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वेनेजुएला में तख्तापलट और तख्तापलट की नाकामियां

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11 अप्रैल 2002 को, वेनेजुएला के प्रतिक्रियावादी विपक्ष ने अमेरिकी सहयोग से राष्ट्रपति ह्यूगो शाॅवेज का तख्तापलट किया।

तख्तापलट के विरोध में वेनेजुएला की आम जनता अपने घरों से, सेना अपनी छावनी से और जन मिलिशिया के हथियारबद्ध समर्थक काराकस के सड़कों पर उतर आये। जो जहां था, उसने राष्ट्रपति शाॅवेज और अपने देश के समाजवादी संविधान के पक्ष में खड़ा होना कुबूल किया, और 13 अप्रैल 2002 को शाॅवेज की वापसी हुई। विपक्ष और अमेरिकी सरकार 48 घण्टे भी टिक नहीं सकी, तख्तापलट नाकाम हुआ।

आज से 13 साल पहले वेनेजुएलावासियों के लिये 11 अप्रैल तख्तापलट का दिन था।

12 अप्रैल सामूहिक नाराजगी और सामूहिक आंदोलनों और अभियानों का दिन बना।

और 13 अप्रैल को उन्होंने राष्ट्रपति शाॅवेज को फिर से हासिल किया। यह उस दिन साफ हो गया कि वेनेजुएला शाॅवेज और समाजवाद के लिये एकजुट है।

‘‘एवरी इलेवन, हैज इट्स थर्टीन‘‘ के स्लोगन ने नयी समझ दी, कि यदि लोग अपने डर पर जीत हासिल कर लें, यदि वो अपनी एकजुटता की ताकत को पहचान लें, तो ग्यारह तारीख के वारदात का अंत, तेरह तारीख से अलग नहीं होगा। कि ‘‘आप हमें जब भी खत्म करने की कोशिश करेंगे, हम पहले से ज्यादा मजबूती से उठ खड़े होंगे।‘‘ वेनेजुएला की आम जनता और समाजवादी एकजुटता का मतलब, साम्राज्यवादी तख्तापलट की नाकामी है। लेकिन, अमेरिकी सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आयी है। वेनेजुएला के दक्षिणपंथी विपक्ष के साथ मिल कर राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की कोशिशें करती रही है। शाॅवेज के असामयिक निधन का लाभ उठाने की कोशिशें जारी हैं।

12 फरवरी 2015 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने एक टेलीविजन वक्तव्य में इस बात का खुलासा किया कि ‘‘वेनेजुएला की सरकार के खिलाफ तख्तापलट की कोशिश को विफल कर दिया गया है।‘‘ कई सैन्य अधिकारी और षड़यंत्र में शामिल लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। मदुरो ने कहा- ‘‘जो लोग इस षड़यंत्र में शामिल थे, उन्हें अमेरिकी डाॅलर में भुगतान किया गया था। एक संदेहास्पद आरोपी के पास अमेरिकी वीजा तक मिला है, कि किन्हीं कारणों से यदि वह असफल होता है, तो वेनेजुएला से पलायन कर सके।‘‘

राष्ट्रपति ने जानकरी दी कि ‘‘तख्तापलट के षडयंत्रकारियों ने तख्तापलट के बाद एक ‘अंतरिम सरकार‘ की योजना भी बना लिया था।‘‘ उन्होंने बताया कि ‘‘राष्ट्रपति भवन और टेलीविजन तेलेसुर के कार्यालय पर बमबारी और विपक्ष के सदस्यों सहित राष्ट्रपति और अन्य लोगों की हत्या की योजना बना ली गयी थी। षडयंत्रकारियों ने सभी बातें तय कर ली थी।‘‘ मदुरो ने जानकारी दी कि ‘‘ऐसे विडीयो की रिकाॅर्डिंग भी कर ली गयी थी, जिसमें नकाबपोश सैन्य अधिकारी सरकार के खिलाफ बोल रहे थे। जिसे तख्तापलट की कार्यवाही के बाद जारी करना था।‘‘ उन्होंने यह भी बताया, कि पिछले साल सरकार के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शन में शामिल कुछ ऐसे लोगों पर, जिन पर आरोप नहीं लगाया गया था, किंतु जो संदेहास्पद थे, उन्हें ‘सर्विलांस‘ पर रखा गया था।

