Home / विश्व परिदृश्य / उत्तरी अमेरिका / अपने ही प्रतिबंधों के विरूद्ध अमेरिकी घोषणां – वेनेजुएला राष्ट्रीय खतरा नहीं

अपने ही प्रतिबंधों के विरूद्ध अमेरिकी घोषणां – वेनेजुएला राष्ट्रीय खतरा नहीं

obama0.jpg_1718483346

वेनेजुएला के मामले में ओबामा सरकार अपनी मुश्किलें बढ़ा कर, उन्हें घटाने का काम कर रही है।

9 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने शासनात्मक अधिकार का उपयोग कर वेनेजुएला को अमेरिका के लिये असाधारण खतरा घोषित कर देते हैं। जिसकी तीखी प्रतिक्रिया वेनेजुएला, लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देश, रूस, चीन और वैश्विक स्तर पर होती है।

7 अप्रैल को व्हाईट हाउस का प्रवक्ता यह घोषित करता है, कि ‘‘संयुक्त राज्य अमेरिका यह नहीं मानता कि वेनेजुएला हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा पैदा कर सकता है।‘‘ जहां अमेरिकी राष्ट्र प्रमुख बराक ओबामा अपने को दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष मान कर निवास करते हैं।

1 महीना से भी कम समय -29 दिनों- में हुआ यह परिवर्तन अमेरिका की नीतियों में हुए बदलाव से ज्यादा अमेरिका विरोधी परिदृश्य का दबाव है, जिसे ओबामा सरकार आज भी ठीक से नहीं समझ रही है। वह इस सच को जानने के बाद भी स्वीकार नहीं कर पा रही है, कि लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देश बदल गये हैं। वहां से औपनिवेशिक-साम्राज्यवाद की विदाई हो गयी है और कई सरकारें भले ही अमेरिकी सम्बद्धता से चल रही हैं, लेकिन समाजवादी जन समर्थक सरकारों का जनाधार महाद्वीपीय स्तर पर बढ़ा है। वो मजबूत हुई हैं। विश्व जनमत उनके पक्ष में है। जिनके लिये वेनेजुएला किसी खतरा से ज्यादा लोकतंत्र के लिये समाजवादी विकल्प है।

अमेरिका की ‘सब-सेक्रेटरी फाॅर लैटिन अमेरिका‘ राॅबर्टा जैकब्सन को इस बात से हैरत हो रही है, कि वेनेजुएला को खतरा करार देने वाले अमेरिकी प्रतिबंध और ओबामा के डिक्री को ज्यादातर देशों का समर्थन नहीं मिला। 3 अप्रैल को उन्होंने कहा- ‘‘वाशिंगटन द्वारा वेनेजुएला के खिलाफ लगाये गये ‘प्रतिबंध‘ और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा‘ के हालिया ‘डिक्री‘ पर लातिनी अमेरिकी देशों की प्रतिक्रिया ने मुझे काफी निराश किया है।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘मैं हताश हूं, कि प्रतिबंध का बचाव करने के लिये ज्यादा देश नहीं थे। उन्हें वेनेजुएला या वेनेजुएला की सरकार को नुक्सान पहुंचाने के लिये नहीं बनाया गया था।‘‘

एक सम्मेलन में बोलते हुए राॅबर्टा जैकब्सन ने वेनेजुएला के प्रति लैटिन अमेरिकी देशों के द्वारा प्रदर्शित की गयी एकजुटता की भी निंदा की। उन्होंने कहा- ‘‘लैटिन अमेरिकन नेताओं के वक्तव्य ऐसे हैं, जैसे अमेरिका उस क्षेत्र के लिये भयानक किस्म का कोई खलनायक है। उन्होंने संयुक्त राज्य को इसी रूप में पेश किया जैसे वेनेजुएला की समस्या के मूल में अमेरिका है। इसी वजह से हमारे लिये व्यवहारिक ढ़ंग से आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है।‘‘

अमेरिकी सरकार को, प्रतिबंध और डिक्री को जिस तरह उन्होंने परिभाषित किया, वास्तव में वह हैरत में डालने वाला है। यदि वो लातिनी अमेरिकी देशों के मामले में अमेरिकी सह-सचिव हैं, तो यह माना नहीं जा सकता कि वेनेजुएला में हुए हिंसक प्रदर्शन, प्रतिक्रियावादी ताकतों को दिये जा रहे आर्थिक एवं कूटनीतिक समर्थन, आर्थिक हमले और राजनीतिक अराजकता पैदा कर तख्तापलट जैसी योजनाओं को अंजाम देने में अमेरिकी दूतावास की सम्बद्धता के बारे में उन्हें जानकारी नहीं होगी। ऐसा नहीं हो सकता कि लातिनी अमेरिकी देशों में अमेरिकी हितों के लिये की जा रही गतिविधियों की समझ उन्हें नहीं होगी। इसके बाद भी यदि लातिनी अमेरिकी देशों की प्रतिक्रिया और एकजुटता पर उन्हें आश्चर्य होता है, तो यह उनकी आश्चर्यचकित होने की आदत ही हो सकती है, जिस पर शायद उनका भी बस नहीं है।

