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निवेदिता भावसार की पांच कविताएँ

निवेदिता भावसार  फोटो1. नदी मैंने नहीं नापी, तुम्हारी गहराई

नदी,
मैंने कभी नहीं नापी तुम्हारी गहराई
न मैंने डूबना चाहा,
ना हीं तुम्हे पार करना
मैं बस छपछपाती रही,
किनारों पर ही अपने पैर
सहलाती रही तुम्हारी लहरों को
तकती रही तुम्हारी असीम सुन्दरता
रोज़….

जब भी तुम ठहरी
जब भी तुम उफनी
जब भी तुम उदास हुई
या जब भी तुमने गरज कर तोड़े
अपने ख़ामोशी के बाँध
मैंने चुपचाप तुम्हे सुना
बनाते हुए दूर तक
तुम्हारे किनारों पे
अपने क़दमों के निशान

नदी,
मैंने कभी नहीं सिराए
तुममे अपने उम्मीदों के दीपक
क्यूंकि मैं जानती हूँ
तुम उजाले लील जाती हो

नदी,
तुम खूबसूरत तो हो
आअह ……
मगर क्रूर भी हो।

 

2. चाहती हूँ अपने कमरे में एक जंगल बसाना

कई दफा मन करता है
घूँघरू बाँध पगडंडियों पर
धूप के पीछे पीछे भागूँ

गिरते सम्हलते हुए।

सच्ची कसे हुए जूतों में
पाँव सड़ांध मारने लगे हैं

मन तो करता है, कहीं बजता हो मृदंग
और मैं नाच उठूँ
सागर की लहरों पर ,कृष्ण सी
सच अब ये सधे हुए कदम बलखाना चाहते हैं

मैं चाहती हूँ मिटटी में चिड़ियों सी लोट-पोट होना
बारीशों की आस में

गंध सुहाती नहीं अब परफ्यूम की

चाहती हूँ अपने कमरे में एक जंगल बसाना
छतों दीवारों के बीच अब दम घुटने लगा है.. ……

 

3. फटे चीथड़ों में भटक रही है ज़िन्दगी

आओ ना ,
झांको ना,
फटे चीथड़ों में भटक रही है ज़िन्दगी

नज़र भर देख लो
आह भर लो
झिझकते क्यूँ हो??

छुओ तो ज़रा
मारो कोई शानदार फिकरा
अरे मारो, मारो हहहाहा…………….

पता तो चले आँखें आग उगलती हैं
या बहाती हैं पानी
या हंस देती हैं
बेशर्मों सी

देखें बाकी है भी या नहीं संवेदनाएं।
तुममे, मुझमे
हम सब में…..

 

4. खाली डब्बा

खाली डब्बा
टूटा फूटा ,अटाले का
सड़क पर, यहाँ वहाँ लुढ़कता

टुनुक टुनुक बजता
लात खाता
बेरोजगारों की,
शराबियों की,
आवारा भटकते बच्चों की,

काश………….. इसमें उग आये कोई पौधा
छोटे छोटे फूलों का
और सजा ले इसे कोई अपनी बालकनी में
रंग करके….

 

5. जीन्स पर साड़ी लपेटी औरत

जीन्स पर साड़ी लपेटी औरत
बेडि़यां पहन के कैट वाक करती है
दो दुनिया के बीच खिंची लकीर पे
परंपराओं के चरण छूते चुपके से तकती है
अपने हिस्से का आकाश
सर से गिरता पल्लू सँभालते हुए
भर लिया करती है
अपनी जेबों में सपने
चटर-पटर चमकीले सितारों से।

वो जानती है , उसके चाँद का घर
लकीर के उस तरफ है

जहाँ जाकर भरोसा टूटता है
इस तरफ का |

-निवेदिता भावसार

कवि परिचय :

जावरा पॉलिटेक्निक से इलेक्ट्रिकल विषय में डिप्लोमा व , साहित्य में रूचि होने के कारण हिंदी साहित्य में पार्ट टाइम एम.ए. भी किया है। फ़िलहाल कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत । पढ़ने –लिखने में रूचि| ग़ज़लें पढ़ने का शौक । बशीर साब और दुष्यंतकुमार पसंदीदा शायर हैं।

संपर्क : निवेदिता भावसार
D/O श्री रमेश चन्द्र भावसार
C-१२/३८ L.I.G. ऋषिनगर उज्जैन (मध्यप्रदेश)

प्रस्तुति : नित्यानंद गायेन

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