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सूचना के विकेंद्रीकरण के खिलाफ अमेरिकी सरकार

aaron11 जनवरी को बु्रकलीन के अपने अपार्टमेण्ट में 26 वर्षीय एरोन स्वार्टज मृत पाये गये। न्यूयार्क पुलिस का कहना है कि ”उन्होंने आत्महत्या की” किंतु स्वार्टज के पिता और उनको मानने वाले मानते हैं कि ”उनकी हत्या की गयी है।” क्योंकि स्वार्टज ‘सूचना के विकेंद्रीकरण’ की लड़ार्इ लड़ रहे थे, जो अमेरिकी सरकार और वहां के कारपोरेट जगत की नीतियों के विपरीत है।

उन्होंने आत्महत्या की या नहीं की?

उनकी हत्या हुर्इ या नहीं हुर्इ?

यह सवाल हो सकता है, मगर दो बातें बिल्कुल साफ हैं कि 1. अमेरिका में, अमेरिकी सरकार और कारपोरेट जगत का विरोध, तेजी से बढ़ा है, और 2. जैसे-जैसे विरोध बढ़ता गया है, ऐेसे आत्महत्या और हत्या के मामलों में भी, तेजी आयी है।

क्या यह महज इत्तेफाक है? या यह भी अमेरिकी सरकार के सीआर्इए और एफबीआर्इ की कारस्तानियां हैं? जो काम वह पहले तीसरी दुनिया के देशों में कर रही थीं, अब अपने यहां भी कर रही हैं।

आम अमेरिकी पर सरकार का सिकंजा इतना कस गया है कि खुल कर सांस लेना, अपनी बात कहना और सरकार की जनविरोधी नीतियों की आलोचना करना भी अपराध हो गया है। ‘डिफेन्स अथरार्इजेशन एक्ट- 2012’ के तहत बिना किसी न्यायालयीन कार्यवाही के जूडिसियरी और एफबीआर्इ किसी को भी ‘घरेलू आतंकवादी’ घोषित कर सकती है। उसे हिरासत में लेकर, सैनिक जेल में बंद कर सकती है, उस सीमा तक उसे यातनायें दे सकती है कि उसकी मौत हो जाये। और सबसे अजीब बात यह है कि उसके खिलाफ कहीं कोर्इ न्यायिक कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

अभिव्यकित की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार के विरूद्ध अमेरिका में और भी कर्इ अधिनियम पारित किये गये हैं। ‘स्टाप, आनलार्इन पायरेसी एक्ट’ के तहत किसी भी व्यकित को पायरेसी के जुर्म में हिरासत में लिया जा सकता है। इस ‘बिल’ के पक्ष में वहां के फिल्म निर्माता, संगीत कम्पनियों और इस पूरे उधोग पर कब्जा जमा कर बैठे कारपोरेशन हैं। मगर एरोन ने अमेरिकी कांग्रेस में इसके पास न होने के लिये ‘आनलार्इन’ अभियान चलाया था। इस मामले ने उन्हें न सिर्फ ख्याती दी बलिक, सरकार और कारपोरेट जगत को भी उनके विरूद्ध कर दिया। यह अधिनियम अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में पास हो गया और राष्ट्रपति ने भी हस्ताक्षर कर दिये। इस ‘बिल’ का विरोध करने वालों के लिये एरोन एक प्रतीक बन गये। जो अमेरिका में कम्प्यूटर प्रोग्रामर, लेखक, राजनीतिक संगठनकर्ता और इण्टरनेट एक्सपर्ट थे।

एरोन स्वार्टज तमककपजण्बवउ के सहयोगी संस्थापक और आरएसएस टेक्नोलाजी के सहयोगी निर्माता थे। कम्प्यूटर और इण्टरनेट की दुनिया में जिसकी पूछ है। 26 वर्र्षीय स्वार्टज को 11 जनवरी की सुबह ब्रुकलिन के उनके अपने अपार्टमेण्ट में मृत पाया गया। न्यूयार्क के स्वास्थ्य परिक्षक की रिपोर्ट के अनुसार- ”उन्होंने फांसी लगा कर आत्महत्या की।” मगर, उनके अपार्टमेण्ट में सुसार्इट नोट या आत्महत्या से पहले लिखा गया स्वीकारोकित पत्र नहीं मिला, जिसमें आत्महत्या करने और उसके कारणों का जिक्र हो।

