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क्यूबा और अमेरिका के बीच दूतावास स्तर के कूटनीतिक सम्बंधों की पुर्नस्थापना

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54 साल के बाद

लातिनी अमेरिकी एवं कैरेबियन देश क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दूतावास स्तर के कूटनीतिक सम्बंधों की पुर्नस्थापना हुई। 20 जुलाई 2015 को हवाना और वाशिंगटन में दोनों देशों के राजनीतिक दूतावास खोले गये। इन खुले हुए दूतावासों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनका समाधान अभी बाकी है। आने वाला कल इन्हीं मुद्दों के तय होने या नहीं होने के सवालों से जुड़ा है।

  • जिस ओबामा सरकार ने क्यूबा से राजनीतिक एवं दूतावास स्तर के सम्बंधों की बहाली की पहल की, उसी ओबामा सरकार ने क्यूबा पर लगाये गये आर्थिक एवं वित्तीय प्रतिबंधों को अब तक समाप्त नहीं किया है। जिसके बिना कूटनीतिक सम्बंधों की बहाली का विशेष अर्थ नहीं है।
  • क्यूबा के ‘ग्वाततेनामो-बे‘ पर अमेरिकी कब्जा है। जहां दुनिया का सबसे बद्नाम अमेरकी कारागार और यातना शिविर है। जिसे बंद करने का मसौदा व्हाईट हाउस तैयार कर चुका है। लेकिन, क्यूबा को वापस करने का जटिल मुद्दा है। और अमेरिकी सरकार ऐसा नहीं करेगी।
  • पिछले 5 दशक से अमेरिका क्यूबा की समाजवादी सरकार का तख्तापलट करने की साजिशें रचता रहा है। तीसरी दुनिया के देशों में उसके राजनीतिक दूतावास साजिशों का केंद्र रहे हैं। अब क्यूबा में अमेरिकी दूतावास भी है, जिसे क्यूबा की सरकार साजिशों का केंद्र बनने नहीं देगी और अमेरिका अपने लिये ‘विशेष छूट‘ का आदी है।

यह सोचना कि अमेरिकी सरकार की आदतें बदल जायेंगी, या यह मानना, कि अमेरिका की नीतियों में परिवर्तन आ गया है, और वह लातिनी अमेरिका और कैरेबियन देशों के साथ अपने सम्बधों को नया आधार दे रही है, अब तक के अनुभवों और उसके साजिशों को नकारना होगा। जिसका स्वाद तीसरी दुनिया के देशों को आज भी मिल रहा है।

इसके बाद भी सच यह है, कि यह पहल आपसी रिश्ते एवं संवाद की नयी स्थिति है।

1 जुलाई 2015 को वाशिंगटन और हवाना ने आधिकारिक रूप से इस बात की घोषणां की, कि ‘‘दोनों देश अपने राजनीतिक दूतावास को 20 जुलाई को फिर से खोलेंगे, ताकि कूटनीतिक सम्बंधों की पुर्नस्थापना हो सके और उसे बढ़ाने की कोशिशें की जा सकें।‘‘ हालांकि इस मुद्दे पर व्हाईट हाउस को अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकनों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसने क्यूबा में दूतावास खोलने के लिये संभावित किसी भी वित्तीय खर्च पर रोक लगाा दिया है। रिपब्लिकन इस कूटनीतिक सम्बंध को आगे बढ़ाने क पक्ष में नहीं है। लेकिन क्यूबा अमेरिका से अपने चरणबद्ध सम्बंधों के बारे में, तयशुदा नीति के तहत आगे बढ़ रहा है। क्यूबा विदेश मंत्रालय की डायरेक्टर फाॅर द यूनाइटेड स्टेट- जोशफिना विदाल ने कहा- ‘‘20 जुलाई के दिन, अमेरिका के साथ शुरू किये गये, हम अपने पहले चरण को बंद करेंगे, और आपसी सम्बंधों को सामान्य बनाने के दूसरे चरण की शुरूआत करेंगे।‘‘

