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इक्वाडोर – विधेयकों के विरूद्ध सरकार को बेदखल करने की लड़ाई-1

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21वीं सदी के समाजवाद

या विकास के जरिये समाजवाद के सामने जैसी परेशानियां आती हैं, इक्वाडोर को उन्हीं परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया की समाजवादी सरकार के सामने, साम्राज्यवादी हस्तक्षेप और दक्षिणपंथी विपक्ष के द्वारा सरकार को गिराने का खतरा पैदा किया गया है। साम्राज्वादी- दक्षिणपंथी विपक्ष ने ‘विरासत कर‘ को मुद्दा बनाया है। उनके लिये ‘केपिटल गेन लाॅ‘ भी है।

जिसे 5 जून 2015 को राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के द्वारा इक्वाडोर के नेशनल असेम्बली में इन हेरिटेज टैक्स विधेयक पेश किया गया। जिसका मकसद वंशानुगत आधार पर प्राप्त सम्पत्ति पर न सिर्फ सरकारी कर लगाना है, बल्कि सम्पत्ति के आधार पर सदियों से टिकी सामाजिक असमानता को भी घटाना है। जिसका प्रभाव निम्न एवं मध्यम वर्ग पर नहीं पड़ेगा। इसके दायरे में समाज के प्रभुत्वशाली वंशानुगत आधार पर सम्पत्तिवान बने लोग आते हैं। जिनके पक्ष में अमेरिकी साम्राज्यवाद और इक्वाडोर की दक्षिणपंथी ताकतें हैं, जो देश की समाजवादी सरकार को सत्ता से बेदखल करना चाहते हैं।

31 मई 2015 को इक्वाडोर के राष्ट्रपति राॅफेल केरिया ने कहा- ‘‘विरासत कर का प्रभाव न तो मध्यम वर्ग पर पड़ेगा, ना ही समाज के सबसे कमजोर शोषित वर्ग के लोगों पर पड़ेगा, इसका प्रभाव सिर्फ उन लोगों पर पड़ेगा जो वंशानुगत आधार पर धनवान हैं।‘‘ राष्ट्रपति कोरिया ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए जोर देकर कहा, कि ‘‘इसके निशाने पर सिर्फ सबसे ज्यादा पैसे वाले लोग हैं। इसे आप सम्पत्ति का पुर्नवितरण भी कह सकते हैं।‘‘ उन्होंने आगे कहा- ‘‘35,000 से 70,000 अमेरिकी डाॅलर की वंशानुगत आधार पर प्राप्त सम्पत्ति पर 2.5 प्रतिशत का कर प्रस्तावित है। पिछले साल हर तीन हजार में से मात्र एक इक्वाडोरवासी के पास 35 हजार डाॅलर से ज्यादा की वंशानुगत सम्पति थी। इस नये कर का उद्देश्य इस आर्थिक जड़ता को समाप्त करना है।

अब तक इक्वाडोर में 69,000 से 1,37,000 अमेरिकी डाॅलर के बीच की सम्पत्ति पर 5 प्रतिशत और 8,27,000 अमेरिकी डाॅलर से ऊपर की सम्पत्ति पर 35 प्रतिशत का विरासत कर होता था। इस वृद्धि से यह 77.5 प्रतिशत हो जायेगा। यह सुधार स्थान्तरित होने वाले ‘टैक्स हैवन‘ के उन क्षेत्रों से भी कर वसूली पर काम करेगा जहां से कर नहीं आता और अंतर्राष्ट्रीय बैंकों को इन करों की चोरी करने से रोकने के लिये भी कारगर होगा। जिससे आने वाले रेवेन्यू को सरकार के द्वारा चलाये जा रहे ‘प्रोजेक्टों‘ में लगाया जायेगा।