वेनेजुएला की मदुरो सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिये अमेरिकी सहयोग एवं समर्थन से 2014 में हिंसक प्रदर्शनों का दौर चला, और अब जिस सेना ने शाॅवेज के खिलाफ हुए तख्तापलट में, आम जनता के साथ सड़कों पर उतरने का काम किया, उसे निकोलस मदुरो के खिलाफ साजिशों में शामिल करने की सेंधमारी की गयी। यह सवाल है, कि वह ऐसे साजिशों में शामिल क्यों हुई? चंद लोग ही सही लेकिन सेना में प्रतिक्रियावादी ताकतें भी हैं।

वेनेजुएला के विदेश मंत्री व्लादिमीर पैडरिनो लोपेज ने अपने ट्वीटर एकाउण्ट के जरिये कहा है, कि ‘‘आॅर्मड फोर्स देश की संवैधानिक सरकार के प्रति ईमानदार है।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘बोलिवेरियन नेशनल आर्मड फोर्स अभी भी अपने लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति दृढ़ हैं। उसने देश की शांति एवं सुरक्षा को खतरे में डालने वाले तख्तापलट को अस्वीकार कर दिया है।‘‘ इस बात की भी जानकारी है, कि सैन्य सूत्रों से ही सरकार को इस षडयंत्र की जानकारी मिली थी।

सरकार के हाथ लगे प्रमाणों के आधार पर तख्तालपट की योजना चार स्तर पर बनायी गयी थी। जिसके तहत वेनेजुएला पर-

  • आर्थिक हमला।
  • मानवाधिकार के उल्लंघन पर अंतर्राष्ट्रीय बहस
  • राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक अधिकारियों को विरोध में शामिल करना और
  • अंतिम रूप से सेना के द्वारा तख्तापलट।

राष्ट्रपति मदुरो ने बताया- ‘‘जिसकी शुरूआत पिछले साल 12 फरवरी से सरकार विरोधी आंदोलनों से की गयी।‘‘ उन्होंने खुलासा किया कि ‘‘इस योजना एवं षडयंत्र की जानकारी सेना के उन अधिकारियों ने दी, जिन्हें इस तख्तापलट की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिये सम्पर्क किया गया था।‘‘ राष्ट्रपति मदुरो ने देश की आम जनता से कहा- ‘‘वो सतर्क रह।‘‘ ‘‘यदि दक्षिण पंथी विपक्ष अपनी गतिविधियां जारी रखता है, तो देश की शांति और स्थिरता को बनाये रखने के लिये हमें तैयार रहना है।‘‘ निकोलस मदुरो की सरकार की सतर्कता का अनुमान इस घटना से लगाया जा सकता है, कि ओबामा के द्वारा वेनेजुएला पर लगाये गये ‘नये प्रतिबंधों‘ की घोषणां के साथ ही, अपनी सुरक्षा के लिये किये गये युद्धाभ्यास मे, सेना के साथ वेनेजुएला की आम जनता ने भी हिस्सा लिया। रूस की आमंत्रित सैन्य टुकडि़यों ने भी भाग लिया। जिसका सीधा सा मतलब है, कि मदुरो सरकार जनअभियान चलाने की योजना पर काम कर रही है। आम जनता पर यकीन ही, उसकी ताकत है।

वेनेजुएला के नेशनल असेम्बली के प्रमुख डिओस डाडो कैबेलो ने 12 फरवरी की रात ‘असफल तख्तापलट‘ के बारे में विस्तृत जानकरियां दी। कैबेलो और मदुरो, दोनों ने कहा, कि ‘‘तख्तापलट की योजना को अमेरिका से वित्तीय सहयोग मिला, ताकि 12 फरवरी को तख्तापलट किया जा सके।‘‘