आज दुनिया की सरकारें सूचना और संचार क्षेत्र में आये क्रांति का उपयोग अपने हितों में करना चाहती हैं। वैसे भी आम आदमी तक, चाहे वह किसी भी देश और महाद्वीप का वासी हो, दुनिया में घट रही घटनाओं की खबरें 6 विशालतम कारपोरेशनों के जरिये ही पहुंचती हैं। उन्होंने ही सूचना के तमाम स्त्रोतों पर, ज्ञान की विशाल सम्पदा पर और जानकारियों के संसाधन पर अपना अधिकार जमा लिया है। प्रिंट मीडिया से लेकर सेटेलार्इट तक पर उनका कब्जा है। टीवी चैनलों से लेकर इण्टरनेट पर भी उन्हीं का कब्जा है। यही कारण है कि आम आदमी तक पहुंचने वाली ज्यादातर खबरें एकतरफा होती हैं। मीडिया को भी उन्होंने युद्ध के हथियार में बदल दिया है।

एरोन स्वार्टज स्वतंत्र इण्टरनेट पर सूचना के विकेंद्रीकरण के पक्ष में थे। वो सूचना को सीधे तौर पर आम जनता तक मुफ्त में पहुंचाना चाहते थे। सूचना पर निजी स्वामित्व का विरोध कर, अंजाने ही उन्होंने अमेरिकी सरकार और कारपोरेट जगत को अपना विरोधी बना लिया, जिनके लिये जानकारियां और सूचनायें मुनाफा कमाने का बड़ा जरिया हैं। इस्ट इणिडया कम्पनी ने भी जितनी कमार्इ एक दशक में नहीं की होगी -अपने उपनिवेशों के दोहन और शोषण से, दमन और अत्याचारों के बाद भी- उतनी कमार्इ ये विशालतम कारपोरेशन एक दशक में ही कर चुके हैं। जिन पर राज्य की पूंजीवादी सरकार और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का अधिकार है। यही कारण है कि वो सूचना के विकेंद्रीकरण के लिये उठी हर एक आवाज को दबा देती हैं। स्वार्टज ने न सिर्फ विकेंद्रीकरण की बातें की, बलिक अमेरिकी सरकार की नीतियों का भी उन्होंने विरोध किया। अमेरिकी राष्ट्रपति बुश के पेटि्रयाट एक्ट, फेशबुक द्वारा अभिव्यकित की स्वतंत्रता के विरूद्ध- सेंशरशिप, गोल्ड मैन चेज के वित्तीय घोटालों के खिलाफ भी इण्टरनेट पर अभियान चलाया।

जैसा, कि इस तरह के हर एक व्यकित के साथ सरकारें करती हैं, वैसा ही अमेरिकी सरकार ने भी किया। अमेरिकी सरकार ने एरोन स्वार्टज को अपराधी घोषित कर दिया। एमआर्इटी के हजारों शैक्षणिक लेखों को इंटरनेट पर उपलब्द्ध कराने और उन्हें मुफ्त में डाउनलोड करने की सुविधा स्वार्टज ने अपने वेबसार्इट के जरिये दी। एफबीआर्इ उनके पीछे पड़ी हुर्इ थी। परिणाम स्वरूप जुलार्इ 2011 में उन्हें एफबीआर्इ के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर इतने आरोप लगाये गये कि उन्हें 50 सालों तक जेल में रखा जा सकता था। अमेरिकी कानून से उन्हें घेर लिया गया। जहां भूखे को रोटी खिलाना भी कानून का उल्लंघन है, क्योंकि ऐसे लोगों को ‘फूड स्टैम्प’ के तहत लाना, उन्हें सहयोग देना, सरकार का अधिकार है, जिससे जेपी मार्गन जैसे लोग करोड़ों-करोड़ डालर कमाते हैं।