राष्ट्रपति राॅफेल कोरिया के द्वारा तैयार किये गये इस विधेयक को 5 जून को नेशनल असेम्बली में पेश किया गया। उन्होंने कहा- ‘‘यह सम्पति का विरासत की वजह से हो रहे हस्तांतरण को घटायेगा, जिसकी वजह से ऐसे परिवार अपने वित्तीय ताकत को पुश्त-दर-पुश्त आने वाली अपनी पीढ़ी को सौंपते हैं। करीबी सूत्रों ने ‘टेलीसुर’ को बताया कि ‘‘यह उपाय फ्रांसीसी अर्थशास्त्री थाॅमस पिकेटली के विचारों से प्रभावित है, जिन्होंने 2014 की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब ‘कैपिटल इन द ट्वेन्टी फस्र्ट सेन्चुरी‘ लिखा था। जिसमें उन्होंने पूंजी के केन्द्रियकरण और पुर्नबंटवारे के बारे में बताया है।‘‘ इस साल की शुरूआत में थाॅमस अर्जेन्टिना में थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति क्रिस्टीना फर्नाण्डिस से मुलाकात की थी।

इक्वाडोर के विपक्षी राजनीतिज्ञों का कहना है, कि ‘‘यह कदम बजट में आयी कमी को पूरा करने के लिये उठाया जा रहा है।‘‘ जिसे राष्ट्रपति कोरिया ने एक सिरे से खारिज कर दिया।

नेशनल असेम्बली में विधेयक को पेश करने से ठीक पहले किये गये बदलाव के अनुसार- ‘‘विरासत कर से प्राप्त रेवेन्यू से कामगरों को स्टाॅक-शेयर दे कर भी भुगतान को स्वीकृति दी गयी है, जैसा कि कोरिया की सरकार चाहती है।‘‘ राष्ट्रपति ने कहा- ‘‘इससे उत्पादक के साधन पर स्वामित्व का लोकतांत्रिकरण होगा।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘इस कर से प्राप्त रेवेन्यू को सरकार किसी और मद में एक पैसा भी खर्च नहीं करेगी।‘‘

8 जून 2015 को इक्वाडोर के राष्ट्रपति ने एक अन्य विधेयक भी नेशनल असेम्बली के सामने पेश किया, जिसका लक्ष्य भू-सट्टेबाजी के जरिये गैरकानूनी मुनाफा (पूंजी) कमाने को रोकना है।

7 जून की रात प्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा, कि ‘‘किसी भी तरह का अतिरिक्त मूल्य, जो कि किसी भी भू-सम्पत्ति के मालिक के द्वारा सीधे तौर पर किये गये काम (क्रय-विक्रय) का परिणाम न हो, वह गैरकानूनी मुनाफा है।‘‘

इक्वाडोर की सरकार ने एक अध्ययन से यह पाया है, कि देश के 9 म्यूनिस्पाल्टियों में, जहां सार्वजनिक क्षेत्रों में निवेश किया गया, वहां के आस-पास के क्षेत्रों की जमीन की खरीदी-बिक्री के जरिये 600 मिलियन डाॅलर का हस्तांतरण निजी हाथों में हुआ। नये कानून के आधार पर ऐसे हंस्तांतरण पर रोक लगेगी। राष्ट्रपति कोरिया ने उदाहरण देते हुए कहा, कि ‘‘यूनियन आॅफ साउथ अमेरिकन नेशन के मुख्यालय के आस-पास के जमीन की कीमत 6 गुणा तक बढ़ गयी, जो कि राजधानी क्यूटो के उत्तर में स्थित है। सरकार को बाध्य हो कर वहां जमीन खरीदने के लिये ज्यादा खर्च करना पड़ा। कीमतों की यह वृद्धि उस मुख्यालय के निर्माण की वजह से हुई जिसमें आम जनता का पैसा लगा है।‘‘

राष्ट्रपति ने बताया कि, पहले से यह कहा जाता रहा है, कि जिन लोगों के सम्पर्क राजनीतिज्ञों से हैं, और जो सरकार के भीतरी जानकारियों से जुड़े हुए हैं, वे इस तरह के सट्टेबाजी का सबसे ज्यादा फायदा उठाते हैं।‘‘ जिसे रोकने की वैधानिक पहल करते हुए कोरिया सरकार ने कहा है, कि ‘‘नये कर से प्राप्त धनराशि स्थानीय सरकार के पास जायेगी, ना कि केन्द्रीय सरकार के पास।‘‘ ताकि उस क्षेत्र में जारी सरकारी सामाजिक विकास योजनाओं के लिये अतिरिक्त आर्थिक स्त्रोत की व्यवस्था हो सके।

