उठाये गये इस कदम के तहत, अमेरिकी दूतावास के लिये यह जरूरी होगा, कि वह वेनेजुएला के समाज के विभिन्न क्षेत्रों में किसी के साथ बैठकें आयोजित करने की जानकरी -राजनीतिक दूतावास- वेनेजुएला की सरकार को दे। जिसका मकसद वेनेजुएला के दक्षिणपंथी विपक्ष को मिल रहे आर्थिक एवं कूटनीतिक समर्थन को रोकना है। जो वास्तव में देश में अस्थिरता पैदा करने के लिये चलाया जाने वाला अभियान है।

उठाये गये तीसरे कदम के रूप में, अब वेनेजुएला की यात्रा के लिये ‘विजा‘ के लिये डाॅलर में उतना ही भुगतान करना होगा, जितना वेनेजुएला के लोगों को अमेरिकी ‘यात्रा विजा‘ के लिये देना पड़ता है।

चैथे कदम के रूप में कहा गया है, कि ‘‘ऐसे अमेरिकी अधिकारियों की सूचि बनायी जायेगी, जिनका वेनेजुएला में आना निषिद्ध होगा। सरकार के आधार पर जो मानवाधिकार के हनन तथा हिंसक घटनाओं में सम्बद्ध हैं।‘‘

मदुरो ने स्पष्ट किया कि ‘‘हम उन लोगों को वेनेजुएला में आने का विजा नहीं देंगे जिन्होंने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है, और जिन्होंने इराक, सीरिया और वियतनाम पर हमला किया है।‘‘ मदुरो ने कहा कि ‘‘इस आतंकवाद विरोधी सूचि में प्रमुख रूप से पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जाॅर्ज डब्ल्यू बुश, डिक चैनी, सीआईए के पूर्व डायरेक्टर जाॅर्ज टेनेट अमेरिकी कांग्रेस के कई प्रमुख लोग भी शामिल हैं, जो आतंकवादी होने की वजह से वेनेजुएला में नहीं आ सकते हैं।‘‘

राष्ट्रपति मदुरो ने यह वक्तव्य ‘काराकाजो‘ के 26वीं एनवरसरी के मौके पर कहा। काराकाजो की वारदात के बाद ही, 26 साल पहले शाॅवेज के लिये जनसमर्थन का आधार बना और वेनेजुएला की आम जनता ने सक्रिय संघर्ष किया। जो उस समय की अमेरिका समर्थित सरकार और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की नीतियों के खिलाफ उठ खड़ा हुआ था। जिसे कुचलने के लिये वेनेजुएला की तत्कालीन सरकार ने ‘ओपेन फायरिंग‘ का आदेश दिया था। जिसमें 3000 से ज्यादा लोग मारे गये थे।

वेनेजुएला की सफलता इस बात पर निर्भर करती है, कि अमेरिकी प्रतिरोध और प्रतिक्रियावादी हमलों के बीच वह अपनी सामाजिक विकास योजनाओं और समाजवादी सरकार को सुरक्षित करने के लिये निर्णायक संघर्षों को किस अंजाम तक पहुंचाती हैं उसके सामने संघर्ष और निर्माण के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।

वैसे वेनेजुएला को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा‘ घोषित करके बराक ओबामा ने लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों में अमेरिकी विरोध को मुद्दे देने की गलती की है। जिसे सुधारने के लिये व्हाईट हाउस के अधिकारी ने कहा, कि ‘‘वेनेजुएला अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये, खतरा पैदा नहीं करता है।‘‘ 7 अप्रैल को दिये गये इस वक्तव्य की सबसे बड़ी वजह अगले सप्ताह ओबामा की लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की यात्रा और पनामा में होने वाली -‘समिट आॅफ अमेरिकाज़‘ की बैठक है, जिसमें ओबामा को शामिल होना है। यह वक्तव्य ऐसे समय में, और इस रूप में जारी किया गया है, जिससे अमेरिकी नीतियों में सुधार नहीं, गल्तियों का पता चलता है।

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