क्यूबा पर लगाये गये प्रतिबंधों को हटाने का दबाव अमेरिका पिछले कई सालों से झेल रहा है। 1992 से राष्ट्रसंघ के जनरल असेम्बली ने अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा करने वाले 23 प्रस्तावों को पारित किया है, जिसमें अमेरिका के द्वारा क्यूबा पर लगाये गये प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग की गयी हैं अंतिम पारित प्रस्ताव में 193 राष्ट्रसंघ के सदस्य देशों में से 188 ने प्रतिबंधों को जारी रखने के विरोध में मतदान किये। सिर्फ अमेरिका और इस्त्राइल ने पक्ष में मतदान किये, जबकि तीन देश- प्लाउ, मार्शल आईसलैण्ड और माइक्रोनेसिया ने मतदान में हिंस्सा नहीं किया।

क्यूबा की सरकार के अनुमान के अनुसार- उसे इस वित्तीय एवं आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से अब तक 1 ट्रिलियन डाॅलर से ज्यादा की आर्थिक क्ष्ति हुई है। 1 जुलाई को जारी वक्तव्य में क्यूबा के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राज्य से कहा है, कि ‘‘वह इस द्वीप के देश पर लगाये गये प्रतिबंधों को समाप्त करे।‘‘ वक्तव्य में यह स्पष्ट कर दिया गया है, कि ‘‘दोनों देशों के सामान्य एवं सहज कूटनीतिक सम्बंध इस बात पर निर्भर करते हैं।‘‘ हमारे आपसी सम्बंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते, जब तक कि आर्थिक, व्यापारिक एवं वित्तीय प्रतिबंधों को सख्ती से लागू किया जाता रहेगा। जिससे कि क्यूबा के आम लोगों को हानि पहुंच रही है।‘‘ वक्तव्य में यह भी कहा गया है, कि ‘‘यह प्रतिबंध हमारे आर्थिक विकास के लिये बड़ी बाधा है, और यह अंतर्राष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन है। जिससे सभी देशों का हित कुछ ना कुछ प्रभावित हो रहा है।

1 जुलाई को ही अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया से कहा- ‘इस गर्मी में -अगस्त- विदेश मंत्री जाॅन कैरी हवाना की यात्रा पर जायेंगे जहां वो अमेरिकी झण्डे को फिर से दूतावास पर गर्व के साथ फहरायेंगे। यह सिर्फ प्रतिकात्मक नहीं होगा। उनके साथ ऐसे राजनीतिज्ञों का बड़ा समूह होगा, जो क्यूबा से बड़े स्तर पर जुड़ने में सक्षम होंगे।‘‘ ओबामा ने कहा- ‘‘अमेरिका क्यूबा के साथ सहयोग करने के रास्तों को ढूंढेगा। किंतु हमारे बीच असहमति के कई मुद्दे भी होंगे।… हम उन मुद्दों पर बोलने से नहीं हिचकेंगे जिनसे अमेरिका सहमत नहीं है।‘‘

अमेरिकी राष्ट्रपति ने निष्कष के रूप में कहा- ‘‘अमेरिका और क्यूबा के लोग आगे बढ़ने के लिये तैयार हैं।’’ इसलिये उनके पास यह तर्क है कि अमेरिकी कांग्रेस भी दोनों देशों के सम्बंधों को सामान्य बनाने के लिये सहमत हो। समय आ गया है, कि वह क्यूबा पर लगाये गये प्रतिबंधों को समाप्त करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘‘क्यूबा पर लगाये गये प्रतिबंधों की नीतियां नाकाम रही हैं। वह अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हुई हैं।‘‘

लातिनी अमेरिका के किसी भी देश की तुलना में क्यूबा का वैश्विक महत्व और अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक उपस्थिति और प्रतिनिधित्व काफी बड़ा है। क्यूबा के विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के 190 देशों के साथ क्यूबा के राजनीतिक एवं कूटनीतिक सम्बंध है और वह 119 दूतावासों तथा 21 वाणिज्य दूतावासों को संचालित एवं व्यवस्थित करता है। लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों को अपना बैकयार्ड (पिछवाडा) मानने और उसे नियंत्रित करने की अमेरिकी नीति के खिलाफ आज जो समाजवादी एवं महाद्वीपीय एकजुटता नजर आने लगी है, क्यूबा वास्तव में उसका नेतृत्व करता है। जो अमेरिकी एवं साम्राज्यवादी हितों के विरूद्ध है। जहां जनसमर्थक सरकारों की नयी सोच विकसित हो गयी है।

