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सेल्फी इसी को कहते हैं भाई!

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मोदी जी पहले अपना पीठ थपथपाते हैं,

फिर, फूले नहीं समाते हैं,

और फिर अपना फोटो खींच लेते हैं,

इसी को सेल्फी कहते हैं।

कई सवाल और सवालों के जवाब मोदीनुमा होते हैं- अपना ढोल बजाते हुए। अपनी मुनादी करते हुए।

जहां तक हमारा खयाल है, कि वेशभूषा तो आप कहीं का भी पहन और बना सकते हैं- जैसे बस्तर में मोदी जी, आदिवासी पोशाक का सींग लगा कर मंच पर पहुंच गये थे, मगर हल और हथियार के चक्कर में ‘ढुंसा‘ गये, कोई फायदा नहीं मिला।

हमारे मोदी जी को सेल्फी की तरह ही बाजा बजाने का शौक चर्राया हुआ है। लेकिन साज के साथ रियाज की जरूरतें पड़ती हैं। क्या करें? शौक चर्राया हो तो यह खयाल ही नहीं रहता है, और बिना रियाज के ही माोदी जी जहां जाते हैं, वहां का साज पीटने लगते हैं। चीन में उनको मौका नहीं मिला तो मंगोलिया के उलानबटोर में मौका निकाल लिये। उनको जापान में कमल नजर आया था, मंगोलिया में भी कमल नजर आया। उस समय राष्ट्रीय पुष्प नहीं, चुनाव चिन्ह कमल याद आया। उन्हें अपनी पीठ थपथपाने की ऐसी आदत पड़ गयी है, कि खयाल ही नहीं रहता कि वो कहां हैं? शंघाई से ही अपनी सरकार -जो कि वो खुद हैं और कोई नहीं- उसकी ताारीफ करने में इस कदर खो गये कि ‘‘दुख भरे दिन बीते रे भईया‘‘ गाने लगे।

बहरहाल नजर और नजरिया उनका अपना है, मगर नजारा घोड़े को स्काॅर्फ पहनाने जैसा ही होता है। कुछ ऐसा होता है, जैसे प्रधानमंत्री के साथ प्रधानमंत्री का सेल्फी।

ओबामा जी नेलसन मंडेला की शोकसभ में सेल्फी से अपना जी बहला रहे थे। हमारे मोदी जी चाहे जहां हों सेल्फी से अपना जी बहला लेते हैं। यकीन कर लेते हैं, कि वो जहां हैं, यकीनन वहीं हैं। फोटोशाॅप का कमाल या नजर का धोखा नहीं है।

आने वाले कल में उनके सेल्फी की नीलामी भी हो सकती है। नीलामी से भी लाभ बटोरा जा सकता है। अपना नाम लिखा सूट वो पहले ही नीलाम कर चुके हैं। जिसे खरीददार ने अपने कार्यालय के शोरूम जैसी जगह पर लगा रखा है।

और भी बहुत कुछ नीलाम किया होगा उन्होंने। बोली लगाने वाले कारोबारियों की कमी तो है नहीं। ना ही चीजों की कमी है।

मेरे गंवार मन ने कहा- ‘‘नहीं भईया, पीएम हैं, पूरा देश उनका है। सवा सौ करोड़ रियाया है। वो अपना चीज काहे नीलाम करेंगे?

‘‘बात सही है।‘‘ हमें मानना पड़ा।

मन की बात मन में दब गयी, जुबान पर खयाल आया- वो आत्मत्यागी हैं।

हालांकि आत्मा अभी शरीर के अंदर है, और दुनिया देखने का मजा ले रही है।

‘‘वो हित त्यागी हैं, त्याग की मूरत हैं।‘‘

मूरत के नाम पर खयाल आया- उनकी मूरत ‘त्याग चैक‘ पर स्थापित होनी चाहिये।

वहां भी वो सेल्फी लेंगे, ताकि सनद रहे और वक्त जरूरत पर काम आये।

वैसे, देश में अभी ‘त्याग चैक‘ नहीं है।

अम्बानी, अडानी से बड़ी उम्मीदें हैं। इतना तो वो करेंगे ही।

मोदी जी ‘सेल्फी‘ कूटनीति का जलवा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सेल्फी पर टूवीट किया, और कहा- ‘‘सेल्फी कूटनीति का एक सबक।‘‘ समझ में नहीं आया, कि माजरा क्या है? सबक क्या है? लेकिन बड़े लोगों की बातें होती है और जब अपने को बड़ा समझने वाले के लिये कही गयी हो तो, और भी बड़ी हो जाती हैं, हमने मान लिया, कि ‘‘सबक और भी कई होंगे।‘‘

संभव है, आने वाले कल में विदेश मंत्री जी देश में रह कर यही करती नजर आयें, उनका काम तो परमत्यागी जी ही पूरा कर रहे हैं। उनकी योजना पांच साल में दुनिया के हर देश का कोना-कोना छान मारने की है। 12 महीना में 18 देश की यात्रा कम है। उन्हें अपनी स्पीड़ बढ़ानी होगी।

उन्होंने कहा- ‘‘भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये इंजन है।‘‘

देश की अर्थव्यवस्था में रेल का नया माॅडल बन रह है, जिसके इंजन को डब्बे खींचेंगे। तब कहीं जा कर ‘‘सबका साथ, सबका विकास होगा।‘‘

40 करोड किसान जमीन से बे-दखल हो कर दिहाड़ी मजदूर बनेंगे।

सस्ते में मजदूर बिकेंगे।

सब काम करेंगे।

रेल के डब्बे में मााल भरेंगे

और डब्बे इंजन को खींच कर बाजार में ले जायेंगे।

खुशहाली गनगना कर आयेगी,

बद्हाली घिसटते हए साथ चलेगी।

मोदी जी अपना पीठ थपथपायेंगे, फिर फूले नहीं समायेंगे, और फिर फोटो खींच लेंगे। सेल्फी इसी को कहते हैं भाई।

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