8 जून से आर.टी.एस. टेलीविजन नेटवर्क को दिये गये एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति कोरिया ने कहा- ‘‘1,41,600 डाॅलर के विरासत के लिये 4.8 प्रतिशत का कर देना होगा। हर साल 1,00,000 इक्वाडोरवासी में से 3 ही इक्वाडोरवासी ऐसे हैं जो 50,000 डाॅलर से ज्यादा का विरासत पाते हैं। 50,000 डाॅलर की विरासत पाने वालों को 0.7 प्रतिशत का कर भुगतान करना होगा, जो कि 350 अमेरिकी डाॅलर है।‘‘

राष्ट्रपति ने दृढ़तापूर्वक कहा कि ‘‘विरासत में प्राप्त सम्पत्ति लातिनी अमेरिकी देशों में आर्थिक असमानता का एक बड़ा कारण है। इक्वाडोर का नया कानून न्यायसंगत समाज निर्माण की ओर उठाया गया कदम है।‘‘

जिसके खिलाफ 8 जून को इक्वाडोर की राजधानी क्योटो में दक्षिणपंथी विपक्ष ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की शुरूआत 200 लोगों से हुई, मगर बाद में लोगों की संख्या बढ़ने लगी, क्योंकि सरकार समर्थक लोग भी सड़कों पर उतर आये। कानून और व्यवस्था को बनाये रखने के लिये सरकार ने क्योटो के मुख्य मार्ग की नाकेबंदी कर दी।

इक्वाडोर में इन प्रदर्शनों की शुरूआत तब हुई, जब राष्ट्रपति राफेल कोरिया ब्रुसेल्स की राजकीय यात्रा पर थे। विपक्ष इस अवसर का फायदा, नये विधेयक को मुद्दा बनाकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिये, उठाना चाहती थी। वहीं सरकार समर्थकों ने राष्ट्रपति कोरिया के समर्थन में प्रदर्शन किये। वो नारे लगा रहे थे, जिसका एक ही मतलब था, कि उन ताकतों के द्वारा सत्ता परिवर्तन मंजूर नहीं, जो ताकतें चुनाव में हारती रही हैं।

पीएआईएस एलाएन्स पार्टी के सदस्य फ्लोरीन्का पग्लियारोनी ने टेलेसुर से कहा- ‘‘विपक्ष अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहा है और इसका आरोप सरकार पर लगा रहा है।‘‘ उन्होंने जानकारी दी, कि ‘‘ये लोग छोटे-छोटे टुकडि़यों में पिछले सप्ताह से आ रहे हैं।‘‘

सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी काला झण्डा लिये हुए थे और राष्ट्रपति राफेल कोरिया को सत्ता से बेदखल करने के नारे लगा रहे थे। उनके बैनरों पर नये कानून विरोधी नारे लिखे थे। उनके तख्तियों पर देश के चुने हुए राष्ट्रपति के लिये ‘तानाशाह‘ ‘निरंकुश शासक‘ और ‘सत्ता हड़पनेवाला‘ लिखा हुआ था। उन्होंने ‘यह देश हमारा है‘ और ‘राॅफेल कोरिया बाहर जाओ‘ की तख्तिया भी ले रखी थीं।

ब्रुसेल्स-जर्मनी जाने से पहले राॅफेल कोरिया ने अपने ट्विटर एकाउण्ट पर देशवासियों को चेतावनी दी थी, कि ‘‘पहले के बुर्जुआ वर्ग के कुछ लोग क्रांति की योजना बना रहे हैं, मगर हम उनसे काफी ज्यादा हैं, वो हमें हरा नहीं सकते। 2017 में हम उन्हें फिर हरा देंगे।‘‘ उन्होंने अपने समर्थकों को अपने देश का खयाल रखने को भी कहा था।