यह मानी हुई बात है, कि अमेरिका और क्यूबा के हित समान हो ही नहीं सकते।

और यदि दोनों के हितों में समानता बनती है, तो सीधा सा अर्थ होगा, कि क्यूबा बाजारवादी अर्थव्यस्था की ओर मुड़ रहा है।

जिसकी संभावना कम है।

‘‘ऐसी संभावना नहीं है‘‘, हम यह लिखने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों में, समाजवाद भी संक्रमण के दौर से गुजर रह है।

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय अनिवार्यतायें सिर्फ अमेरिका के लिये ही नहीं, क्यूबा के लिये भी बदल रही हैं।

दोनों देशों के बीच, दूतावास स्तर के सम्बंधों की स्थापना, तमाम जटिलताओं के अनिर्णित रहते हुए हुई है। जबकि माना यही जाता रहा है, कि दूतावास स्थापित करने की सबसे बड़ी परेशानी यह है, कि अमेरिका यह मांग कर चुका है, कि उसे क्यूबा में काम करने की अपेक्षित स्वतंत्रता दी जाये, जिससे क्यूबा सहमत नहीं है, क्योंकि अमेरिका क्यूबा के विपक्ष को सत्ता परिवर्तन के लिये प्रशिक्षा सुविधा और आर्थिक सहयोग देता रहा हे। अमेरिका ‘क्यूबा में लोकतंत्र को बढ़ाने‘ के नाम पर यह करता है।

नेशनल एन्डाउमन्ट फाॅर डेमोक्रेसी -एनईडी- को अमेरिकी फण्ड मिलता रहा है। 12 जून 2015 को ‘यू एस कमेटी आॅन एप्रोप्रियेशन ने 30 मिलियन डाॅलर का आबंटन किया। ‘‘क्यूबा में लोकतंत्र को बढ़ाने और सिविल सोसाईटी को मजबूत करने के लिये।‘‘ जिसमें 89,00,000 डाॅलर एनईडी के लिये है। यह जानकारी ‘कमेटी के रिपोर्ट में दी गयी है।

एनईडी एक ऐसा फण्ड है, जिसका उपयोग अमेरिका वामपंथी और समाजवादी सरकारों को कमजोर करने और उन्हें समाप्त करने के लिये करता है। क्यूबा के विपक्ष को अमेरिका अपना समर्थन देता रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है, कि ‘‘यू एस कमेटी आॅन एप्रोप्रियेशन ने निर्देषित किया है, कि यह फण्ड सिर्फ उन कार्यक्रमों और समाजसेवियों के लिये है, जो सेक्शन 109 (ए) आॅफ द क्यूबन लिबर्टी एण्ड साॅलिडर्टी एक्ट आॅफ 1996 और सेक्शन 1705 आॅफ द क्यूबन डेमोक्रेटिक एक्ट आॅफ 1992 पर आधारित होंगे। इस फण्ड का उपयोग ऐसे व्यापार को बढ़ाने, आर्थिक सुधारों, को लागू करने या ऐसे औद्योगिक विकास कार्यों में सहयोग देने के लिये नहीं किया जायेगा, जो कि लोकतंत्र को बढ़ाने का काम नहीं करता है।‘‘ अमेरिकी लोकतंत्र का मतलब अमेरिकी हितों के लिये लोकतंत्र का उपयोग के अलावा और कुछ नहीं होता। इसलिये अमेरिकी सरकार इस बात का चाहे जितना भी शोर मचाये कि वह क्यूबा से अपने सम्बंधों को सामान्य करना चाहती है, सच सिर्फ इतना है, कि वह क्यूबा में सत्ता परिवर्तन की पक्षधर है। वह उन्हीं ताकतों के पक्ष में हैं, जो गैर समाजवादी हैं।

यह उल्लेखनिय है, कि अमेरिकी कांग्रेस ने क्यूबा में अमेरिकी दूतावास स्थापित करने के लिये किसी भी तरह का फण्ड आबंटित नहीं किया है।

अमेरिका के द्वारा क्यूबा से सम्बंधों को सुधारने के लिये किये गये तमाम पहल सतही हैं। उन नीतियों को बदलने और समाप्त करने की है, जो पहले से ही असफल हो चुकी है, चाहे वह प्रतिबंधों से उसे अलग-थलग करने की रही हों, या उसे आतंकियों को पनाह देने वाले देशों की सूची में डालने की रही हो। विश्व समुदाय ने कभी भी क्यूबा पर लगाये गये अमेरिकी प्रतिबंधों का साथ नहीं दिया, ना ही क्यूबा को आतंकी देश माना।