जिस समय उन्होंने यह वक्तव्य दिया, उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होगी कि 3 अप्रैल को ही इस बात की जानकारी को सार्वजनिक किया गया कि ओबामा के हस्तक्षेप करने के डिक्री को रद्द करने की मांग करते हुए ट्विटर पर 105 देशों से कम से कम 5 मिलियन लोगों ने ट्वीट किया।

यह सच अपने आप में महत्वपूर्ण है कि व्हाईट हाउस वेनेजुएला के बारे में अपने ही आदेशात्मक निर्णय के दबाव में है।

‘समिट आॅफ अमेरिकास‘ के चंद दिनों पहले -7 अप्रैल को- व्हाईट हाउस के अधिकारी ने कहा, कि ‘‘वेनेजुएला अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा पैदा नहीं करता है।‘‘

आने वाले सप्ताह में पनामा में ‘समिट आॅफ अमेरिकास‘ का सातवां सम्मेलन होना तय है। और ज्यादातर देशों के लिये वेनेजुएला का मामला महत्वपूर्ण है। अमेरिकी सरकार को इस बात की आशंका है, कि वेनेजुएला के मामले की वजह से सम्मेलन के सभी मुद्दे महत्वहीन हो जायेंगे। यही नहीं खुद अमेरिकी सरकार इस मुद्दे पर घिर जायेगी और उसके साथ खड़ा होने के लिये शायद कोई देश न हो। इस विपरीत स्थिति से बचने के लिये संयुक्त राज्य ने कहा, कि ‘‘वह वेनेजुएला को अपनी सुरक्षा के लिये खतरा नहीं मानता।‘‘

लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों की ओबामा की यात्रा, जिसमें वो ‘समिट आॅफ अमेरिकास‘ में भी हिस्सा लेंगे, के बारे में हुए एक प्रेस कान्फ्रेंस में व्हाईट हाउस के एक वरिष्ठ सलाहकार बेंजामिन जे. रहोड्स ने कहा- ‘‘संयुक्त राज्य यह नहीं मानता कि वेनेजुएला हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा पैदा कर सकता है।‘‘

हालांकि व्हाईट हाउस के प्रवक्ता ने लगाये गये प्रतिबंधों और ओबामा के शासनादेश को रद्द करने के किसी भी संभावना का जिक्र नहीं किया। ना ही उनके किसी भी बात से इसकी संभावना ही बनती है। इसके बाद भी सच यह है कि अमेरिकी सरकार अपने ही निर्णय और उसकी प्रतिक्रिया के दबाव में है। और हम यह जानते हैं कि वह वेनेजुएला के खिलाफ अपनी हरकतों से बाज नहीं आयेगी। उसकी कोशिश वेनेजुएला के पक्ष में बन रहे माहौल को रोकने की है। वह अपने निर्णयों को स्थगित दिखाना चाहती है। जबकि मदुरो सरकार चाहती है, कि अमेरिका अपनी नीतियों में परिवर्तन करे।

मदुरो सरकार 10 मिलियन लोगों के हस्ताक्षर वाला मांग पत्र ओबामा को भेजने की नीति पर काम कर रही है, जिसमें अमेरिकी प्रतिबंधों को रद्द करने की मांग की गयी है। 7 अप्रैल को राष्ट्रपति ने घोषणां की, कि ‘‘अब तक 9 मिलियन से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किये हैं।‘‘ उनकी योजना पनामा सम्मेलन में इस मांग पत्र को ओबामा को सौंपने की है। यह स्पष्ट करने की है, कि अमेरिकी सरकार जनभावनाओं की अनदेखी कर रही है। इस बात को समझने की जरूरत वास्तव में बराक ओबामा को है। अमेरिका समर्थित संगठन ‘आॅर्गनाइजेशन आॅफ अमेरिकन स्टेट्स‘ में 7 मार्च को, ओबामा के द्वारा वेनेजुएला पर लगाये गये प्रतिबंधों पर मतदान हुआ। 29 सदस्य देशों ने वेनेजुएला के पक्ष में अमेरिकी प्रतिबंधों को गलत करार दिया। अमेरिका के पक्ष में 29 के मुकाबले सिर्फ 3 देशों ने मतदान किया, जिसमें अमेरिका के अलावा कनाडा और पनामा है।

ब्रिटेन के 100 सांसदों ने ओबामा के डिक्री को अस्वीकार करते हुए कहा है, कि ‘‘सभी आंतरिक हस्तक्षेप और वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रति वो अपना विरोध व्यक्त करते हैं।‘‘ दुनिया भर में वेनेजुएला के पक्ष में प्रदर्शन हुए हैं, मगर पश्चिमी मीडिया ने इन प्रदर्शनों की उपेक्षा की है।

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top