कैबेलो ने तख्तापलट की कार्ययोजना और उसमें शामिल लोगों के बारे में जानकारियां दी। उन्होंने कहा- ‘‘इस योजना में आम नागरिकों का एक छोटा समूह और एयरफोर्स के अधिकारी शामिल हैं।‘‘ उन्होंने बताया कि ‘‘स्टेट सिक्यूरिटी एण्ड इंटेलिजेन्स‘‘ की सक्रियता की वजह से कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और उनके संसाधनों को जप्त किया गया, जिसमें एक कम्प्यूटर भी है। जिसमें तख्तापलट के नीतिगत कार्य योजना और उद्देश्यों की जानकारियां है। उन्होंने एक नक्शा भी दिखाया जिसके बारे में बताया गया, कि यह नक्शा भी उसी कम्प्यूटर से मिला है, जिसमें महत्वपूर्ण सरकारी भवनों को चिन्हित किया गया है। इन चिन्हित भवनों में राष्ट्रपति भवन, सैनिक गुप्तचर मुखयालय, न्याय मंत्रालय, राष्ट्रीय चुनाव आयोग भवन, तथा राष्ट्रीय टेलीविजन -तेलेसुर- भवन और कई सार्वजनिक स्थान शामिल हैं, जिन पर हवाई हमले की योजना थी।‘‘

टेलीविजन के माध्यम से देश की आम जनता को सीधे तौर पर जानकारी देने के इस कार्यक्रम में वेनेजुएला के राष्ट्रपति, नेशनल असेम्बली के प्रमुख के साथ राजधानी काराकस के मेयर जाॅर्ज रोडरिज ने भी भाग लिया और उन्होंने बताया कि ‘‘राष्ट्रीय असेम्बली के विपक्षी सदस्य जूलियो बर्गेस ने इन भवनों का चुनाव किया था।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘लेजिस्लेटर जूलियो बर्गेस को यह बताना होगा, कि उन्होंने काराकस के पश्चिमी इलाके को भी हवाई हमले के लिये क्यों चुना? जहां से विपक्ष हमेशा चुनाव जीतता आया है। उन्हें उन लोगों को बताना चाहिये, जो अपने घरों से बाहर निकले थे, जबकि उन्हें हमलों में मारा जाना था। उन्हें यह बताना चाहिये, कि वो इण्टरनेशनल चैनल -टेलीविजन तेलेसुर पर कब बम गिराने वाले थे?‘‘

रोडरिज ने कहा, कि ‘‘वेनेजुएला में एक ऐसा हिंसक विपक्ष है, जो ऐसी योजना को अंजाम देने में भी नहीं हिचकता जिसमें दर्जनों लोगों की जान जा सकती है। उन्हें राष्ट्रपति की हत्या करने में भी कोई हिचक नहीं हो सकती।‘‘ विपक्षी सदस्यों की हत्या आपसी संघर्षों को बढ़ाने का षडयंत्र था, ताकि राजनीतिक अस्थिरता, सामाजिक अराजकता से अंतरिम सरकार की अनिवार्यता को बढ़ाया जा सके। यह तख्तापलट के बाद राजनीतिक दमन की नीति थी।

नेशनल असेम्बली के अध्यक्ष कैबेलो ने बताया, कि षडयंत्रकारियों के पास से सेना और खुफिया एजेन्सीज के यूनिफाॅर्म, 8 मिनट का एक वीडियो, एक घोषणा पत्र और हथियारों का जखीरा भी बरामत हुआ है। जिसमें एआर-15 अमेरिकी राइफल भी है। जिसे अमेरिकी सेना के लिये बनाया गया था, लेकिन अब हथियारों के बाजार में खुलेआम बिकता है। ऐसे हथियारों को वेनेजुएला में रखना अवैध है।