29 मई को अमेरिका ने क्यूबा को अपने ‘लिस्ट आॅफ स्टेट स्पाॅन्सर आॅफ टेरेरिज्म‘ से हटा दिया। 1 मार्च 1982 में अमेरिका ने क्यूबा को इस सूचि में डाला था। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेण्टे का कहना था कि ‘‘हवाना अपने यहां आतंकी -अपराधियों को शरण दे रहा है।‘‘

अमेरिका इस बात को भले ही अधिकृत रूप से घोषित न करे, मगर क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो हमेशा उसके लिये वांछित रहे, क्योंकि उनकी सरकार लातिनी अमेरिका और अफ्रीका के अमेरिकी विरोधियों के पक्ष में रही। फिदेल कास्त्रो दुनिया के किसी भी देश में अमेरिकी हस्तक्षेप के खिलाफ थे। वो उनके पक्षधर थे, जो साम्राज्यवाद के खिलाफ अपनी राष्ट्रीय सम्प्रभुसत्ता के लिये लड़ रहे थे। अमेरिकी सरकार यह आरोप लगाती रही है, कि क्यूबा की कास्त्रो सरकार ऐसे लोगों को प्रशिक्षण और हथियारबद्ध करती रही है।

1992 में राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो ने घोषणां की कि ‘‘अब क्यूबा की नति हथियारबद्ध लोगों और सशस्त्र संघर्षों को समर्थन देने की नहीं है।‘‘

1998 में अमेरिकी इंटेलिजेन्स कम्यूनिटी ने अपने एक विस्तृत समीक्षा में निष्कर्ष स्वरूप कहा, कि ‘‘क्यूबा अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये खतरा नहीं है।‘‘ जिसका सीधा सा मतलब यह हुआ कि क्यूबा अब आतंकवाद को -जिसे अमेरिका आतंकवाद कहता है- समर्थन और सहयोग नहीं दे रहा है।

फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका पर हुए आतंकी हमले- 9/11 की निंदा अपने राष्ट्रीय टीवी पर की थी। उस दौरान उन्होंने अमेरिका के यात्री विमानों के लिए क्यूबा के एयरपोर्ट को खोल दिया था। इसके कुछ सप्ताह बाद, राष्ट्रसंघ के सभी 12 आतंकवाद विरोधी समझौतों पर हंस्ताक्षर भी किया। बाद के वर्षों में अमेरिका ने इस बात की पुष्टि भी की कि साल 2008 के बाद क्यूबा के बैंकिंग सिस्टम से आतंकवाद से सम्बंधित किसी भी वित्तीय सहयोग के प्रमाण नहीं हैं।‘‘ वाशिंगटन ने यह भी कहा कि ‘‘2006 से क्यूबा ने अमेरिका के किसी भी भगोड़े को अपने यहां शरण नहीं दिया है।‘‘

अमेरिका ने क्यूबा, ईरान, सीरिया और सूडान को अपने ‘स्टेट स्पाॅन्सर आॅफ टेरेरिज्म‘ की सूचि में रखा है। जिससे अब क्यूबा बाहर है और अब संभवतः ईरान की बारी है।

17 जुलाई 2015 को क्यूबा के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ‘‘हो सकता है, कि वाशिंगटन अभी भी देश की कम्यूनिस्ट पार्टी को सत्ता से बे-दखल करने की कोशिश करे। बावजूद इसके कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया है, कि वो सत्ता परिवर्तन से परे है।

क्यूबा ने यह खुले तौर पर कहा है, कि ‘‘यदि अमेरिका क्यूबा से अच्छे सम्बंध चाहता है, तो उसे सत्ता परिवर्तन की नीतियों को छोड़ देना चाहिये।‘‘ अपने प्रेस कान्फ्रेन्स के दौरान विदेश मंत्रालय के अधिकारी गस्तावो मसीन ने कहा- ‘‘आपको अपने राष्ट्रपति के शब्दों का मान रखना चाहिये, उसे प्रोत्साहित करना चाहिये।… यह भी देखना चाहिये कि व्यावहारिक रूप में क्या हो रहा है?‘‘

