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महानायक, आप ही समझदार हैं!

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कालिख और कोयले सभी नाराज हैं, कि दलाली तो लोग करते हैं, मगर बद्नामी हमारी ओर धकेल देते हैं।

उन्होंने मोदी जी से मुलाकात की

इंदिरा जी को कोसा, जिन्होंने कोयले का राष्ट्रीयकरण किया

मनमोहन जी को भला कहा, बुरा कहा, जिन्होंने छुप-छुप के राष्ट्रीयकरण की ओट में निजीकरण को खुशहाली दी, और चुपचाप दागदार दामन लिये विदा हुये।

उन्होंने मोदी जी की खुल कर तारीफ की जिनके लिये कोयला कोयला है और कालिख कालिख है। जिनकेे दामन की अपनी खूबी है, खून हो या धूल सभी धुल कर साफ, भले ही जो आस-पास हैं, वो चितकबरे हैं। नितिन गड़करी हैं। राजनाथ सिंह हैं। सुषमा स्वराज हैं। वसुंधरा राजे हैं। स्मृति ईरानी हैं। पंकजा मुंडे हैं।

कमल कीचड़ में ही खिलता है, भाई! सभी कमल हैं। कमल के फूल हैं। पार्टी निशान हैं। और न जाने क्या-क्या हैं? और न जाने कितने हैं? पूरी व्यवस्था ही काली। सिस्टम ही कालिख है। ऐसा गड्ढ़ा है, जिसमें लोग कूदते हैं छप्प से, और कमल का फूल बन कर खिलते हैं। यह अलग बात है, कि जिन पर कीचड़ पड़ता है, वो कीचड़ से सन जाते हैं।

कोयला परेशान, कालिख हतास है। भला यह भी कोई बात है, कि जिसकी भी परत हटाया, उसे काला पाया। लोकतंत्र है, या लोक लुभावन नारा है?

बड़ी बद्नामी है।

एक छीटा धुलता नहीं, कि दूसरा उछल कर सामने आ जाता है।

घोटालों का जो रिकार्ड मनमोहन सरकार ने बनाया, एक साल की उपलब्धियों के खाते में, एक महीने में चार के हिंसाब से वह टूटने वाला है।

किसने कहा- कांग्रेस भ्रष्ट है? यूपीए का रिकार्ड अन बे्रकेबल है?

काजल की कोठरी, काला ही काला है।

न शाख है, न शरम है, न लिहाज है- ‘‘यह यूपीए नहीं, एनडीए की सरकार है। यहां इस्तीफे नहीं होते।‘‘

जिसे चिल्लाना हो, चिल्लाये।

जिसे चिंचियाना हो, चिंचियाये।

जिसे खम्भा नोचना हो खम्भा नोचे।

जो भी सरकार है, और जब तक सरकार है, झक्क लिबास है। बाद में नेहरू-गांधी परिवार है। मनमोहन सरकार है। जो अपदस्थ हैं, उनका ही कारनामा है।

जब तक चलती है, आदमी सरकार है। नहीं तो? दलालों के दलाल हैं। बोफोर्स तोप, लडाकू बम वर्षक विमान है।

वाह भाई सदी के महानायक आप ही तो सझदार हैं-

‘‘योग-योग

योग…!!

शीर्षासन!!‘‘

कालिख के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही हैं, कोयला परेशान है, कि इतनी खपत राजभवनों में क्यों है?

अजब नजारा है, सरकार सिर के बल खड़ी है।

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