कैबेलो ने बताया कि ‘‘तख्तापलट के कार्यवाही की शुरूआत बोर्जिस और विपक्ष के राजनीतिक लीडर एंटोनियो लेदेज़्मे के द्वारा सार्वजनिक घोषणा को नेशनल मीडिया के द्वारा प्रसारित किये जाने के साथ होना था, और इस घोषणा के साथ ही तुकानो विमान को हवाई हमला करना था।‘‘

कई एयरफोर्स के अधिकारियों को तख्तापलट के षडयंत्र में शामिल होने के वजह से हिरासत में लिया गया है। वेनेजुएला का विपक्ष देश की निर्वाचित मदुरो सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिये हंस्ताक्षर अभियान चलाने के साथ ही, सैन्य तख्तापलट की योजना भी बना रहा था। जिनका साथ अमेरिकी साम्राज्य और पश्चिमी ताकतें दे रही थी। वेनेजुएला के खिलाफ उसकी तेल पर आधारित अर्थव्यवस्था को तोड़ने के लिये न सिर्फ आर्थिक हमले हो रहे थे, बल्कि हिंसक प्रदर्शनों में शामिल लोगों को सरकारी हिरासत से बाहर निकालने केे लिये मानवाधिकार के हनन का हल्ला भी मचाया जा रहा था। कैबेलो ने बताया और तस्वीरें भी दिखायी, जिसमें एक अमेरिकी अधिकारी ने लियोपोल्डो लोपेज के ट्राॅयल को देखने के लिये, वेनेजुएला की यात्रा की है। रोडरिज ने सवाल किया, कि ‘‘ट्राॅयल को देखने के लिये अमेरिकी अधिकारी ने किस अधिकार से वेनेजुएला की यात्रा की?‘‘

लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के लिये वेनेजुएला और वेनेजुएला की बोलिवेरियन क्रांति तथा समाजवादी सरकार महाद्वीपीय एकजुटता के प्रतीक में बदल गयी है। क्यूबा के बाद वेनेजुएला ही वह देश है, जिसने महाद्वीप में आपसी सहयोग एवं समर्थन की समझ को आर्थिक एवं सामाजिक विकास के माध्यम से राजनीतिक आधार दिया। जिसकी वजह से अमेरिकी सरकार और महाद्वीप के दक्षिण पंथी ताकतों के पांव के नीचे से जमीन निकलती जा रही है। वेनेजुएला की समाजवादी सरकार को सत्ता से बेदखल करना इन ताकतों की वरियता बन गयी है। जिसकी वजह से वेनेजुएला पर लगातार हमले हो रहे हैं।

तख्तापलट के षडयंत्रकारियों के समयबद्ध कार्यक्रमों की जानकारी अब खुलेआम हो चुकी है। जिसे निश्चित रूप से बारीकी से बनाया गया था। उनकी योजना 6 से 8 जनवरी के बीच राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे अभियान चलाने की थी, कि सड़कों पर अशांति और अराजकता का माहौल बन जाये। व्यावसायिक इकाईयां और सुपर मार्केट उनके निशाने पर थे। उन्हें उम्मीद थी, कि यहां हिंसा फैलाई जा सकती है। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग तरीके से हिंसा और अराजकता को वो फैलाना चाहते थे। उनका मकसद वेनेजुएला में अस्थिरता फैलाना था।

9 जनवरी से फरवरी के दौरान षडयंत्रकारियों को उम्मीद थी, कि देश में पूरी तरह से अशांति और अस्थिरता फैल जायेगी, और मदुरो सरकार को सत्ता से बेदखल करने की राह भी बन जायेगी।

3 फरवरी को राजधानी काराकस के अमेरिकी दूतावास में अमेरिकी दूतावास अधिकारियों ने, वेनेजुएला के ऐसे महत्वपूर्ण लोगों के साथ बैठक की और उन्हें रिश्वत देने की कोशिश की, जो तख्तापलट की कार्यवाही में नीतिगत रूप से महत्वपूर्ण थे। अधिकारियों की कोशिश प्रशासनिक रूप से ऐसे महत्वपूर्ण लोगों को अपनी योजना में शामिल करना था। जिसकी जानकारी राष्ट्रपति मदुरो ने 3 फरवरी को ही दी।

