Home / साहित्य / कविता / शैलेन्द्र की तीन कविताएं

शैलेन्द्र की तीन कविताएं

1. आवाज उनकीkavi shailendra

मिल गए कल रात
अलाव तापते
गले से लटकती लंबी
माला लटकाए
कुछ तलाशते
कुछ निहारते
धरती में धंसने को आतुर
बाबा त्रिलोचन
संग में दूसरा एक बूढ़ा
ऊंचा थोड़ा कद-काठी में
ताकते उनको
कुछ बतियाता
कुछ समझाता
मानो ढाढस बंधाता
अरे वाह ऊपर किया चेहरे को थोड़ा
दाढ़ी लंबी, माथा कुछ चौड़ा
अरे वाह, यह तो निकले अपने निराला
जाने क्या-क्या बतियाए जा रहे थे
आवाज पर उनकी सुनाई ही नहीं पड़ रही थी..

 

2. तुम्हारी दुआओं का कमाल!

न बांधी ताबीज
न लटकाया
काला-पीला धागा
न पहनी बहुगुणधारी
रत्न-पत्थर जड़ी अंगूठी
न कोई शोर, न कोई धमाल
जिंदगी ऐसी अनूठी
कि गुजार दिए 58 साल
मां, ओ मेरी मां!
यह है बस तुम्हारी दुआओं का कमाल!!

 

3. नैतिकता

दी जाती रही है सीख
खास कर बच्चों को
विशेष कर गैरों को
सलाह दी जाती रही है
पोथियां पढ़ने की
बरतने की नैतिकता
खास कर अच्छों को
विशेष कर सच्चों को

दिल खोल कर
दिखाई जाती है उदारता

 

परिचय:

शैलेन्द्र जी हिंदी के वरिष्ठ कवि हैं। हिंदी दैनिक ‘जनसत्ता’ कोलकाता के संपादक पद पर कार्यरत हैं।

प्रस्तुति : नित्यानंद गायेन

Print Friendly

One comment

  1. आशीष मिश्र

    बहुत सुंदर कविताएं , शुक्रिया नित्या भाई !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Select language:
Hindi
English
Scroll To Top