Home / साहित्य / कविता / अनवर सुहैल की चार कविताएँ

अनवर सुहैल की चार कविताएँ

anwar suhail1. अम्मी

अम्मी कभी-कभी
कुछ भी बतियाना अच्छा नही लगता
और चुप रहें तो दम घुटने सा लगता है
वो समझ लेती थीं मेरे मन की बात
और दुलार से फेरती थीं माथे पर हाथ
तब ऐसा चटियल नही था सर
कितने आहिस्ता से सहलाती थीं बालों को
और खींच लेती थीं सर अपनी तरफ
कि गोद की आंच में जमी बर्फ पिघल जाती थी
दिल-दिमाग और रूह की ज़मीन पर
उग आते थे बगीचे और उड़ने लगती थीं तितलियाँ
फूलों की क्यारियाँ खुशबूएं बेखेरने लगतीं
कभी-कभी
कुछ भी बतियाना अच्छा नही लगता
और तब आपकी याद आती है अम्मी…

 

2. भीरु हो जाता है वो

भीरु हो जाता है वो
जो बना दिया जाता है सर्व-शक्तिमान
कैदी हो जाता है वो
जो अपनों से दूर हो जाता है
चुप्पा हो जाता है वो
जो लोगों को सन्देश देने लगता है
सीमित हो जाता है वो
जो असीमित चाह रखता है
कम-कम दीखता है वो
जो जन-दर्शन के योग्य हो जाता है
और किसी दिन अचानक
जो निर्भीक हो, लोगों के बीच
उठने-बैठने लगे
खूब-खूब बोलने लगे
तो समझ लो कि अब वो
नही रहा सर्व-शक्तिमान
और उसे चाहिए फिर एक बार
हमारी हसरतों, सपनों, चाहतों के एवज
पुरजोर समर्थन…
भरपूर सम्मान..

 

3. कातिल हर बार संदेह का लाभ पाकर छूट जाता है

मुंह पर कपड़ा बाँध
गला रेतना उतना ही बुरा है
जितना कि पहचान-पहचान कर
एक लाइन में खड़ा कर गोली मारना
रात में रहाईशी इलाकों में
ड्रोन हमले करना उतना ही बुरा है
जितना अम्बुश लगा
चारों तरफ से घेर कर
दिन-दहाड़े हत्याएं करना
स्थिति चाहे जो हो
किसी भी दशा में
मरने वाला बयान नही दे पाता है
और कातिल हर बार
संदेह का लाभ पाकर छूट जाता है.

 

4. जिन्हें नींदें किश्तों में है आती

छोटी-छोटी इच्छाएं
और स्वप्न बड़े-बड़े
छोटे-छोटे काम
और कोशिशें बड़ी-बड़ी
छोटी-छोटी सहूलतें
और जिद बड़ी-बड़ी
छोटी-छोटी उड़ान
हौसले बड़े-बड़े
छोटी-छोटी यात्राएँ
और दूरियां बड़ी-बड़ी
इसीलिए तो हम छोटे लोगों को
आसानी से नज़र-अंदाज़ करते हैं वे
जिन्हें नींदें किश्तों में है आती
और जिनकी उनींदी आँखों में
बसे रहते डरावने स्वप्न
कभी भी, किसी भी समय
लूट लिये जाने के डर
किसी साइलेंसर वाली रिवाल्वर की
अकेले में कहीं आने-जाने से कतराते हैं वे
कहीं कोई लुका-छिपा बैठा न हो घात लगाये
और छीन न ले बेईमानी से इकट्ठी की दौलत…
मुझे मालूम है
हमारी फकीरी से जलते हैं वे
चीथड़ों में लिपटा हमारा वजूद
बेफिक्री और फक्कड़पन के साथ
ठेंगा दिखाता उनके ऐश्वर्य को
मुंह चिढ़ाता उनकी बेबसी को…!!

-अनवर सुहैल

अनवर सुहैल हमारे समय के चिन्हित कवि – उपन्यासकार हैं ! उनका उपन्यास ‘पहचान’ बहुत चर्चित रहा है ! इसके अलावा उनके कथा संग्रह ‘गहरी जड़ें’ के लिए उन्हें मध्य प्रदेश हिंदी सम्मेलन द्वारा वर्ष २०१४ का वागीश्वरी पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई है ! अनवर जी बेहतरीन कवि /कथाकार के साथ –साथ एक कुशल संपादक भी है ! कविता केन्द्रित लघु पत्रिका ‘संकेत’ इसका प्रमाण हैं !

 

परिचय :-

जन्म : 09 अक्तूबर 1964 , मध्यप्रदेश के नैला / जांजगीर में !
प्रकाशन : दो उपन्यास , तीन कथा संग्रह , एक कविता संग्रह , तीन कविता पुस्तिकाएं तथा ‘असुविधा’ और ‘संकेत’ पत्रिकाओं का सम्पादन !
सम्प्रति : कोल इंडिया लि. में सीनियर मैनेजर !
संपर्क : 09909798108

प्रस्तुति:- नित्यानंद गायेन

Print Friendly

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top