12 फरवरी को तख्तापलट के लिये निर्णायक दिन तय किया गया।

12 फरवरी वेनेजुएला में ‘यूथ डे‘ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सत्तारूढ़ शाॅवेजवादी और वेनेजुएला का विपक्ष दोनों ही रैली निकालते हैं। यह रैली ही षडयंत्रकारियों का मुख्य निशाना थी। उनकी योजना रैली पर हमला करने हिंसा और अराजकता फैलाने की थी। उसके तत्काल बाद राजधानी के चिन्हित प्रशासनिक भवनों एवं सार्वजनिक स्थलों पर तुकानो विमान से हवाई हमला करना था।

ब्राजील में बना यह युद्धक विमान अमेरिकी सेना के द्वारा कम संख्या में, जवाबी कार्यवाही के लिये, खरीदा गया है। जिसमें तेजी से पोजिशन बदलने की क्षमता है।

हिंसक कार्यवाही, राजनीतिक अराजकता और हवाई हमलों के बीच तख्तापलट की कार्यवाही के बाद ‘अंतरिम सरकार‘ को यह उम्मीद थी, कि 13 फरवरी को वह मजबूती से वेनेजुएला को अपने नियंत्रण में ले लेगी। और इसी अफरा-तफरी में विपक्ष तथा सत्तरूढ़ बोलिवेरियन क्रांति समर्थक समाजवादी सरकार के महत्वपूर्ण नेताओं की -जिसमें राष्ट्रपति मदुरो भी शामिल थे- हत्या की जानी थी। और सरकार के बदलने की घोषणां के साथ नयी सरकार के सक्षम होने की घोषणा भी करनी थी। जिसकी तैयारी पूरी थी।

mll20155.520.360वेनेजुएला के विपक्ष के तीन प्रमुख व्यक्ति – लियोपोल्डो लोपेज, मारिया कोरिनया मचाडो और एन्टोनी लीजमा ने 11 फरवरी 2015 को एक घोषणा जारी किया, जिसमें सत्ता परिवर्तन और अंतरिम सरकार बनाने की मांग की गयी थी। जिसका शीर्षक था- ‘‘द काॅल फाॅर नेशनल ट्रांजिशनल एग्रीमेंट‘‘। जिसमें वेनेजुएला की आम जनता से अपील की गयी थी, कि ‘‘इस राष्ट्रीय योजना में वह शामिल हो और संगठित हो कर मदुरो सरकार को उखाड़ कर फेक दे।‘‘

यह उल्लेखनीय है, कि इन्हीं तीनों नेताओं ने 2002 के शाॅवेज के तख्तापलट में इनकी हिस्सेदारी थी। इन तीनों का सम्बंध फरवरी 2014 के हिंसक प्रदर्शन और सड़कों पर बैरिकेट्स बना कर कई महीनों तक सड़कों को जाम कर दिया था। वो मदुरो सरकार को सत्ता से बेदखल करने का दबाव बना रहे थे। उस घोषणा में वेनेजुएला की वर्तमान सरकार के लिये ‘असफल‘, ‘भ्रष्ट‘ और ‘असक्षम और नकारा‘ सरकार जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया था, और कहा गया था, कि यह अभिजात्य वर्गी 100 लोगों की सरकार है, जो सार्वजनिक फण्ड को चुरा रही है। जिसका उपयोग सभी के लिये किया जा सकता था।‘‘ जारी घोषणा में यह भी कहा गया था, कि ‘‘वेनेजुएला एक मानवाधिकार संकट के कगार पर है।‘‘ जिसके लिये निकोलस मदुरो, उनके सहयोगी और सरकार जिम्मेदार है, जिसके बारे में कहा गया था, कि ‘‘वह अपने अंतिम पड़ाव में है।‘‘