सूचना के विकेंद्रीकरण की सोच और उन्हें नि:शुल्क आम जनता तक पहुंचाने का काम न तो अमेरिकी सरकार के खिलाफ राष्ट्रद्रोह था, ना ही ऐसा कोर्इ अपराध था, जिससे सामाजिक हितों को हानि पहुंचती हो। किंतु, स्वार्टज के खिलाफ एफबीआर्इ पीछे पड़ गयी, और बाद में जैसी कार्यवाही की गयी, उससे यह प्रमाणित हो गया कि सरकार और निजी कम्पनियों का हित प्रभावित हो रहा है। स्वार्टज पर कम्प्यूटर फ्राड और एब्यूस एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया गया। उन्हें वैधानिक प्रक्रिया के जाल में फंसा दिया गया। 1 लाख अमेरिकी डालर की जमानत पर रिहा हुये स्वार्टज पर गहरा मानसिक दबाव था। फिर से हिरासत में लिये जाने का खतरा, शारीरिक एवं मानसिक यंत्रणा के दौर में फिर से फंसाये जाने की आशंका सिर पर सवार थी। उन्हें पूरी तरह से दबाव में लिया जा चुका था। इस बात को उनके निकटतम सहयोगी एवं महिला मित्रों ने भी स्वीकार किया है कि अपने ऊपर लादे गये प्रकरणों को लेकर स्वार्टज गहरे मानसिक दबाव में थे।

15 जनवरी 2013 को स्वार्टज का अंतिम संस्कार सेण्ट्रल एवेन्यू उपासनागृह, हार्इलैण्ट पार्क इलिनोइस में किया गया। जहां उनके समर्थकों की भीड़ थी। उनके पिता राबर्ट स्वार्टज ने कहा कि ”एरोन ने आत्महत्या नहीं किया है। सरकार ने उसे मार डाला है। जो भी दुनिया को एक बेहतर जगह बनाना चाहता है, उसे सरकार के द्वारा मौत की ओर धकेल दिया जाता है।” उन्होंने सीधे तौर पर आत्महत्या का खण्डन करते हुए हत्या का आरोप सरकार पर रखा।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि एरोन स्वार्टज ने आत्महत्या की है या नहीं? मगर लोगों का मानना है कि यदि यह आत्महत्या है भी तो इसके लिये सरकार ही जिम्मेदार है। वो यह मानते हैं कि अमेरिकी सरकार ने ही ऐसी सिथतियां पैदा की कि आत्महत्या के अलावा और कोर्इ रास्ता ही नहीं बचा। उन पर झूठे और गलत केस लादे गये और उसके दबाव को इतना बढ़ाया गया कि आत्महत्या स्वाभाविक परिणाम बन गया। अमेरिका में इस घटना को ले कर लोगों में भारी नाराजगी है।

एरोन की मौत को लेकर विरोध में एनोनिमस हैकर्स ने एमआर्इटी के दो डोमेन को हैक कर लिया और उसके स्थान को स्वार्टज को टि्रब्यूट देकर रिप्लेस कर दिया गया। जिस बैनर के तहत स्वार्टज को श्रद्धांजली दी गयी, उसमें ‘अमेरिकी कापीरार्इट सिस्टम’ में सुधार करने के लिये मांगाें की एक फेहरिश्त भी है। जिसे पूरा करना न तो अमेरिकी सरकार की नीति है, ना ही उन कारपोरेशनों के हित में है, जो सूचना के केंद्रीकरण के पक्षधर हैं। 18 एवं 19 जनवरी की रात में एमआर्इटी का र्इ-मेल सिस्टम 10 घण्टे तक बंद रहा। 26 जनवरी को ‘यूनार्इटेड स्टेट के सेनटेंनसिंग कमीशन’ के वेबसार्इट को अनाम हैकर्स ग्रूप ने, विरोध में, हैक कर लिया।

अभिव्यकित की स्वतंत्रता और सूचना के विकेंद्रीयकरण का मुददा सड़काें पर ही नहीं इण्टरनेट की दुनिया में भी है, जिन्हें सरकारें घेर कर खड़ी हैं।

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