अप्रैल में, ओएएस के पनामा सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने क्यूबा के सम्बंध में रिपोर्टस् से कहा था- ‘‘वी आर नाॅट इन द बिजनेश आॅफ रिज्यूम चेंज‘‘ (अब हम सत्ता परिवर्तन के धंधे में नहीं हैं)। सोचा जा सकता है, कि पहले थे। यह वक्तव्य उन्होंने क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो की मौजूदगी में दिया था। उनसे मुलाकात के बाद। जिसका उल्लेख करते हुए मसीन ने कहा- ‘‘हमने ऐसा अभी तक कुछ नहीं देखा है, कि कहा जा सके कि व्यावहारिक रूप में ऐसा ही है।‘‘ मसीन क्यूबा में लोकतंत्र को प्रोत्साहित करने के लिये सैंकडों मिलियन डाॅलर के अमेरिकी फण्ड की बात कर रहे थे। जिसे क्यूबा अपने विरूद्ध अमेरिकी विरोध और शत्रुतापूर्ण कार्यवाही मानता है। ‘राईटर्स‘ के अनुसार- 2016 के लिये अमेरिकी स्टेट्स डिपार्टमेंट ने ऐसे ही कार्यक्रम के लिये 20 मिलियन डाॅलर की मांग की है।

18 जुलाई 2015 की ‘नेशनल काउन्सि आॅफ यूनिव्हरसीटी इन हवाना में दिये गये अपने भाषण में क्यूबा के उपराष्ट्रपति मिगुएल डियाज़ कानेल ने कहा- ‘‘यदि अमेरिका क्यूबा पर लगाये गये प्रतिबंधों को नहीं हटाता, यदि अवैध रेडियो और टेलीविजन पर रोक नहीं लगाता, और यदि वह अवैध तरीके से अपने कब्जे में लिये हुए ग्वातेनामो-बे को वापस नहीं करता, और उसके दूतावास के राजनयिकों का बर्ताव नहीं बदलता है, तो दोनों देशों के आपसी सम्बंधों का सामान्य होना मुश्किल है।‘‘

इसके बाद भी क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोडरिज 19 जुलाई रात 12 बज कर 1 मिनट पर वाशिंगटन पहुंचे और 20 जुलाई को -54 साल पहले बंद हुए- क्यूबा के दूतावास के पुर्नउद्घाटन समारोह में भाग लिया। क्यूबा के दूतावास पर नया झण्डा फहराया गया, मगर दूतावास के अंदर वहीं झण्डा लगाया गया जो 1961 में अमेरिकी राष्ट्रपति आइजन हावर की सरकार द्वारा क्यूबा से सभी कूटनीतिक सम्बंधों को समाप्त करने की घोषणां के बाद, क्यूबा के दूतावास में झुकाया गया था।

इसका प्रतिकात्मक अर्थ आने वाले कल में ही स्पष्ट होगा।

इस मौके पर क्यूबा के विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच के अ-सुलझे मुद्दों सहित अमरिकी राष्ट्रपति ओबामा के द्वारा इस रिश्ते की बहाली के लिये किये गये प्रयत्नों का उल्लेख किया। उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने दोनों देशों के बेहतर सम्बंधों की सकारात्मक दिशा देने और क्यूबा की ओर से सकारात्मक भावना का जिक्र करते हुए कहा- ‘‘हम इस बात की पुष्टि करते हैं, कि क्यूबा की इच्छा अमेरिका के साथ सकारात्मक भावना के साथ सामान्य सम्बंध बनाये रखने की है। किंतु हमारी स्वतंत्रता और किसी भी तरह के हस्तक्षेप के बिना ही यह संभव है।‘‘

उन्होंने लातिनी अमेरिका एवं कैरेबियन देशों के प्रति अपना समर्थन देने के लिये आभार व्यक्त किया। क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजली दी और क्यूबा के कम्यूनिस्ट क्रांतिकारी तथा पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो के कार्यों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो की ओर से कहा- ‘‘उनकी सरकार अमेरिका के साथ अपने सम्बंधों की पुर्नस्थापना के प्रति पूरी तरह से वचनबद्ध हैं, जो कि लातिनी अमेरिका और कैरेबियन महाद्वीप को शांति का क्षेत्र बनाने में सहयोगी होगा।‘‘

क्यूबा में भी अमेरिकी दूतावास फिर से खुल गया है।

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