वेनेजुएला की समाजवादी सरकार के विरूद्ध विपक्ष के द्वारा जारी घोषणां और अपील में कुछ नया नहीं था। सोच की तरह उनकी नाराजगी और अरोपों का तेवर भी चीरपरिचित ही है, लेकिन घोषणां को जारी करने का समय और उनका यह प्रस्ताव, कि वेनेजुएला के आॅयल इण्डस्ट्रीज को तथाकथित बुद्धिजीवियों के राज्य (मेरिटोक्रेटिक) मैनेजमेंट को, जो कि शाॅवेज पूर्व वेनेजुएला में थे, को वापस सौंप दिया जाये और वेनेजुएला को फिर से अंतर्राष्ट्रीय वित्त व्यवस्था से जोड़ दिया जाये, महत्वपूर्ण है। जिनकी वजह से 1980 से 90 के दौरान प्रतिव्यक्ति आय में भारी गिरावट आयी थी। दूसरे शब्दों में विपक्ष की योजना वेनेजुएला को नवउदारवाद की ओर ले जाने की थी। उसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय इकाईयों को सौंपने की थी। राज्य के द्वारा संचालित वित्तीय इकाईयों को निजी कम्पनियों के हाथों में देने की थी। उन्होंने खुले तौर पर राष्ट्रीयकरण के बजाये निजीकरण का प्रस्ताव रखा।

2002 के तख्तापलट के एक महीना पहले भी वेनेजुएला के विपक्ष ने इसी तरह का घोषणापत्र जारी किया था, जिसका शीर्षक ‘बेस फाॅर ए डेमोक्रेटिक एग्रीमेण्ट‘ था। जिसे वेनेजुएला की आम जनता ने स्वीकार नहीं किया। इसके विपरीत हुआ यह, कि शाॅवेज की पकड़ आम लोगांे पर पहले से ज्यादा हो गयी। और आज भी शाॅवेज वेनेजुएला ही नहीं पूरे महाद्वीप की एकजुटता के, बोलिवर जैसे प्रतीकों में शामिल हैं। जो वेनेजुएला की सुरक्षा का आधार है। और लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देशों के विकास की दिशा। जिसे अमेरिकी सरकार अपने लिये खतरा मानती है।

16 फरवरी को वेनेजुएला ने कुछ नये खुलासे किये। जिसके अनुसार 12 फरवरी के असफल तख्तापलट की कोशिश में अमेरिका के ‘प्राइवेट सिक्यूरिटी फर्म- ब्लैकवाॅटर की सम्बद्धता है, जो अब ‘अकादमी‘ के नाम से काम कर रही है। ब्लैकवाॅटर 2007 में इराक में हजारों आम इराकियों की हत्या का दोषी है, जो सीआईए के लिये काम करती है। उन्होंने कई स्थानों पर बे-वजह आम लोगों पर खुली फायरिंग की।

नेशनल असेम्बली के प्रमुख कैबेलो ने 13 फरवरी को बताया कि ‘‘कनाडा और ब्रिटेन के दूतावास के अधिकारियों की सम्बद्धता भी इस असफल तख्तापलट में रही है।‘‘ उन्होंने कनाडा के दूतावास अधिकारियों के साथ नैन्सी बिरबेक के द्वारा उस एयरपोर्ट का दौरा किया, जहां से असफल होने पर भागने की योजना थी, और यह भी तय करना था, कि यदि अमेरिकी सेन सैन्य हस्तक्षेप करती है, तो उसकी क्षमता कितनी है, इस बात के भी प्रमाण हैं, कि विपक्ष के सभी महत्वपूर्ण नेताओं को इस तख्तापलट की जानकारी थी।

19 फरवरी को दोपहर में काराकस के दक्षिण पंथी मेयर एन्टोनियो लीडीजमा को गिरफ्तार कर लिया गया, उन पर वेनेजुएला की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के असफल तख्तापलट में भाग लेने का आरोप लगाया गया है। एन्टोनियो लीडीजमा उन लोगों में शामिल है, जिन्होंने 27 फारवरी 1989 में ‘काराकाजो‘ के दौरान 400 विद्यार्थियों की हत्या का आदेश दिया था। उनकी गिरफ्तारी उनके कार्यालय में बोलिबेरियन इन्टेलिजेन्स के अधिकारी ने की। 20 फरवरी 2015 को उन पर तख्तापलट के षडयंत्र में शामिल होने और राजद्रोह का आरोप लगाया गया।