जिसका सीधा सा मतलब है, कि सरकार को इस बात की आशंका थी कि विपक्ष ‘विरासत कर‘ और ‘पूंजी अर्जित करने पर लगाये गये कर‘ को मुद्दा बना कर प्रतिक्रांति की पहल कर सकता है। इस लिये जैसे ही विपक्ष और सरकार समर्थकों के जत्थों की संख्या सड़कों पर बढ़ने लगी, इक्वाडोर की पुलिस दोनों गुटों के बीच के संघर्षों के बीच आ गयी। उसकी कोशिश प्रदर्शनों को हिसंक होने से रोकने की थी। इसके बाद भी सरकार समर्थक एक प्रदर्शनकारी को विपक्षी प्रदर्शनकारियों पीट दिया। विपक्ष प्रदर्शन को हिंसक बनाने में लगा रहा। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है, कि ‘‘सरकार समर्थकों पर हमला करना विपक्ष के लिये बड़ी बात नहीं। यह उनकी आदत है।‘‘

सरकार समर्थक इक्वाडोर के जनजाति नेता कारमेन टेने ने कहा- ‘‘वो हमारे खिलाफ गंदी और अश्लील बातें कर रहे थे। उन्होंने पीएआईएस एलायंस के झण्डों को जलाना शुरू कर दिया।‘‘ उन्होंने कहा- ‘‘आप ऐसा नहीं कर सकते।‘‘ उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘देश की पिछली दक्षिणपंथी सरकार इक्वाडोर की मूल जनजातीय समुदाय के साथ बुरा व्यवहार करती रही है। वो दक्षिणपंथी हैं, और हमेशा दक्षिणपंथी ही बने रहेंगे।‘‘

‘केपिटल गेन लाॅ‘ पूंजी अर्जित करने के कानून के तहत भू-स्वामी को यदि 7,080 अमेरिकी डाॅलर से ज्यादा का मुनाफा होता है तो उस पर टैक्स लगेगा।

इक्वाडोर की राजधानी के बाहरी इलाका -टुम्बैको वैली- में मारिया क्रिस्टीना के घर के करीब एक बड़ा हाईवे और मुरिस्कलसक्र इण्टरनेशनल एयरपोर्ट का निर्माण हो रहा है। इन निर्माण कार्यों की वजह से इस इलाके के कृषि योग्य जमीन की कीमत सहसा ही काफी बढ़ गयी। कुछ जगहों पर तो यह बढ़ोत्तरी 10 गुणा हो गयी है।

मारिया क्रिस्टीना ने टेलेसुर के साथ अपने इण्टरव्यू में कहा- ‘‘हमें इसका लाभ मिलना चाहिए। हम इसकी कीमत बढ़ा सकते हैं। लेकिन यह एक भ्रम है, क्योंकि कीमतें इतनी बढ़ गयी हैं, कि हम उन्हें बेच तक नहीं सकते।‘‘

‘केपिटल गेन लाॅ‘ इक्वाडोर के नेशनल असेम्बली में चर्चा के लिये लम्बित है। जिसका लक्ष्य भविष्य में भू-सम्पत्ति की सट्टेबाजी को नियंत्रित करना है, ताकि भू-सम्पत्ति का पुर्नबंटवारा हो सके और जमीन तक ज्यादा से ज्यादा लोगों की पहुंच को सुनिश्चत किया जा सके।

सीधे तौर पर इक्वाडोर की समाजवादी सरकार के द्वारा यह उस वर्ग पर हमला है, जिसके हाथ में बड़ी सम्पत्ति है, और जो देश की विकास योजनाओं का लाभ उठाता रहा है। जिसकी पकड़ अब राजसत्ता पर नहीं है। इस लिये यह लड़ाई लम्बी खिंच रही है। कोरिया सरकार इक्वाडोर में अपने समाजवादी कदमों को लागू करने में लगी है, और दक्षिणपंथी विपक्ष उसे सत्ता से बे-दखल करने की लड़ाई लड़ रहा है।

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