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लडकियां ही पीढि़यों की गोद होती हैं

”भारत में शराब पीना बुरी बात है।”

”अमेरिका में?”

”राजनीतिक दलों के बारे में कहा जाता है कि ‘दो बोतल में एक ही शराब है।’ ”

”मतलब?”

आप चाहे जिस बोतल की शराब पीयें, अमेरिका में कोर्इ बात नहीं, मगर भारत में बुरी बात है।

”यह तो बुरी बात है।”

”क्या?”

उन्होंने मेरे छोटे से सवाल को पटरी पर आने नहीं दिया। मुझे ही लार्इन मारना पड़ा-

”बोतल में एक ही शराब का होना, या भारत में अमेरिका का होना?”

उन्होंने कहा- ”भारत में अमेरिका का होना।”

”और दो बोतल में एक ही शराब का होना?” मैंने पूछा।

”वह भी बुरी बात है।” उन्हें कहना पड़ा।

उन्हें लगा मैं भारत में वालमार्ट के ‘लाबिंग’ के बारे में अब बकवास करूंगा। उनका लगना गलत नहीं था, मैं रिटेल में एफडीआर्इ से लेकर लाबिंग की बात ही करना चाहता था, नौटंकी और सदन का जिक्र करना चाहता था।

”तो आप संसद में सामूहिक दुराचार क्यों करते हैं?” मैंने पूछा।

दुराचार के नाम पर हमारे बीच दिल्ली गैंग रेप घुस आया। सरकार की मेहरबानियां घुस आयीं। सर्दी में पानी की बौछार, डण्डे की मार और आंखों में पानी घुस आया। सरकारी खर्च पर लोगों की धुलार्इ का प्रोग्राम घुस आया। ”वी वाण्ट जसिटस” के पीछे-पीछे ”वोट फार जसिटस” घुस आया। नौजवान न्याय मांग रहे थे, प्रधानमंत्री जी भजन-कीर्तन का प्रोग्राम बांट रहे थे कि ”पीडिता के लिये प्रार्थना करें।”

दिल्ली आउट आफ कण्ट्रोल हो गयी, और दिल बेकाबू कि- ”एक लड़की के लिये इतना बवाल?”

वो भड़के- ”अरे कोर्इ मिलना नहीं चाहता तो आप जर्बदस्ती मिलेंगे? मिलेंगे कैसे?”

उन्होंने सवाल नहीं किया था, सवाल के अंदाज में धमकी दी थी। मगर, हमने सवाल समझने की समझदारी दिखार्इ और कहा-

”हाथ जोड़ कर मिलेंगे। हाथ मिला कर मिलेंगे। इजाजत देंगे तो गले भी मिलेंगे।” लगे हाथ हमने यह जोड़ दिया कि ”आप जैसे मिलेंगे। हम आपसे वैसे ही मिलेंगे।”

फिर क्या था, लोग हंस दिये, हम शेर हो गये। घमासान शुरू हो गया। रायसीना हिल्स, नार्थ ब्लाक, साउथ ब्लाक, इणिडया गेट से लेकर खुलेद्वार तक घमासान होने लगा। कुछ ऐसा भी होने लगा जिसकी हमे उम्मीद नहीं थी।

वो नाराज लोगों में एक आदमी का चेहरा ढूंढ रहे थे जिसका वो स्वागत-सत्कार कर सकें। जो नहीं मिला तो, विरोध को जायज मगर तरीके को नाजायज बता कर बड़े-बड़े नामों को पटक कर, लगे हमारा कचूमर निकालने।

-”आप बराक ओबामा हैं?”

-”नहीं!”

-”सोनिया गांधी हैं?”

-”नहीं!”

-”मनमोहन सिंह हैं?”

-”नहीं!”

”तो आप क्या हैं कि नौटंकी कर रहे हैं?”

उन्होंने दो बोतल में एक शराब और भारत में अमेरिका के होने को एक साथ गटक लिया।

हमने ध्वस्त होते-होते एक सवाल किया- ”नौटंकी करने के लिये यह सब होना जरूरी हैं?”

उन्होंने कहा कुछ नहीं, बस पिचक गये।

उनकी समझ में नहीं आया कि ”लड़कियां ही पीढि़यों की गोद होती हैं।”

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