इस आरोप का खुलासा हो गया है, कि षडयंत्रकारी तख्तापलट की योजना पर पिछले साल 2014 से ही काम चल रहा था। और इन खुलासां के आधार पर हम यह कहने की स्थिति में हैं, कि चार चरणों में बनाई गयी असफल तख्तापलट की योजना के तीन चरणों को लगभग पूरा कर लिया गया था, जिसमें अमेरिकी सरकार और उसके सहयोगी देशों की भूमिका थी। चैथे चरण को अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी विपक्ष और उनके सहयोगी -जिन लोगों पर थी- वो नाकाम रहे और षडयंत्रों का खुलासा हो गया। यदि इस चरण की शुरूआत हो जाती, तो वेनेजुएला सीरिया की तरह ही गृहयुद्ध की चपेट में होता।

तख्तापलट के बाद अंतरिम सरकार बनाने वालों ने शपथ उठाया था, कि अंतरिम सरकार की घोषणा के साथ ही वेनेजुएला के सभी सेवाकार्यों (पब्लिक सर्विस) का तत्काल निजीकरण किया जायेगा और देश की आम जनता से तत्काल चुनाव कराने का वादा किया जायेगा। इस बात की घोषणां की जायेगी, कि वेनेजुएला के सभी पूर्व अधिकारी 180 दिनों के अंदर अपने आपको पुलिस को सौंप दें। वेनेजुएला में काम कर रहे सभी क्यूबाईयों से आग्रह किया जायेगा, कि वो निःशस्त्र खुद को स्थानीय पुलिस स्टेशन में आत्म समपर्ण कर दें।

योजना के अनुसार- ‘‘अंतरिम सरकार वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था में अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक और इंटर अमेरिकन डव्लपमेंट बैंक को हस्तक्षेप करने की बात की स्वीकृति देगी।‘‘ जिसका मतलब वेनेजुएला की समाजवादी अर्थव्यवस्था का अंत है। राष्ट्रपति मदुरो ने ‘100 डे प्लान फाॅर ट्रांजिशन‘ की एक प्रति को दिखायी

अमेरिकी सरकार ने अपने जारी वक्वत्य में वेनेजुएला में असफल हुए तख्तापलट में अपनी सम्बद्धता से इंकार किया है। लेकिन उसने मेयर एन्टोनी लीडिजमा के प्रति तथा वहां के विपक्ष के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। जो असफल तख्तापलट के आरोपी हैं। जितने बड़े पैमाने पर तख्तापलट की योजा बनायी गयी थी, और जिस तरह उसे चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया वह अपे आप में तख्तापलट की अमेरिकी पद्धति का खुलासा है, जिसका उपयोग वह तीसरी दुनिया के देशों मे करता रहा है।

राष्ट्रपति मदुरो ने इस बात की घोषणा की, कि अप्रैल में पनामा में हो रहे ‘समिट आॅफ द अमेरिकाज़‘ में सारे प्रमाण ले कर जायेंगे। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को सम्मेलन में भाग लेना है। उन्होंने कहा- ‘‘हिरासत में लिये गये जनरल एवं अन्य लोगों के द्वारा दिये गये सभी जानकारियों का एक प्रतिशत सच भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा, कि आने वाले सप्ताहों में जानकारियों को सार्वजनिक किया जायेगा।

लातिनी अमेरिका ही नहीं, दुनिया भर की जनसमर्थक सरकारों और विश्व समुदाय के सामने अमेरिकी सरकार एक गंभीर समस्या है, जो अपने वर्चस्व को बनाये रखने की सबसे घिनौनी लड़ाई लड़ रहीं है।

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